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Best Poem on Mother in Hindi | माँ की सुंदर कवितायेँ

by Hind Patrika

Best Poem on Mother in Hindi

Best Poem on Mother in Hindi : हमारे हर मर्ज की दवा होती है माँ – माँ इस शब्द में ही हम सबका पूरा जीवन छिपा हुआ हैं. अपनी माँ के बिना हम क्या हैं? कुछ नहीं. माना पिता का भी बहुत महत्व होता हैं ज़िन्दगी में लेकिन उसी ज़िन्दगी की शुरुवाती 9 महीने कौन हर समय अपने आप से जोड़ के रखता हैं तुम्हे, कौन प्यार करता हैं तुम्हे. किसकी हमेशा कमी खलती हैं जब भी घर पहुचंते हैं, क्यों डर में भी चीख पर माँ का नाम ही सबसे पहले निकलता हैं क्यूंकि माँ वो हैं जो कोई और नहीं हो सकता. माँ खुद में ज़िन्दगी हैं हमारी.

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Best Poem on Mother in Hindi

 

है माँ….. (Best Poem on Mother in Hindi)

हमारे हर मर्ज की दवा होती है माँ….
कभी डाँटती है हमें, तो कभी गले लगा लेती है माँ…..
हमारी आँखोँ के आंसू, अपनी आँखोँ मेँ समा लेती है माँ…..
अपने होठोँ की हँसी, हम पर लुटा देती है माँ……
हमारी खुशियोँ मेँ शामिल होकर, अपने गम भुला देती है माँ….
जब भी कभी ठोकर लगे, तो हमें तुरंत याद आती है माँ…..

दुनिया की तपिश में, हमें आँचल की शीतल छाया देती है माँ…..
खुद चाहे कितनी थकी हो, हमें देखकर अपनी थकान भूल जाती है माँ….
प्यार भरे हाथोँ से, हमेशा हमारी थकान मिटाती है माँ…..
बात जब भी हो लजीज खाने की, तो हमें याद आती है माँ……
रिश्तों को खूबसूरती से निभाना सिखाती है माँ…….
लब्जोँ मेँ जिसे बयाँ नहीँ किया जा सके ऐसी होती है माँ…….
भगवान भी जिसकी ममता के आगे झुक जाते हैँ

 

 

 

Maa (Best Poem on Mother in Hindi)

Pehle jab main ghabrata tha…

Anchal mein tere chup jata tha…

Gazab si taqat aa jati thi…

Jab tera haath mujhe sehlata tha…

Ghabrahat toh aaj bhi hoti hai…

Par kisi ko nahi batata hoon…

Darr ko jebon mein chupa kar…

Samajhdariyan odh so jata hoon…

Jab dost mujhe rulate the…

Tujhse shikayat main lagaata tha…

Phir teri godi mein sar rakh ke…

Masoomiyat se so jata tha…

Kabhi pyar se tu mujhe samjhati thi…

Meri galtiyan mujhe batati thi…

Dusron ki daant se bachati thi kabhi…

Kabhi khud hi daant lagati thi…

Dil toh aaj bhi dukhta hai logon ki baaton se…

Par aansuon ko aankhon hi mein rakhna seekh gaya hoon…

Galtiyan toh aaj bhi karta hoon main…

Par galtiyon ko khud hi samajhna seekh gaya hoon…

Aaj bhi bhool jata hoon chaata le jana…

Baarishon me aaj bhi bheeg jata hoon…

Par tu ab chinta mat karna…

Khud ka khayal rakhna ab main seekh gaya hoon…

Ab Jab main tujhse milne aaunga…

Sabki shikayat tujhse lagaunga…

Tu sar par haath rakh dena phr se…

Aur main phir se teri godi mein sar rakh ke so jaunga…

 

Best Poem on Mother in Hindi

 

सबसे सुंदर सबसे प्यारी (Best Poem on Mother in Hindi)

सबसे सुंदर सबसे प्यारी
मेरी माँ है सबसे न्यारी ।
मुझ पर प्यार ममता बरसाती ॥
करू गलत काम तो मार लगाती ।
माँ तु है सबसे महान ॥
अब यही है बस अरमान ।
माँ की महिमा का बखान करते करते निकले प्राण ॥

 

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वो है मेरी माँ (Best Poem on Mother in Hindi)

मेरे सर्वस्व की पहचान
अपने आँचल की दे छाँव
ममता की वो लोरी गाती
मेरे सपनों को सहलाती
गाती रहती, मुस्कराती जो
वो है मेरी माँ।

प्यार समेटे सीने में जो
सागर सारा अश्कों में जो
हर आहट पर मुड़ आती जो
वो है मेरी माँ।

