सबसे शुद्ध

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सबसे शुद्ध : बंगला देश’ बनने से पहले पूर्वी पाकिस्तान के सेनाध्यक्षों ने हिंदू बंगालियों को भारत की ओर खदेड़ दिया था। हजारों की संख्या में शरणार्थी भारत की सीमा में शरण ले रहे थे। भारत ने मानवीयता के नाते
उन्हें शरण दी। मदर ने शरणार्थियों के लिए अनेक शिविर लगवाए थे। भारत सरकार भी सहायता कर रही | थी। फिर भी पूरा नहीं पड़ रहा था। | इंदिरा गांधी ने यूरोप की यात्रा करके विश्व का ध्यान शरणार्थियों की समस्याओं की ओर दिलाते हुए
यह भी बताया कि इसका सामना भारत कैसे कर रहा है, साथ ही सहायता की भी गुहार की। अमेरिकन सिनेटर एडवर्ड कैनेडी अकेले ही शिविरों में शरणार्थियों की दशा देखने भारत आए। वहां पीड़ितों की चीख पुकार और दयनीय दशा देखकर एडवर्ड कैनेडी का दिल भर आया। एडवर्ड ने वहां सिस्टर एग्नेस को एक रोगी की गंदगी साफ करते देखा। उसके हाथ गंदे हो गए थे। एडवर्ड ने आगे बढ़कर एग्नेस से हाथ मिलाने के लिए अपना हाथ आगे बढ़ाया तो एग्नेस ने अपना हाथ पीछे खींचते हुए कहा, “सर ! मेरे हाथ गंदे हो गए हैं। मैं इन्हें आपसे कैसे मिला सकती हूं?”
एडवर्ड ने कहा, ”सिस्टर ! आपके हाथों से शुद्ध दुनिया में कोई भी वस्तु नहीं है। मेरा बड़ा सौभाग्य होगा कि आपके ये हाथ मेरे अशुद्ध हाथों को शुद्ध कर दें।” एडवर्ड ने भाव-विभोर होकर सिस्टर का हाथ अपने दोनों हाथों से थाम लिया और कहा, ”सिस्टर ! आपका कार्य सर्वोत्तम है। मैं आपकी इस सेवा को कभी नहीं भूल पाऊंगा।”

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