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देशभक्ति की बेहतरीन कवितायें

by Hind Patrika

देशभक्ति की बेहतरीन कवितायें Best Patriotic Poems in Hindi

Patriotic Poems in Hindi

Patriotic Poems in Hindi

Best Patriotic Quotes in Hindi : देशभक्ति एक ऐसा प्रेम है जो किसी भी इंसान का अपने देश के लिए होना स्वभाविक है.देश प्रेमी अपने देश की मान सम्मान के लिए कुछ भी कर गुज़रते है ओर देश की आन बान ओर शान पर कोई भी आँच नही आने देते.हमारे देश को आज़ादी दिलाने के लिए जाने कितने वीर देशभक्तों ने अपनी जान की कुर्बानी दी.सिर्फ़ इसलिए क्योंकि उन्हे अपने देश से बेहद प्यार था ओर वी देश को गुलामी की जंजीरो मे जकड़े नही देख पाए.एक फ़ौज़ी ओर जवान से बेहतर इस भावना को और कौन समझ सकता है भला.एक जवान सरहद पर दिन रात पहेरा देता है और अपने देश की रक्षा करता है.आए दिन हमारे देश के जवान सरहद पर अपनी जान की कुर्बानी दे देते है सिर्फ़ अपने देश की सुरक्षा के खातिर.पर इसका मतलब ये नही की सिर्फ़ जवान ही देशभक्त होते है.बल्कि समाज का वो हर नागरिक जो अपने देश को दिल से प्यार करता है और इसके मान समान मे कोई आँच नही आने देता , देशभक्त कहलाता है.आइए आज मिलकर संकल्प ले की हम अपने देश को हमेशा प्रेम करते रहेंगे और इसके मान सम्मान मे कोई आँच नही आने देंगे.ज़य हिंद !!

Best Patriotic Poems in Hindi | Deshbhakti Quotes

देशभक्ति की कवितायें

ना हम भुले है ना यह ‘भारत’
आपके बलिदान से है यह ‘हमारा भारत’

 

देश के लिए प्यार है तो जताया करो…!!
किसी का इंतजार मत करो…गर्व से बोलो जय हिन्द…!
अभिमान से कहो भारतीय है हम…!!

 

कोई देश की शान के लिए मरता है
और एक तुम हो जिसे देश के लिए जीना भी मुश्किल लगता है
क्यूँ किसी ओर से बदलाव की उम्मीद रखते हो तुम
जब खुद देश के लिए कुछ नही करते तुम
मैं भारत माता हूँ तुम्हारी आज भी रो रही हूँ
क्यूंकी तुम आज भी मोह की नींद मे सो रहे हो
हो सके तो अब भी जाग जाओ
इससे पहेले की सब कुछ ख़त्म हो जाए खुद को पहचान लो तुम

 

जब सूरज संग हो जाए अंधियार के, तब दीये का टिमटिमाना जरूरी है…
जब प्यार की बोली लगने लगे बाजार में, तब प्रेमी का प्रेम को बचाना जरूरी है……
जब देश को खतरा हो गद्दारों से, तो गद्दारों को धरती से मिटाना जरूरी है….
जब गुमराह हो रहा हो युवा देश का, तो उसे सही राह दिखाना जरूरी है………..
जब हर ओर फैल गई हो निराशा देश में, तो क्रांति का बिगुल बजाना जरूरी है…..
जब नारी खुद को असहाय पाए, तो उसे लक्ष्मीबाई बनाना जरूरी है…………
जब नेताओं के हाथ में सुरक्षित न रहे देश, तो फिर सुभाष का आना जरूरी है……
जब सीधे तरीकों से देश न बदले, तब विद्रोह जरूरी है……………..
– अभिषेक मिश्र

 

तैरना है तो समंदर में तैरो नालों में क्या रखा हैं,
प्यार करना है तो देश से करो औरों में क्या रखा हैं!!