दुख मेरे को समेट जाती
सुख की खुशबू बिखेर जाती
ममता की रस बरसाती जो
वो है मेरी माँ।

Best Poem on Mother in Hindi

 

विरह होकर इस जग से माँ (Best Poem on Mother in Hindi)

विरह होकर इस जग से माँ

आज कक्ष मे अपने बैठा हूँ

भोग-विलास के साधन पास है मेरे

पर माँ क्यूँ मैं तेरे आँचल को रोता हूँ/

गिरता,संभलता,बुदबुदाता

मैं आगे को बढ़ता जाता था

माँ तेरे साए मे आकर

चैन मुझे मिल पाता था/

माँ मैं जो कुछ भी कहता

शायद ही कोई समझता था

जाने क्या शक्ति पाई थी तूने

जो मैं बिन बोले कह पता था/

माँ आज मैं बोलने मे सक्षम हूँ

पर क्यूँ खुद को व्यक्त न कर पाया हूँ

माँ तूने तो मुझे बिन बोले समझा पर

बोल-बोलकर भी मैं जग को समझा न पाया हूँ/

जब सारी दुनिया लड़ती थी

और विषम परिस्तिथि लगती थी

माँ आँचल मे अपने लेकर

तू मेरी सखी बन जाती थी/

दुनिया आज भी मुझसे लड़ती है

पर क्यूँ प्रतिरोध करने को जी नही करता है

यूँ तो दोस्त हैं आज कई मेरे

पर शायद ही कोई तुझसी सखी बन पता है/

मैं चलने की कोशिश करता था

पर हर कदम पर लड़खड़ाता था

बस तेरी ही उंगली थामकर मैं

आगे को बढ़ पता था/

माँ आज मैं चल रहा हूँ

या शायद भाग रहा हूँ

पऱ क्यूँ आज फिर लड़खड़ाने को जी चाहता है

क्यूँ तेरी उँगली फिर थमने को जी चाहता है/

याद है मुझको माँ

जब तू खीर बनाती थी

ज़िद करता था मैं

तू अपनी थाल बढ़ाती थी/

भूख नहीं मुझको बेटा

कहके तू मुस्काती थी

सोच-सोच के मैं हारा था

ये भूख तूने क्या पाई थी/

आज पड़े हैं छप्पन-भोग यहाँ

पर क्यूँ खाने को जी नहीं करता है

माँ तेरे बच्चे ने ज़िद करना छोड़ दिया

क्योंकि कोई अपनी थाल नहीं बढ़ाता है/

माँ मैं तुझसे भागा करता था

मैं तुझसे रूठा करता था

जो तू बढ़ती थी आगे

लगाने को मेरे माथे पर वो काजल/

पर क्यूँ आज कमी खल रही मुझको

जो ओझल होता माथे का वो काजल

माँ शायद पतझड़ ये दुनिया सारी

माँ सावन तेरा आँचल

तेरी हर वो बात माँ

आज प्रत्यक्ष सी प्रतीत होती है

हाथों मे है गुलाब पर

काँटों से टीस सी होती है

तेरी उन बातों का आशय माँ

आज समझ मे आया है

माँ तेरे आँचल से बढ़कर

क्या जग मे दूसरा कोई साया है

मेरे हर सुख से तेरी खुशी थी

मेरे हर गम से तेरी नाराज़गी थी

मुझको शीतल करने को तेरी परछाई थी

तेरी दुनिया मुझमे ही समाई थी

मैं हंसता था,तू भी हँसती थी

मैं रोता था,तू भी समझाती थी

माँ आज मैं हंसता हूँ,क्या तू भी हँसती है

माँ आज मैं रोता हूँ,क्या तू भी रोती है/

 

Best Poem on Mother in Hindi

अक्षर बच्चे ने जो सबसे पहले बोले माँ (Best Poem on Mother in Hindi)

अक्षर बच्चे ने जो सबसे पहले बोले
माँ माँ माँ माँ
जब पेट में भूख से चूहे कूदे
मुझे खाना दे दो माँ
जब तकलीफ हो दिल ज़ोर से दुखे
माँ माँ मेरा क्या माँ होगा माँ
जब किसी बात से डर लगे
तब सुकून देती है माँ
जब पढने में मन ना लगे
तब समझाती है वही माँ
जब बच्चा कुछ बिगड़ने लगे
ज़ोर की मार लगाती है माँ
जब बच्चे को माँ ना दिखे
बहुत याद आती है माँ
जब सब कुछ खत्म होने लगे
तब विश्वास जगाती है माँ

 

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“maan, keh ek kahaani!” (Best Poem on Mother in Hindi)

“maa, keh ek kahaani!”

