Home Akbar Birbal Stories in Hindi Aagyakaari Birbal आज्ञाकारी बीरबल

Aagyakaari Birbal आज्ञाकारी बीरबल

by Hind Patrika

Aagyakaari Birbal  | Akbar Birbal Stories in Hindi

Aagyakaari Birbal | Akbar Birbal Stories in Hindi

Aagyakaari Birbal : बीरबल अकबर के दरबार का सबसे ईमानदार और वफादार मंत्री था। एक बार बादशाह अकबर की सबसे प्रिय पत्नी ने बादशाह से मिलने के लिए अपने एक सैनिक को संदेश लेकर भेजा। क्योंकि बादशाह शाही दरबार में थे, इसलिए वह संदेश लेकर दरबार में ही पहुँच गया। बादशाह ने सोचा कि मैं अपने हाथ में लिए हुए कार्य को समाप्त करके ही जाऊँगा। कुछ समय पश्चात् महारानी ने दूसरा संदेश भेजा कि वह तुरंत आकर रानी से मिलें। बादशाह अपनी पत्नी से बहुत प्रेम करते थे इसलिए दूसरा संदेश पाकर वह तुरंत कार्य छोड़कर उठे और चलने लगे। बादशाह की रानी से मिलने की उत्सुकता को देखकर बीरबल अपनी मुस्कुराहट नहीं रोक पाये। यह देखकर बादशाह क्रोधित हो गए। “मुझ पर इस प्रकार हँसने की तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई? क्या कभी तुम्हारे घर से बुलावा नहीं आता? लगता है तो अपने पद की गरिमा क्लष्ट्रह पा रहे हो। इस तरह अनुशासनहीनता के मार्ग पर चल पड़ना ठीक नहीं। कहते हैं बुराई को तभी मसल देना चाहिए जब वह कली के रूप में हो। अत: तुम्हें अपने इस अपमानजनक व्यवहार को लिए दंड दिया जाएगा। मैं तुम्हें आदेश देता हूँ कि तुम अपने पैर इस जमीन पर कभी नहीं। रखोगे। यहाँ से तुरंत चले जाओ।” बीरबल ने शाही दरबार छोड़ दिया। कई सप्ताह तक वह दरबार में नहीं गए।

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Aagyakaari Birbal | Akbar Birbal Stories in Hindi

कई दरबारी उनकी कमी महसूस कर रहे थे तथा कई दरबारी, जो उनसे ईष्र्या करते थे, प्रसन्न थे। बादशाह अकबर भी चिंतित हो उठे थे। वह बीरबल की अनुपस्थिति में किसी भी समस्या का संतोषजनक समाधान नहीं कर पा रहे थे। एक शाम बादशाह अकबर महल की खिड़की से बाहर देख रहे थे। अचानक उन्होंने बीरबल को एक रथ में जाते हुए देखा। बीरबल को बुलाने के लिए उन्होंने एक सैनिक भेजा। जब बीरबल उनके सामने उपस्थित हुए तो बादशाह आज्ञा का पालन क्यों नहीं किया? ” “मैं तो आपके आदेश का पालन कर रहा हूँ, महाराज! आपने कहा था कि मैं इस राज्य की जमीन पर पैर न रखें क्योंकि यह राज्य आपका है और इस जमीन की मिट्टी भी आपकी है। मेरे पास अन्य कोई विकल्प नहीं था। मैं दूसरे देश में गया और वहाँ से कुछ मिट्टी लेकर आया हूँ। इस रथ में मैंने उसी दूसरे देश की मिट्टी फैला रखी है। उसी मिट्टी पर मैं अपने पैर रखे रहता हूँ। अब मैं आपकी जमीन पर नहीं चलता। अब मैं अपनी सारी जिंदगी इसी छोटे-से रथ में गुजारूंगा ” बीरबल के बुद्धिमानी भरे उत्तर ने बादशाह का दिल जीत लिया और उन्होंने ने उसे क्षमा कर दिया।

और कहानियों के लिए देखें : Akbar Birbal Stories in Hindi

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