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गिलोय के फायदे, गिलोय घन वटी, गिलोय के पौधे की पहचान। Giloy ke Fayde

गिलोय के फायदे उसकी पहचान और इस्तेमाल करने का तरीका | Giloy ke Fayde

Giloy ke Fayde: आप सभी गिलोय शब्द को सुनते ही रहते है| यह एक ऐसा गुणकारी पौधा है जिसे घर घर में लगाया जाना चाहिए| आप प्रश्न करेंगे क्यों? क्योंकि इस पौधे को एक आयुर्वेदिक वरदान कहना गलत नहीं होगा | इस पौधे का हर भाग गुणों की खान है|आयुर्वेद के अनुसार अधिकांश मनुष्यों के जीवन में जो विकार उत्पन्न होते है वो वात या पित्त के बढ़ने से होते है| तो अगर हमें एक ऐसी औषधि मिल जाए जो हमारे शरीर में प्रवेश करके उस बढ़े हुए विकार को कम कर सके तो कहने ही क्या| गिलोय को अमृता ,यानि भारतीय भाषा में अमृत ,कहते हैं | इसे ” गुदुचि ” नाम से भी किसी किसी जगह जाना जाता है |

गिलोय की पहचान | Giloy ki Pehchan

गिलोय के पौधे की पहचान कैसे करें ?

गिलोय का पौधा एक बेल की तरह होता है| इसके पत्ते पान के पत्ते की तरह होते हैं| इसकी बेल बारह महीने हरी भरी रहती है| गिलोय की बेल घरों के बाहर , बगीचों में लगायी जाती है|

गिलोय के पत्तों में कई एंटीऑक्सीडेंट्स होते है जो हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते है | इसी वजह से गिलोय कई सारी बीमारी में दवा के रूप में प्रयोग किया जाता हैं। giloy ke fayde इसे मनुष्यों के लिए एक बहु उपयोगी पौधा बनाते है। हमारे आयुर्वेद में भी इसका कई जगह विवरण हैं।

गिलोय को इस्तेमाल करने का तरीका | Giloy ko Istamaal karne ka Tarika

गिलोय की बेल को छोटे छोटे टुकड़े करके पानी में डाल दीजिये| फिर उस पानी को उबालने के लिए रख दीजिये|जब पानी का रंग थोड़ा बदल जाये या फिर जब पानी की मात्रा थोड़ी काम हो जाए तो ठंडा होने के लिए रख दीजिये | फिर उसे पी सकते हैं|

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गिलोय के फायदे | Giloy ke Fayde

हमने नीचे आपके लिए 19 giloy ke fayde बताए है। कृप्या इन्हे ध्यान पूर्वक पढ़े और इनका लाभ ले।