“beta samajh liyaa kyaa toone mujhko apni naani?”
“kehtee hai mujhse yeh cheti, too meri naani ki beti?
keh maan, keh letee hi letee, Raja tha ya Rani? maan, keh ek kahaani.”

“too hai haThee, maandhan mere, sun upvan men bade savere,
taat bhraman karte the tere, jahaan surabhi manmaani.”
“jahaan surabhi manmaani! haan maan, yahee kahaani.”

“varn-varn ke phool khile the, jhalmal kar himbindu jhile the,
halke jhonke hile mile the, lehraata tha paani.”
“lehraata the paani! haan, haan, yehee kahaani.”

“gaate the khag kal-kal svar se, sahsa ek hans oopar se,
giraa biddh hokar khar shar se, hu-e paksh kee kaani!”
“hu-e paksh kee haani? karuna-bharee kahaani!”

“chaunk unhone use thaaya, nayaa janm saa usne paaya.
itne men aakhetak aaya, lakshy-siddhi kaa maani.”
“lakshy-siddhi kaa maani! komal-kathin kahaani.”

“maangaa usne aahat pakshi, tere taat kintu the rakshi.
tab usne, jo tha khagbhakshi, hath karne kee thaani.”
“hath karne kee thani! ab badh chalee kahaani.”

“huwa vivaad saday-nirday men, ubhay aagrahi the svavishay men,
ga-e baat tab nyaayaalay men, sunee sabhee ne jaani.”
“sunee sabhee ne jaani! vyaapak hu-e kahaani.”

“Rahul, too nirnay kar iskaa, nyaay paksh letaa hai kiska?”
Kah do nirbhay jay ho jisaka, sun loon teri vaani”
“maan, meri kyaa bani? main sun rahaa kahaani.

koi niraparaadh ko maare to kyon any na use ubaare?
rakshak par bhakshak ko vaare nyaay dayaa kaa daani.”
“nyaay dayaa kaa daani! toone gunee kahaani.”

 

Best Poem on Mother in Hindi

माँ और भगवान (Best Poem on Mother in Hindi)

माँ और भगवान

मैं अपने छोटे मुख कैसे करूँ तेरा गुणगान
माँ तेरी समता में फीका-सा लगता भगवान

माता कौशल्या के घर में जन्म राम ने पाया
ठुमक-ठुमक आँगन में चलकर सबका हृदय जुड़ाया
पुत्र प्रेम में थे निमग्न कौशल्या माँ के प्राण
माँ तेरी समता में फीका-सा लगता भगवान

दे मातृत्व देवकी को यसुदा की गोद सुहाई
ले लकुटी वन-वन भटके गोचारण कियो कन्हाई
सारे ब्रजमंडल में गूँजी थी वंशी की तान
माँ तेरी समता में फीका-सा लगता भगवान

तेरी समता में तू ही है मिले न उपमा कोई
तू न कभी निज सुत से रूठी मृदुता अमित समोई
लाड़-प्यार से सदा सिखाया तूने सच्चा ज्ञान
माँ तेरी समता में फीका-सा लगता भगवान

कभी न विचलित हुई रही सेवा में भूखी प्यासी
समझ पुत्र को रुग्ण मनौती मानी रही उपासी
प्रेमामृत नित पिला पिलाकर किया सतत कल्याण
माँ तेरी समता में फीका-सा लगता भगवान

‘विकल’ न होने दिया पुत्र को कभी न हिम्मत हारी
सदय अदालत है सुत हित में सुख-दुख में महतारी
काँटों पर चलकर भी तूने दिया अभय का दान
माँ तेरी समता में फीका-सा लगता भगवान

 

कई दिनों तक रोता रहा मैं घर से दूर पढ़ने भेजा मुझे माँ… (Best Poem on Mother in Hindi)

ज़िन्दगी की उलझनो से
मैं जब भी निराश हो जाता हूँ
टूटकर कहीं बैठ जाता हूँ
दिल यूँ भर आता है
पलकों से बहने लगते हैं समंदर
जब सारी कोशिशें नाकाम हों
उम्मीद दम तोड़ देती है
तन्हाई के उस मंज़र में
माँ तेरी याद बहुत आती है

मगर तू कितनी दूर है
ये सोचकर आँखें छलकती हैं
काश मैं तेरे पास होता
तू झट से गले लगा लेती
मेरी सब उलझनो को
अपने आँचल से पोंछ देती
गोद में सर रखकर
बेफिक्र होकर सो जाता
तू प्यार से मेरे सर पर
हाथ फेरती जाती
ज़िन्दगी यूँ मुन्तज़िर है
माँ तेरी दुआओ की
आज भी जब किसी मुश्किल में होता हूँ
माँ तेरी याद बहुत आती है

