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बाल दिवस पर बेहतरीन लेख | Baal Diwas Par Behtareen Lekh

by Hind Patrika

बाल दिवस पर बेहतरीन लेख | Baal Diwas Par Behtareen Lekh

बाल दिवस पर बेहतरीन लेख | Baal Diwas Par Behtareen Lekh : बाल दिवस, हमारे जीवन का, हमारे समाज का, हमारे विश्व का सबसे महत्वपूर्ण दिवस हैं जिसे हम कहेंगे यह दिवस हमारी हम से वास्तविक मुलाक़ात हैं जिसे हम समय की घड़ियो, समाज द्वारा दिए गए झूठी अहंकार, पद, प्रतिष्ठा धन और सम्पदा के लिबास में हम अपने को खो देते हैं लेकिन उन सभी में खोज हमारी हम सबकी हैं, अपने बचपन की ही हैं. हम सब चाहते हैं हमारा बचपन, हमारी मासूमियत, हमारे बचपन के सावन, कागज़ के जहाज बनाना फिर मिलेगा, माँ के आँचल में कही फिर छुप जाना, हर चीज़ में कौतुहल, नानी – दादी की कहानियो को सुनते सुनते सो जाना, छुप के आकर माँ का आँचल पकड़ कर खींचना.

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बाल दिवस पर बेहतरीन लेख | Baal Diwas Par Behtareen Lekh

बाल दिवस पर बेहतरीन लेख | Baal Diwas Par Behtareen Lekh : किसी से कुछ ना चाहना. समाज के बंधन, रिश्तो के बंधन इन सबसे दूर उस सच्चाई को हम फिर से जीना चाहेंगे बस यही हैं ज़िन्दगी लेकिन जैसे जैसे हम बड़े होते हैं हमारा बचपन, हमारा सौन्दर्य, हमारी खूबसूरती, हमारी मासूमियत, कही दूर क्षितिज के उस पार चली जाती हैं और हमारी ज़िन्दगी एक बड़ी उलझन बनकर हमारा पीछा करती हैं, हमारी बोझल साँसे उस बचपन को खोजा करती हैं, हमारा जीवन उसी बचपन की खुशबू को ढूंढता हैं. हमारे दिल की धडकने वही गीत बचपन का गाना चाहती हैं. जब हम बच्चो के साथ होते हैं तो हमारा बचपन फिर लौट आता हैं. वो मासूमियत की चादर जो मेरे बचपन की हैं वो फिर से हवा में लहरा उठती हैं. सही मायने में हम वापस जीवांत हो उठते हैं हमारा जीवन वापस आ जाता हैं.

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बाल दिवस पर बेहतरीन लेख | Baal Diwas Par Behtareen Lekh

बाल दिवस पर बेहतरीन लेख | Baal Diwas Par Behtareen Lekh : जीजस क्राइस्ट ने कहा मेरे पास वही पहुंचेंगे जो बच्चे हैं परमात्मा हमे तभी स्वीकार करेगा जब हम अपनी बचपन की खूबसूरती में लौट आएं. पंडित जवाहरलाल नेहरु को बाल दिवस के रूप में मनाना अपने आप में एक बहुत बड़े जीवन का सन्देश होगा. हमे बच्चो को सुरक्षात्मक प्रेमपूर्ण वातावरण में, उनके नैसर्गिक विकास को पनपने का अवसर देना, हर शिक्षक माता – पिता समाज का कर्तव्य होना चाहिए जब भी हम प्रेमपूर्ण वातावरण में बढ़ने का अवसर देते हैं तब ही वो राष्ट्रनिर्माता, सच्चे देश भक्त बन कर भारत का गौरव बढ़ाते हैं. बच्चो के प्रति अपार प्रेम को देखते हुवे पंडित नेहरु को देश का विशिष्ट बच्चा पूर्ण का सम्मान प्राप्त हैं. भारत में 14 नवम्बर बाल दिवस के रूप में मनाना हमारे महान स्वतंत्रता सेनानी, स्वतंत्र भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरु ने अपने जन्म दिवस को पंडित जी ने स्वयं को बच्चो के विकास में उनकी मासूमियत में जीवन की मीठी यादो को उन्होंने देखा.

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बाल दिवस पर बेहतरीन लेख | Baal Diwas Par Behtareen Lekh

बाल दिवस पर बेहतरीन लेख | Baal Diwas Par Behtareen Lekh : राष्ट्र के निर्माताओं ने देखा इसके साथ ही पूरी दुनिया में 20 नवम्बर में बाल दिवस के रूप में मनाया जाने लगा. 1959 में बाल दिवस अक्टूबर के महीने में मनाया जाता था लेकिन संयुक्त राष्ट्र संघ की महासभा में बच्चो के अधिकारों के घोषणा पात्र को मान्यता दी गयी जिस दिन यह घोषणा पत्र पारित किया गया वह 20 नवम्बर का दिन था. 1989 में बच्चो के अधिकारों के समझौते पर पूरी दुनिया की 191 देशो द्वारा इसे पूरा समर्थन प्राप्त हुआ. जहाँ तक मैं सोचता हूँ यदि समाज राष्ट्र, विश्व को घनी उलझन और समस्याओं से बाहर लाना हैं तो हमारा पहला कदम हैं की हमारे बच्चो को साहस देने की आवश्यता हैं ना की उनकी जीवन में ज्यादा दखल अंदाजी देने की. हमे जरुरत हैं बच्चो को समग्र प्यार के साथ उनकी अज्ञात महानता को उजागर करने में सहयोग करने की. इस दुनिया का सबसे खतरनाक विष ही डर है जिससे हमे हमेशा बच्चो से दूर रखना चाहिए. बचपन में यदि कोई भय बच्चे के अंदर बैठ गया तो उसे निकालना बहुत मुश्किल होता हैं. हम लोगो में नेपोलियन बोनापार्ट के बारे में सुना होगा.

