द्रोण की कृपी का परामर्श

द्रोण की कृपी का परामर्श  : द्रोण की कृपी का परामर्श ‘कृपी!” द्रोण विवश भाव से बोले, “कभी-कभी तो इच्छा होती है कि इस अभावग्रस्त जीवन का अंत करके शांति की नींद सो जाऊं।”
“आप ठीक सोचते हैं स्वामी!” आंखों में आंसू भरकर कृपी बोली, “किंतु क्या जीवन का अंत करके आपको शांति मिल सकेगी? पुत्र और पत्नी की पीड़ा, उनका शोक आपको अशांत न कर देंगे? संघर्ष करने की अपेक्षा पलायन करके आप प्रसन्न रह सकेंगे?”
“फिर मैं क्या करूं?” द्रोण व्याकुल होकर चीख-से पड़े, “मेरी तो कुछ भी समझ में नहीं आता।”
**मैं क्या परामर्श दें स्वामी!”कृपी धीरे से बोली, “किंतु इस विषम काल में मैं आपको कुछ स्मरण अवश्य कराना चाहती हूं। एक बार पांचालराज की चर्चा करते हुए आपने बताया था कि महाराज द्रुपद बाल्यकाल में आपके घनिष्ट मित्र रहे हैं…तो आप उनके पास क्यों नहीं जाते ! विपत्ति में मित्र ही मित्र के काम आता है।”

द्रोण की कृपी का परामर्श

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