Home Akbar Birbal Stories in Hindi विधवा की किस्मत Akbar Birbal Stories in Hindi

विधवा की किस्मत Akbar Birbal Stories in Hindi

by Hind Patrika

विधवा की किस्मत Akbar Birbal Stories in Hindi

विधवा की किस्मत Akbar Birbal Stories i

विधवा की किस्मत Akbar Birbal Stories in Hindi : एक दिन एक बूढ़ी विधवा अपनी दुखभरी कहानी लेकर बीरबल के पास पहुँची और बोली ‘श्रीमान्, मेरे साथ छल हुआ है। कृपया न्याय कीजिए।” ‘छल । किसने किया ऐसा?” बीरबल ने पूछा। विधवा ने बीरबल को बताया ‘श्रीमान्, छह महीने पहले मैंने तीर्थ-यात्रा पर जाने का निर्णय लिया था। परंतु मेरे पास कुछ बचत की हुई मुद्राएँ थीं, जिन्हें मैं सुरक्षित रखना चाहती थी। इसलिए मैं एक साधु के पास पहुँची और बोली “मैं तीर्थ-यात्रा पर जा रही हूँ, मेरी थैली में ताँबे के कुछ सिक्के हैं, कृपया इन्हें मेरे तीर्थ-यात्रा से वापस आने तक अपने पास सुरक्षित रख लीजिए।” इस पर साधु बोला “क्षमा करना, मैं भौतिक सुख प्रदान करने वाली वस्तुओं से बहुत दूर हूँ, इसलिए मैं तुम्हारे धन को स्पर्श नहीं कर सकता।

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विधवा की किस्मत Akbar Birbal Stories in Hindi : तुम ऐसा करो, इसे मेरी झोंपड़ी के किसी भी कोने में गड्ढा खोदकर दबा दो।” ‘मैंने वैसा ही किया और आश्वस्त होकर तीर्थ-यात्रा पर चली गई। जब मैं तीर्थ-यात्रा करके लौटी, तो साधु के पास अपना धन लेने के लिए पहुँची। मैंने वह स्थान खोदा जहाँ मैंने थैली गाड़ी थी। परंतु बदकिस्मती से थैली वहाँ नहीं मिली।

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विधवा की किस्मत Akbar Birbal Stories in Hindi : मैंने साधु से अपने धन के विषय में पूछा। साधु बोला मैं इस विषय में कुछ नहीं कहा था कि मैं धन को स्पर्श नहीं करता। अपना धन वहीं ढूंढो जहाँ तुमने उसे छिपाया था। ” बूढ़ी विधवा ने सारी कहानी बीरबल को बता दी और प्रार्थना करते हुए बोली ‘श्रीमान् मुझे पूरा विश्वास है कि वह साधु धोखेबाज है, परंतु अपनी चोरी नहीं मान रहा। कृपया ताँबे के सिक्के दिलाने में मेरी सहायता करें।”बीरबल ने एक क्षण सोचा और अपनी योजना बूढ़ी औरत को बताई। अगले दिन बीरबल एक छोटा–सा चाँदी का डिब्बा अपने हाथ में पकड़े हुए साधु की कुटिया को पास पहुँचा और बोला “हे ज्ञानी व्यक्ति, मैंने आपके विषय में बहुत कुछ सुना है और आज मुझे आपसे मिलने का सौभाग्य भी प्राप्त हो गया।

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विधवा की किस्मत Akbar Birbal Stories in Hindi : मुझे आपकी मदद चाहिए, पर मैं समझ नहीं पा रहा कि कैसे कहूँ…?” जब बीरबल अपनी बातें कह रहा था, तो साधु की नजरें उसके हाथ में पकड़े चाँदी के डिब्बे पर ही टिकी हुई थीं। “अरे! इसने अपने हाथ में क्या पकड़ा हुआ है।” वह चकित होकर सोच रहा था। “हे ज्ञानी व्यक्ति, मैं जानता हूँ कि आपको सांसारिक वस्तुओं से कोई मोह नहीं है, परंतु इस संसार के लालची लोगों के कारण मैं आप पर विश्वास कर सकता हूँ।” बीरबल ने अपनी बात को जारी रखते हुए चाँदी का डिब्बा खोला और कहा “क्या आप कीमती हीरों से भरे हुए इस डिब्बे को अपने पास सुरक्षित रख सकते हैं? मुझे अपने भाई से मिलने अजमेर जाना है।” “अरे पुत्र, मैं सांसारिक वस्तुओं को स्पर्श नहीं करता। मेरी झोंपड़ी में कहीं भी एक गड्ढा खोदकर इस डिब्बे को छिपा दो। जब लौटकर आओ, तो खोदकर वापस ले जाना।” साधु ने बीरबल से कहा। जब बीरबल यह सब बातें कर रहा था, तो साधु ने बूढ़ी विधवा को दरवाजे से अंदर आते देखा। उसने सोचा “अरे यह बुढ़िया कहीं बना-बनाया खेल न बिगाड़ दे। मुझे इसके ताँबे के सिक्के लौटा देने चाहिएँ। आखिर इन कीमती हीरों के सामने वे हैं ही क्या ?” ऐसा सोचकर साधु ने जोर से बुढ़िया से कहा, “अरे तुम्हें यहाँ देखकर बहुत प्रसन्नता हुई।

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विधवा की किस्मत Akbar Birbal Stories in Hindi : मुझे लगता है कि उस दिन तुम वह स्थान भूल गई थीं जहाँ तुमने अपना धन छिपाया था। झोंपड़ी की उत्तरी दिशा में जाओ और तसल्ली से खोजी। शायद वहाँ तुम्हें तुम्हारा धन मिल जाए।” ढूंढने पर बुढ़िया को साधु द्वारा छिपाए गए ताँबे के सिक्के मिल गए। वह अपने सिक्कों की थैली को सीने से लगाकर खुशी-खुशी चली गई। उसी समय बीरबल का सेवक वहाँ पहुँचा और बोला, “श्रीमान्, जल्दी घर चलिए, अजमेर से आपका भाई आपसे मिलने आया है।” “अरे! सच क्या?” बीरबल खुश होते हुए साधु से बोला, “ओ ज्ञानी व्यक्ति, अब मेरे धन की वजह से आपको परेशान होने की आवश्यकता नहीं। मेरा भाई यहाँ आ गया है, इसलिए अब मुझे आपकी निगरानी में डिब्बा रखने की आवश्यकता नहीं हे।’ बीरबल डिब्बे को लेकर चला गया। वह बहुत खुश था क्योंकि उसकी योजना सफल हो गई थी। साधु भी महसूस कर रहा था कि कुछ नहीं रहता।

और कहानियों के लिए देखें : Akbar Birbal Stories in Hindi

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