 

मैं भारत माता हूँ
इतने व्यस्त हो गए तुम, कि तुम्हारा देशप्रेम साल में 2 बार जगता है
उन सैनिकों के बारे में सोचो, जिनके जीवन का पल-पल देश के लिए लगता है
कोई देश के लिए शान से मरता है………….
और एक तुम हो, जिसे देश के लिए जीना भी मुश्किल लगता है ?
On field Players और On Screen Heroes आदर्श बन गए हैं तुम्हारे
उन लोगों को तुम याद तक नहीं करते, जो Real Life में Heroes हैं
जरा सोचो इन खोखले Role Models ने तुम्हें क्या दिया है अबतक ?
तुम अपने आदर्श बदल लो, इससे पहले कि औंधे मुँह गिरो तुमपार्टी विरोधियों के विरुद्ध डटकर खड़े हो जाते हो तुम
राष्ट्र विरोधियों के विरुद्ध क्यों नहीं आवाज उठाते हो तुम ?
राजनीति, सत्ता सुख पाने का जरिया है जिनके लिए उन्हें क्यों पूजते हो तुम ?
इससे पहले कि देर हो जाए, राष्ट्रनीति को राजनीति का विकल्प बना लो तुम
न एक शिक्षा नीति, न समान नागरिकता नीति
ये तो है अंग्रेजों की बांटों और राज करो नीति
क्यों किसी और से बदलाव किसी उम्मीद करते हो तुम……
जब खुद देश के लिए……. कुछ नहीं करते हो तुम ? ? ?
मैं भारत माता हूँ तुम्हारी…. मैं आज भी रो रही हूँ
क्योंकि तुम आज भी मोह की नींद में सो रहे हो
हो सके तो, अब भी जाग जाओ तुम……..
इससे पहले कि सब कुछ खत्म हो जाए, खुद को पहचान जाओ तुम.
– अभिषेक मिश्र ( Abhi )

 

भारत क्यों तेरी साँसों के, स्वर आहत से लगते हैं,
अभी जियाले परवानों में, आग बहुत-सी बाकी है।
क्यों तेरी आँखों में पानी, आकर ठहरा-ठहरा है,
जब तेरी नदियों की लहरें, डोल-डोल मदमाती हैं।
जो गुज़रा है वह तो कल था, अब तो आज की बातें हैं,
और लड़े जो बेटे तेरे, राज काज की बातें हैं,
चक्रवात पर, भूकंपों पर, कभी किसी का ज़ोर नहीं,
और चली सीमा पर गोली, सभ्य समाज की बातें हैं।

 

कल फिर तू क्यों, पेट बाँधकर सोया था, मैं सुनता हूँ,
जब तेरे खेतों की बाली, लहर-लहर इतराती है।

 

अगर बात करनी है उनको, काश्मीर पर करने दो,
अजय अहूजा, अधिकारी, नय्यर, जब्बर को मरने दो,
वो समझौता ए लाहौरी, याद नहीं कर पाएँगे,
भूल कारगिल की गद्दारी, नई मित्रता गढ़ने दो,

 

ऐसी अटल अवस्था में भी, कल क्यों पल-पल टलता है,
जब मीठी परवेज़ी गोली, गीत सुना बहलाती है।

 

चलो ये माना थोड़ा गम है, पर किसको न होता है,
जब रातें जगने लगती हैं, तभी सवेरा सोता है,
जो अधिकारों पर बैठे हैं, वह उनका अधिकार ही है,
फसल काटता है कोई, और कोई उसको बोता है।

 

क्यों तू जीवन जटिल चक्र की, इस उलझन में फँसता है,
जब तेरी गोदी में बिजली कौंध-कौंध मुस्काती है।

– अभिनव शुक्ला

 

ऐ मेरे प्यारे वतन, ऐ मेरे बिछड़े चमन
तुझ पे दिल कुरबान
तू ही मेरी आरजू़, तू ही मेरी आबरू
तू ही मेरी जान
तेरे दामन से जो आए
उन हवाओं को सलाम
चूम लूँ मैं उस जुबाँ को
जिसपे आए तेरा नाम
सबसे प्यारी सुबह तेरी
सबसे रंगी तेरी शाम
तुझ पे दिल कुरबान

 

