Home Short Moral Stories in Hindi खुद को बदलो दुनिया को नहीं

खुद को बदलो दुनिया को नहीं

by Hind Patrika

खुद को बदलो दुनिया को नहीं – Short Stories in Hindi

Short Stories

Short Stories

Short Stories in Hindi : एक समय की बात है.एक राजा था जिसकी प्रजा उसके राज्य मे बहुत खुश थी.उसके शासन मे सभी बहुत खुश थे और वहाँ धन की कोई कमी नही थी और ना ही कोई आपराधिक घटनायें वहाँ देखने को मिलती थी.

 

एक दिन राजा ने कुछ ऐतिहासिक और तीर्थ स्थलों मे जाने की सोची.उसने पैदल यात्रा करने का निश्चेय किया जिससे वह अपनी प्रजा के लोगो से बात कर सके और उनकी परेशानियों से भी अवगत हो सके.प्रजा भी बहुत खुश हुई ये समाचार जानकार और अपने राजा के लिए दिल से दुआये देने लगी.

 

काफ़ी हफ्तों की यात्रा के पश्चात राजा वापस महल पहुँचा.वह काफ़ी खुश था की उसने तीर्थ स्थलों की यात्रा की और अलग अलग लोगों से भी मिला और ये देख सका की प्रजा किस तरह उसके शासन मे जीवन यापन कर रही है.हालाँकि उसकी ये खुशी ज़्यादा देर तक नही टिक सकी.चूँकि उसकी ये पहली पैदल यात्रा थी इसलिए राजा के पैरों से बहुत दर्द होने लगा.उसने अपने मंत्रियो को बुलाया और कहा कि सड़क की हालत बहुत खराब है ओर काफ़ी रास्ते तो पथरीले हैं और उससे रास्तों की वजह से बेहद परेशानी झेलनी पड़ी है.उसने कहा की वो उन लोगो के लिए बहुत ज़्यादा दुखी है जो उन रास्तों पर रोज चलते है और ये कष्ट झेलते है.उसने अपने मंत्रियो से तुरंत देश की सड़क को leather(चमड़ा) से ढकने का आदेश दिया.

 

राजा ने ये सब प्रजा की भलाई ओर उनकी खुशी के लिए ही सोचा था.किंतु इससे उसके मंत्री स्तभध थे क्यूंकी पर्याप्त leather बिछाने के लिए बहुत गायों और अन्य जानवरों को जान से हाथ धोना पड़ता और इसमे धन भी बहुत ज़्यादा खर्च होता.

 

एक बुद्धिमान मंत्री एक उपाय लेकर राजा के पास गया.राजा ने उससे इसके विकल्प के बारे मे पूछा तो उसने कहा की,” आपको पवित्र गायों को जान से मारने की ज़रूरत क्यूँ है चमड़े से सड़क को ढकने के लिए.बजाय इसके आप चमड़े के टुकड़ों से अपनो पैरों को ढक सकते हैं और उसका इस्तेमाल जूते के रूप मे कर सकते हैं.”

 

राजा उसके उपाय से बहुत खुश हुआ और उसने तुरंत ही लोगो के लिए चमड़े से बने हुए जूतों को बनाने का आदेश दे दिया.

 

“हम कई बार दूसरों की कमियाँ देखते है पर खुद अपनी कमियों पर गौर नही करते, हम दूसरों को बदलने के लिए फोर्स नही करना चाहिए.हम नही साँझ पाते की बदलाव सबसे पहले खुद के अंदर आना ज़रूरी है, तभी हम बाहार बदलाव ला सकते है.”

You may also like

Leave a Comment

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.