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अंजलि का ससुराल | Anjali ka Sasural

by Hind Patrika

अंजलि का ससुराल | Anjali ka Sasural

अंजलि का ससुराल | Anjali ka Sasural : अंजलि बर्तन और अपरिचित सामान से भरे रसोईघर में अनजान खड़ी थी।

बाहर, पूरा पड़ोस नई बहू द्वारा तैयार किए गए पहले पकवान का स्वाद लेने के लिए इकट्ठा खड़ा था।

उसके पास सोचने का समय नहीं था। एकमात्र चीज जो उसके दिमाग में आई थी वह था मूंग दाल का हलवा। वह अपनी सास, मिनाक्षी का सर नीचे होते हुवे नहीं देख सकती थी। मिनाक्षी एकमात्र ऐसी इंसान थी जिसने सभी विवादों के बावजूद इस विवाह के लिए बहुत ज्यादा समर्थन दिखाया था।

Anjali ka Sasural

Anjali ka Sasural : अंजलि ने मामूली खाना पकाने की सीख को लेकर भी अपने पिता की हर एक सलाह को नहीं मानकर और नज़रंदाज़ कर के खुद पर मन ही मन दुःख जताया। उसको तब थोड़ी शांति मिली जब उसके फ़ोन में उसकी माँ का मेसेज उसे मिला “बेटा सब ठीक तो हैं न”

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Anjali ka Sasural

अंजलि ने तुरंत ही आराम महसूस किया। उसने अपनी माँ को पूरी कहानी लिख बताई, और जल्दी से अपनी माँ से हलवा बनाने की रेसिपी पूछी
कुछ ही मिनटों में उसके पास हलवे को बनाने का पूरा तरीका था और अभी तक का सबसे आसान नुस्खा।

“अगर तुम अभी भी कहीं पर अटक जाती हो तो मुझे मेसेज करना।” उसका माँ का अंतिम मेसेज यही था।

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Anjali ka Sasural : अब अंजलि बिना ज्यादा वक़्त गंवाए काम करने के लिए तैयार हो गयी। उसे जितना आसन ये हलवा बनाना लगता था वो समझ गयी थी की ये कोई बच्चो का खेल नहीं हैं, लेकिन किसी भी तरह से वह संघर्ष कर ही रही थी।

अंत में जब अंजलि ने हलवा तैयार कर लिया था तो उसने अपनी मां को संदेश लिखा, “काश आप यहाँ होती तो इसका स्वाद ले पाती ताकि आप मुझे बता पाती कि यह मैंने कितना बुरा बनाया है कम से कम इससे मैं खुद को लोगो के तानो को सुनने से अपने आप को पहले ही तैयार कर सकती।”

इतने में अंजलि ने किसी के कदमो की आहाट सुनी और उसने जल्दी से अपना फोन नीचे रख दिया। मीनाक्षी ने किचन में प्रवेश किया, और अंजलि से शेल्फ में से नए कटोरे लाने के लिए कहा।

Anjali ka Sasural

Anjali ka Sasural : इस बीच, मिनाक्षी ने जल्दी ही हलवे का स्वाद लिया और थोड़ी देर तक खांसती रही। उसने गैस को दोबारा से चालु किया, स्वाद को और अधिक बढाने के लिए और अधिक चीनी और कुछ अन्य चीजों को हलवे में जोड़ा।

इतने में अंजलि कटोरों के साथ वापस आ गई और एक एक कर के साथ में मिलकर उन्होंने एक ट्रे पर सबकुछ व्यवस्थित किया।

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उनकी मां के सरल नुस्खो ने और अंजलि के प्रयासों ने बड़ी सफलता हासिल की। अंजलि ने सभी लोगो से बहुत तारीफे बंटोरी.

Anjali ka Sasural : उसका आज का दिन वाकई में बहुत अच्छा गया था, बाद में उस रात अंजलि ने सोचा जिसकी वजह से उसे आज इतनी तारीफे मिली हैं और जिसकी वजह से उसने अपनी सास का सर सब के सामने झुकने से बचा लिया उसे धन्यवाद देना चाहिए, आखिर माँ ही तो थी जिसने उसे इतने बड़े भंवर से निकला था। उसने अपनी माँ को फ़ोन किया और धन्यवाद दिया लेकिन माँ ने परेशान होकर पूछा, “तुम किसके बारे में बात कर रही हो? मैं सुबह सुबह मंदिर गयी थी और अपना फोन साथ ले जाना भूल गयी थी। ”

Anjali ka Sasural

Anjali ka Sasural : तब अंजलि को याद आया उसने अपनी माँ का नंबर मम्मा कर के सेव किया हुआ हैं और अपनी सास का नया नंबर मम्मा 2 कर के सेव किया. वो उस समय इतनी हडबडाई हुई थी की उसने ध्यान ही नहीं दिया की वो अपनी माँ से नहीं सासू माँ से बात कर रही थी.

ये अंजलि की ज़िनदगी की सबसे प्यारी गलती थी. उसे समझ में आ गया था की उसकी सास उसकी माँ से कम नहीं.

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