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बाल दिवस पर बेहतरीन लेख | Baal Diwas Par Behtareen Lekh

बाल दिवस पर बेहतरीन लेख | Baal Diwas Par Behtareen Lekh : एक समय जब वे छोटे थे तो अपने कमरे में अकेला लेटा हुआ था. एक बिल्ली उस पर सीधा पैर रख कर निकल गयी ओर नेपोलियन डर गए वह डर उसके पूरे जीवन भर उसका पीछा करता रहा. नेपोलियन जो पूरी दुनिया को जीतने में सक्षम हो गया उसके बावजूद एक लड़ाई में उसके दुश्मन को पता चल गया की वो बिल्लियों से डरता हैं तो उसने बिल्लियों को आगे कर दिया. बिल्लियों को अपनी ओर आते देख नेपोलियन ने अपने सेनापतियो से कहा अब मैं नहीं लड़ पाऊंगा अब तुम्हे देखना होगा महान योद्धा नेपोलियन बचपन के एक डर से हार गया. महान मनोवैज्ञानीक बच्चो के समग्र विकास पर अपनी कुछ विचार रखे हैं उन्होंने बताया बच्चो को एक मुचुअल रेस्पेक्ट का वातावरण देना चाहिए हमे उन्हें उत्साहपूर्वक बनाना चाहिए. माता – पिता, शिक्षक समाज का उत्तरदायित्व हैं बच्चो के अंदर गहरी सुरक्षा की भावना उत्पन्न की जानी चाहिए. बाल दिवस पर अब्राहम लिकन का पत्र जो उन्होंने अपने हेडमास्टर के लिए लिखा था वो हम सभी को प्रेरित करता हैं. हम आप लोगो के साथ शेयर करते हैं.

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बाल दिवस पर बेहतरीन लेख | Baal Diwas Par Behtareen Lekh

बाल दिवस पर बेहतरीन लेख | Baal Diwas Par Behtareen Lekh

उन्होंने पत्र में लिखा कि-
कृपया मेरे बेटे को समझाइए कि संसार में सभी व्यक्ति न्यायप्रिय और सच्चे नहीं होते है लेकिन इस बदमाश भीड़ में अच्छे लोगों की कमी नहीं है मौकापरस्त राजनीतिज्ञों के बीच एक समर्पित नेता भी होता है|
मेरे बेटे को बताएं कि मेहनत की रोटी बेईमानी से जुटाई बेशुमार दौलत से अधिक मूल्यवान है मेरे बेटे को जरुर सिखाए कि हार को कैसे स्वीकारा जाता है और जीत को किस संयम के साथ लिया जाता है। उसे बताएं कि बदमाश माफिया से डरे बिना उन्हें झुकाना ही साहस है। उसे किताबों के सुन्दर-अदभुत जगत से परिचय कराए। उसे मौन से मिलने वाली तरोताजा शान्ति के बारे में जरुर बताए।

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इस संसार की सुन्दरता के अहसास के लिए उसे खुले आकाश में उड़ते पक्षियों की चहचहाट और सोने जैसी धूप में मंडराते भौरों, गौरवशाली पर्वतो की हरी-भरी वादियों में बिखरे फूलों को देखने के रसमय आनन्द से भी परिचित कराए। उसे जोर देकर समझाए कि धोखे से पाई सफलता के मुकाबले अन्नुतिर्ण होना ज्यादा बेहतर है। वह अपने विचारों और संकल्पों पर ध्वंध विश्वास करता हुआ सदेव सत्य के रस्ते पर चले, भले ही लोग उसे कितना गलत कहे। वह अच्छों के साथ अच्छा रहे और उसे बदमाशों से निपटना भी सिखाए। उसकी एक स्वंतत्र पहचान हो वह सुने सबकी, पर सुनी हुई बातों को वह सत्य की छलनी में जरुर छाने और केवल तथ्यों तथा अच्छाइयों को ग्रहण करे। उसे बताए कि उदासी में कैसे हंसा जा सकता है और दूसरों की पीड़ा में द्रवित होने में झिझक कैसी।

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बाल दिवस पर बेहतरीन लेख | Baal Diwas Par Behtareen Lekh
संकुचित मानसिकता वाले लोगों को वह महत्व ना दे और चापलूसों कि बातों पर वह विश्वास ना करे। उसे अपनी अक्ल से भरपूर पैसा कमाना सिखाया जाए परन्तु अंतरात्मा को कभी ना बेचे। अनावश्यक शोर्य प्रदर्शन में धेर्य बरते, परन्तु सद्कार्य के लिए उसमे अधीरता व बेचेनी पैदा करे। में जानता हूं गुरुवर, मेरी अपेक्षाए आपसे कुछ ज्यादा हैं, पर देखे जितना हो सके अवश्य करे, मेरे बेटे के लिए।
तो दोस्तों आपको इस लेख से ये निचोड़ मिला होगा की सत्य और स्वय में गहरे आत्मविश्वास के साथ धन कामना है और देश व आमजन की सहायता के लिए सदैव प्रेरित रहना है।

इसी के साथ मैं सभी बच्चो को इस बाल दिवस पर ढेरो शुभकामनाये देता हूँ.
धन्यवाद! 🙂

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