Home Moral Stories in Hindi बिना बात टांग अडाने की कला | Bina Baat Tang Adane Ki Klaa

बिना बात टांग अडाने की कला | Bina Baat Tang Adane Ki Klaa

by Hind Patrika

बिना बात टांग अडाने की कला | Bina Baat Tang Adane Ki Klaa : एक बार दुनिया के सारे पक्षी इकट्ठे हुए। वे एक महत्वपूर्ण मन्त्रणा करना चाहते थे। तोते, बतख, कोयल, उल्लू, मोर, बगुले और भी तरह – तरह के पक्षी इकट्ठे हुए। पक्षियों ने कहा – ‘गरुड़ हमारा राजा है, पर वह सारा समय विष्णु भगवान की सेवा में लगा रहता है और हमारे लिए कुछ भी नहीं करता। ऐसे राजा का क्या लाभ। वह शिकारियों के बिछाए जाल से कभी हमारी रक्षा नहीं करता, इसलिए हमें नए राजा का चुनाव समझदारी से करना चाहिए।’ सब पक्षी अपनी नज़र चारों ओर घुमाकर देखने लगे कि राजा किसे बनाया जाए। उन्हें उल्लू बहुत प्रभावशाली लगा। उसका बड़ा सिर, बड़ी – बड़ी गोल – गोल आंखें और बड़े विशाल पंख थे। सभी पक्षी चिल्लाए – ‘ये उल्लू ही हमारा राजा बनने के लायक है। हमें जल्दी से इसे अपना राजा बना देना चाहिए।’ वे पवित्र नदियों से जल भरकर ले आए और एक सिंहासन को सजाने लगे। फिर उन्होंने तरह – तरह के ढोल और शंख बजाए। पर जब वे उल्लू को सिंहासन की ओर ले जाने लगे, तभी वहां पर एक कौवा आया और बोला – ‘यह सब क्या हो रहा है? सब पक्षी यहां क्यों इकट्ठा हुए हैं।”

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बिना बात टांग अडाने की कला | Bina Baat Tang Adane Ki Klaa

बिना बात टांग अडाने की कला | Bina Baat Tang Adane Ki Klaa : ‘मित्र! क्योंकि हमारा कोई राजा नहीं है, इसलिए हमने इस उल्लू को अपना राजा चुना है और इसको ताज पहना रहे हैं। तुम सही समय पर अपनी राय देने आए हो”। कौवे ने मुस्कराते हुए कहा – ‘मैं उल्लू के राजा बनने के बिल्कुल खिलाफ हूं। यह बदसूरत और रात को न देख सकने वाला पक्षी है। हमारे पास और सुंदरसुंदर पक्षी हैं जैसे – मोर, बतख, कोयल, कबूतर आदि, फिर हम इसे राजा क्यों बनाएं। इसकी नाक और आंख टेढ़ी है जैसे कि गुस्से में बैठा हो। जब यह गुस्से में होगा, तब और भी भयानक लगेगा। ऐसे बदसूरत और भयानक लगने वाले राजा से हमें क्या लाभ होगा?’

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बिना बात टांग अडाने की कला | Bina Baat Tang Adane Ki Klaa : जब पक्षियों ने कौवे की यह बात सुनी, तो वे सब एक – दूसरे की ओर देखने लगे। ‘शायद कौवा ठीक कहता है। चलो आज उल्लू को राजा बनाने की बात टाल देते हैं। हम सब फिर कभी इकट्ठा होकर कोई दूसरा राजा चुनेंगे।’ तब सब पक्षी उड़कर चले गए। वहां पर सिर्फ कौवा, उल्लू और उसकी पत्नी रह गए। उल्लू अभी भी राजा बनने का इंतजार कर रहा था। वह अपनी पत्नी से बोला – ‘ अब यह क्या हो रहा है।

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अभी तक मुझे ताज पहनाने की रस्म शुरू क्यों नहीं हुई?’ उल्लू की पत्नी ने उत्तर दिया – ‘बदमाश कौवे ने तुम्हारे राजा बनाने की राह में रोड़ा अटकाया है, सभी पक्षी उड़कर वापस चले गए हैं, केवल यह कौवा ही न जाने क्यों यहां पर बैठा है।’ जब उल्लू ने यह सुना, तब वह बहुत निराश और दुखी हुआ। वह कौवे से गुस्से में बोला – ‘अरे शैतान कौवे! मैंने तुम्हारा क्या बिगाड़ा था, जो तुमने मेरा राजा बनना रुकवा दिया। आज से तुममें और मुझमें हमेशा दुश्मनी रहेगी। सारे कौवे उल्लुओं के दुश्मन रहेंगे।’ यह कहकर उल्लू अपनी पत्नी के साथ घर वापस आ गया। जब वे चले गए, तब कौवे ने सोचा – ‘मैंने बेवकूफी करके उल्लू से बेवजह लड़ाई मोल ले ली। मैंने उल्लू को सारे कौवों का दुश्मन बना दिया। क्या अच्छा होता, यदि मैं चुप ही रहा होता और अपनी राय अपने पास ही रखता। मैंने बिना बात उल्लुओं को कौवों का दुश्मन बना दिया।’

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