  1. सामान्य जुखाम : गिलोय की बेल के चार से पांच टुकड़े लेकर एक कप पानी में डाल दें और तीन चार काली मिर्च कूट कर उसमें डाल दें |फिर उसे उबाल  लें | जब पानी आधा कप रह जाए तो उसे पी लें |बेहद असरकारी होता है |
  2. बच्चों को खांसी जुखाम में भी अगर गिलोय के पत्तों का और शहद का काढ़ा बना कर पिला दिया जाए तो बहुत असर दिखाता है| यह काड़ा दिन में दो बार  दे देना चाहिए|
  3. मधुमेह रोग (डॉयबिटीज़) :मधुमेह एक ऐसा रोग है जिसमें  गिलोय का सेवन अत्यंत लाभकारी होता है |ये टाइप २ डॉयबिटीज़ को ठीक करने में सहयोगी है|टाइप २ डॉयबिटीज़ में हमारे शरीर में इन्सुलिन तो बनता है लेकिन ब्लड ग्लूकोस पर प्रतिक्रिया नहीं करता| डायबिटीज के कारण हमारे शरीर में ग्लूकोस की मात्रा बढ़ जाती है और गिलोय उस  को ठीक करने में सहायक होती है|
  4. तेज़ बुखार : गिलोय की बेल के टुकड़े कूट कर पानी में मिलाकर पपीते के रस के साथ २ से ३ दिन लगातार पिलाने पर तेज़ बुखार ठीक हो जाता है| यह डेंगू बुखार के इलाज में काम आता है | जब डेंगू या चिकनगुनिया जैसा बुखार होता है जिसमें  क्रोसिन या डोलो टेबलेट के सिवा  कोई और दवाई काम नहीं आती ,तो गिलोय एक औषधि के रूप में काम आती है| गिलोय और तुलसी की पत्तियों के रस के सेवन से प्लेटलेट्स की मात्रा बहुत जल्दी बढ़ती है|
  5. बुखार में बहुत कमज़ोरी आ जाती है |इसको  दूर करने के लिए गिलोय एक आयुर्वेदिक औषधि है |
  6. गिलोय का सेवन ह्रदय को शक्ति देता है जिससे  ह्रदय की कई सारी बीमारियां दूर हो जाती हैं |
  7. गिलोय अन्य जड़ी बूटियों के साथ मिलकर एक स्वास्थय वर्धक टॉनिक बनाता है | यह टॉनिक शरीर के विषाक्त पदार्थों को हटाता है और हमारी स्मरण शक्ति को भी बढ़ता है |
  8. गुर्दे के रोग : गिलोय दोनों गुर्दों और जिगर के विषाक्त पदार्थों को बहार निकालता है |
  9. गिलोय का सेवन करने से हमारे शरीर मैं रक्त की मात्रा बढ़ जाती है |
  10. पथरी के ऑपरेशन के बाद अगर हम गिलोय का सेवन करते हैं तो दोबारा पथरी होने की संभावना बहुत काम हो जाती है और तो और यह हमारे शरीर के लिए लाभ दायक भी होता है |
  11. गिलोय ज़्यादा तर अपने एंटी इन्फ्लैमटॉरी गुणों के लिए जाना जाता है और खांसी, जुखाम और नज़ले जैसे रोगों के लिए लाभप्रद है |
  12. गठिया दर्द : जोड़ों का दर्द या गठिया दर्द की बीमारी हमें गलत खान पान से और गलत रहन सहन से होती है |हमारे शरीर में यूरिक एसिड की मात्रा बहुत बढ़ने के कारण गठिया की शिकायत हो जाती है |यूरिक एसिड को काबू में करने के लिए सही खान पान और व्यायाम करना चाहिए |
    साथ में गिलोय का रस नियमित रूप से पीने से सूजन और दर्द में बहुत आराम मिलता है |यदि हम गिलोय के तने से बनाये पाउडर  को दूध में मिला कर पियेंगे तो  भी बहुत आराम मिलेगा |
    थोड़े से देसी घी में गिलोय के रस को मिला कर अगर सेवन किया जाए तो भी गठिया रोगियों को जल्द ही फायदा मिलता है |
  13. शीतपित्त : (urticaria )यह एक त्वचा की बिमारी है जिसमें त्वचा  के ऊपर लाल चितके हो जाते हैं |गिलोय के रस में बकुची का चूर्ण मिला कर लेप करने से फायदा होता है |
    यदि नीम की २५-३० पत्तियों को पीस कर उसका गूदा३०० मि. ली. पानी में मिला दे और एक चम्मच गिलोय का पाउडर इसमें मिला कर , उबाल ले |इस पानी के आधा हो जाने पर इसे छान कर ठंडा कर ले | इस गिलोय और नीम मिश्रण को दिन में २-३ बार पीने से बहुत आराम मिलता है |
  14. अगर आपके पैरों में जलन होती है और बहुत उपाय करने के बाद भी आपको कोई फायदा नहीं हो रहा है तो आप गिलोय का इस्‍तेमाल कर सकते हैं।
  15. कान के दर्द में लाभदायक: कान के दर्द में गिलोय के पत्तों के रस को गुनगुना करके डालने से बहुत राहत मिलती है | अगर गिलोय के रस की कुछ बूंदें कान में डालें तो कान की सफाई भी हो जाती है |
  16. पेट के रोग: पेट के कई तरह के रोग जैसे अपच , गैस , दर्द आदि में राम बाण इलाज है गिलोय |
  17. मोटापा कम करें :गिलोय मोटापा दूर करने का एक सस्ता और सेहतमंद साधन है | यदि आप गिलोय के रस में थोड़ा निम्बू का रस मिला लेंगे , और इसे दिन में एक बार पीये तो चमत्कारी बदलाव देखेंगे |
  18. नेत्र विकार : गिलोय नेत्र विकारों में एक वरदान है |गिलोय जूस आप की आँखों को भी स्वस्थ रखने में मदद करता है | गिलोय को पानी में उबालें और ठंडा  कर के उस पानी को पलकों पे लगाए | इस प्रकार नेत्रों की ज्योति भी बढ़ती है और चश्मे के बिना बेहतर  देखने में  भी मदद करता है |
  19. त्वचा को युवा  बनाये रखे:  काले धब्बे , मुंहासे , हलकी झुर्रियों को चेहरे पर देख कर परेशान होने की बजाये अगर उन पे गिलोय का रस लगा लिया जाए तो चेहरा जवान दिखेगा | गिलोय आपकी त्वचा को सुन्दर , उज्जवल , युवा व  चमकदार रखता है |

यह भी पढ़े: Barley in Hindi | जौ खाने के फायदे

सावधानियाँ

क्या गिलोय बच्चों के लिए भी सुरक्षित है ? ५ वर्ष से छोटे बच्चों को २५० मि. ली. से ज़्यादा गिलोय जूस नहीं देना चाहिए |

एक और प्रश्न जो अक्सर हमारे ज़हन में आता है कि क्या गिलोय को हम एक साल तक लेते रहें या उम्रभर ?

गिलोय को दो- तीन  माह से ज़्यादा सेवन नहीं करना चाहिए |यदि बाद में भी लेना हो तो हफ्ते में एक या दो बार ले सकते हैं |

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Hind Patrika

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