माँ का दिल बनके कभी
सीने से लग जाता है तू
और कभी नन्हीं-सी बेटी
बन के याद आता है तू
जितना याद आता है मुझको
उतना तड़पाता है तू
तुझ पे दिल कुरबान

 

छोड़ कर तेरी ज़मीं को
दूर आ पहुँचे हैं हम
फिर भी है ये ही तमन्ना
तेरे ज़र्रों की कसम
हम जहाँ पैदा हुए उस
जगह पे ही निकले दम
तुझ पे दिल कुरबान

 

ये तिरंगा ये तिरंगा ये हमारी शान है
विश्व भर में भारती की ये अमिट पहचान है।
ये तिरंगा हाथ में ले पग निरंतर ही बढ़े
ये तिरंगा हाथ में ले दुश्मनों से हम लड़े
ये तिरंगा दिल की धड़कन ये हमारी जान है

 

ये तिरंगा विश्व का सबसे बड़ा जनतंत्र है
ये तिरंगा वीरता का गूँजता इक मंत्र है
ये तिरंगा वंदना है भारती का मान है

 

ये तिरंगा विश्व जन को सत्य का संदेश है
ये तिरंगा कह रहा है अमर भारत देश है
ये तिरंगा इस धरा पर शांति का संधान है

 

इसके रेषों में बुना बलिदानियों का नाम है
ये बनारस की सुबह है, ये अवध की शाम है
ये तिरंगा ही हमारे भाग्य का भगवान है

 

ये कभी मंदिर कभी ये गुरुओं का द्वारा लगे
चर्च का गुंबद कभी मस्जिद का मिनारा लगे
ये तिरंगा धर्म की हर राह का सम्मान है

 

ये तिरंगा बाईबल है भागवत का श्लोक है
ये तिरंगा आयत-ए-कुरआन का आलोक है
ये तिरंगा वेद की पावन ऋचा का ज्ञान है

 

ये तिरंगा स्वर्ग से सुंदर धरा कश्मीर है
ये तिरंगा झूमता कन्याकुमारी नीर है
ये तिरंगा माँ के होठों की मधुर मुस्कान है

 

ये तिरंगा देव नदियों का त्रिवेणी रूप है
ये तिरंगा सूर्य की पहली किरण की धूप है
ये तिरंगा भव्य हिमगिरि का अमर वरदान है

 

शीत की ठंडी हवा, ये ग्रीष्म का अंगार है
सावनी मौसम में मेघों का छलकता प्यार है
झंझावातों में लहरता ये गुणों की खान है

 

ये तिरंगा लता की इक कुहुकती आवाज़ है
ये रवि शंकर के हाथों में थिरकता साज़ है
टैगोर के जनगीत जन गण मन का ये गुणगान है

 

ये तिंरगा गांधी जी की शांति वाली खोज है
ये तिरंगा नेता जी के दिल से निकला ओज है
ये विवेकानंद जी का जगजयी अभियान है

 

रंग होली के हैं इसमें ईद जैसा प्यार है
चमक क्रिसमस की लिए यह दीप-सा त्यौहार है
ये तिरंगा कह रहा- ये संस्कृति महान है

 

ये तिरंगा अंदमानी काला पानी जेल है
ये तिरंगा शांति औ’ क्रांति का अनुपम मेल है
वीर सावरकर का ये इक साधना संगान है

 

ये तिरंगा शहीदों का जलियाँवाला बाग़ है
ये तिरंगा क्रांति वाली पुण्य पावन आग है
क्रांतिकारी चंद्रशेखर का ये स्वाभिमान है

 

कृष्ण की ये नीति जैसा राम का वनवास है
आद्य शंकर के जतन-सा बुद्ध का सन्यास है
महावीर स्वरूप ध्वज ये अहिंसा का गान है

 

रंग केसरिया बताता वीरता ही कर्म है
श्वेत रंग यह कह रहा है, शांति ही धर्म है
हरे रंग के स्नेह से ये मिट्टी ही धनवान है

 

ऋषि दयानंद के ये सत्य का प्रकाश है
महाकवि तुलसी के पूज्य राम का विश्वास है
ये तिरंगा वीर अर्जुन और ये हनुमान है

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