इतनी दूर क्यूँ मुझे भेजा
मैं सदा तेरे पास रहना चाहता था
पढ़ा लिखा कर क़ाबिल बनाया
क्यूँ मगर फासले आ गए है दरमियाँ
यहाँ मेरा मन भी नहीं लगता है
भीड़ में रह कर भी
खुद को अकेला ही पाता हूँ
जब भी कोई कांटा चुभता है यहाँ
मैं खड़ा बस तेरी राह देखूं
कब तू आकर दिलासा देगी मुझे
जैसे बचपन में दिया करती थी
गिरते सम्भलते आखिरकार
चलना तो सीख गया हूँ
खुद को सख्त भी बना लिया मैंने
मगर आज भी, जब मायूस हो जाता हूँ
माँ तेरी याद बहुत आती है

कई दिनों तक रोता रहा था मैं
जब पहली दफा तुमने
घर से दूर मुझे पढ़ने भेजा
फिर धीरे धीरे एहसास हुआ
कि ये जरुरी भी है
आगे बढ़ने के लिए
लेकिन वो सिलसिला तो यूँ बढ़ा
घर से दूरी फिर बढ़ती ही गई
जाने कैसी तक़दीर है ये मेरी
इक हादसे ने दिल को
पत्थर सा बना दिया
सुनसान मोड़ पर लाकर
यूँही तड़पता छोड़ दिया
अब चाहकर भी नहीं जा पाता हूँ
बचपन के उस आँगन में
मगर आज भी, जब रात में
बुरे ख्वाब से डरकर घबराता हूँ
माँ तेरी याद बहुत आती है
माँ तेरी याद बहुत आती है

 

Best Poem on Mother in Hindi

कौन मुझे इस जग में लाया माँ (Best Poem on Mother in Hindi)

कौन मुझे इस जग में लाया
किसने अपना दूध पिलाया
किसने मुझे चलना सिखाया
किसने मेरा दर्द अपनाया
कौन करे मुझ पर सब बरबस
कौन मनाये मेरा जन्म हर बरस
कौन चाहे मेरी मुस्कान सदा
कौन जाने मेरी सही सज़ा
कौन खुश होगा देख मेरी तरक्की
कौन चाहेगा मेरी नौकरी हो पक्की
कौन रोयेगा जब मैं रोऊँ
कौन रोयेगा जब मैं हंसु
कौन कहेगा करो पढाई
कौन कहेगा कहानी है पिटाई
कौन खिलायेगा मुझे रोटी
कौन सुनाएगा कहानियां छोटी
कौन खिलायेगा मीठी खीर
कौन अपनाएगा मेरी पीर
कौन करेगा मेरी चिंतन
कौन करेगा मेरा ह्रदय मंजन
जब से जब में आया हूँ
जब इस जग से जाँऊगा
तेरा नाम लेकर ही माँ
मन मंदिर तुझे सजाऊंगा

 

 

Pehli kiran is subah ki Maa (Best Poem on Mother in Hindi)

Pehli kiran is subah ki,

Tere noor mujhe dikhati hai.

Kahin ajnabi se tej roshni,

Meri nazron se tujhe milati hai.

Har dum

Teri ankhon ke ye saye

Meri ankhon pe simte rehte hain,

Tadap ke is behte kohre me,

Jinne ki wajah ye mujhse kehte hai.

Teri nam palkein,

Mujhe mausam ka rukh batati hai,

Sham ki ati bahar,

Wo har choti aas ko bhi dabati hai.

Ye akeli raatein

Tujhse bichdne ki,

Mujhe bebas karte jati hain,

Meri zindagi ke toofanon me kahin,

Ye chote bhanwar si phas jati hain.

Bas

Tujhse door rehne ki ye rah

Mujhe banwara karte jati hain

Kahin tu mujhse mil jae,

Har saans bhi yahi keh jati hai.

Meri palkon ke ansoon to kya,

Tu zehar bhi pee le jati hai,

Apni muskaan ki katori se tu yun,

Sabki muskanein badhati hai.

Nafrat,pyar ki dori ko,

Apni kalai se bandhe rakhti hai,

Mere masoom se dard pe tu,

Kyun apne pyar ka malham lagati hai,.

Mujhe bachane ki teri har koshish,

Tu apna sansaar bhi lootati hai,

Yahi to tere dil ki arzoo hai ,

MAA

Jo tujhe is duniya ki,

Sabse khoobsoorat sham banati hai.

 

Best Poem on Mother in Hindi

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