Home हँसी मजाक Hasya Vyang Kavita in Hindi | व्यंग कविताओं का बेहतरीन संचय

Hasya Vyang Kavita in Hindi | व्यंग कविताओं का बेहतरीन संचय

by Hind Patrika

Hasya Vyang Kavita in Hindi | व्यंग कविताओं का बेहतरीन संचय

Hasya Vyang Kavita in Hindi : अगर तुम हँसना चाहते हो तो, सबसे पहले तो आपको ये प्रश्न पूछना चाहिए जो की हम सभी के मन में उठता हैं. चलिए उन्ही विचारों को कुछ शब्दों में पिरोकर आपके और मेरे सामने रखता हूँ.
भगवान् जीवन रीसा रीसा क्यूँ लगता हैं. ना कोई उमंग, ना कोई उत्साह, ना को उत्सव और मैं अभी कम वर्ष का ही हूँ. विवाह और घर द्वार की झंझट में पड़ना नहीं चाहता हूँ. ब्रह्मचारिय ही मेरे जीवन का लक्ष्य हैं. आपका आशीष चाहिए. रोहित आशीष तो मैं दूँ. आशीष देने में क्या कंजूसी करनी मगर तुम गलत आशीष मांग रहे हो ब्रह्मचारिय जीवन का लक्ष्य हैं की ऐसा मान कर चलोगे तो ब्रह्मचारिय कभी उपलब्ध ना होगा. ब्रह्मचारिय लक्ष्य नहीं, ब्रह्मचारिय तो जीवन के सारे सुख दुःख, सफलता, काम प्रेम इन सारे अनुभवों का निचोड़ हैं. निष्पत्ति नहीं, लक्ष्य नहीं परिणाम हैं. लक्ष्य का तो अर्थ होता हैं की हम चले, उसमे भी निश्चय कर लिया हैं की ब्रह्मचारिय पा कर ही रहेंगे. अब ना बाए देखेंगे ना दाए. अब बस हम गैंडे की तरह चले सीधे.

Also Check : Inspirational Quotes with Pictures in Hindi

Hasya Vyang Kavita in Hindi

Hasya Vyang Kavita in Hindi

लक्ष्य का तो अर्थ होता हैं की तय ही कर लिया हैं. अभी अनुभव तो जीवन का कुछ हुआ नहीं हैं. अभी काम वासना ना देखी, ना तो सुख देखा ना दुःख देखा. अभी काम वासना का कोई स्वाद ही नहीं ना मीठा ना कड़वा और निर्णय ले लिया ब्रह्मचारिय का क्यूंकि किसी किताब में लिखा था ब्रह्मचारिय ही जीवन हैं बस पढ़ ली किताब या मिल गया कोई महात्मा, सुन ली कोई बकवास तय कर लिया या घर में देखा और सभी तो घर में पैदा होते हैं और कही तो पैदा होने का उपाय नहीं. घर में देखा की माँ बाप सुबह से साँझ कलह ही करते रहते हैं झगडा, झंझट उपद्रव ये बहुत ही आश्चर्यजनक हैं की माँ बाप को देख के बेटे एक ना एक दिन विवाह कर लेते हैं ये बड़ा चमत्कार हैं अगर जरा भी अक्ल हो तो माँ बाप को देख कर ही एक दम भाग खड़े होंगे की बस हो गया बहुत देख लिया जो देखना था मगर एक प्राकृतिक भ्रमना हैं एक भीतर से भ्रमजाल हैं जो भीतर से ये कहता हैं की ये माँ बाप की गलती हैं मैं ऐसी स्त्री खोजूंगा की ऐसी भूल ही नहीं होगी. ऐसे तुम्हारे माँ बाप ने भी सोचा था, ऐसे उनके माँ बाप ने भी सोचा था. बाबा आदम के जमाने से लेकर ऐसे लोग सोचते रहता हैं, ऐसे तुम्हारे बच्चे भी सोचेंगे मैं अपवाद हो जाऊँगा. हमे ऐसा काम ही नहीं करना लेकिन किसी भी घर को देख लो की अगर माँ बाप कलह ही कलह से भरे हैं बच्चे देखते हैं उनका मन तभी से दूषित होना शुरू होना हो जाता हैं उनके मन में दुर्व्याह पैदा होने लगता हैं अगर लड़का हैं तो स्त्रियों के प्रति अगर लड़की हैं तो पुरुषो के प्रति. एक दुर्भाव पैदा होने लगता हैं चित्त दूषित होने लगता हैं इसी दूषित चित्त से महात्माओं की बात ठीक लगती हैं की ब्रह्मचारिय ही जीवन हैं और फिर ब्रह्मचारिय की ऐसी ऐसी चमकारी बाते सुनाई जाती हैं स्वभावत: कच्चे मनो में उनके छाप पड़ जाती हैं लोगो को समझाया जाता हैं की आदमी मरता ही इसीलिए हैं क्यूंकि वो ब्रह्मचारिय खो देता हैं तो फिर तुम्हारे सारे ब्रह्मचारिय कहाँ हैं वो क्यूँ मर गए.

Also Check : Self Composed Poem on Mother in Hindi

Hasya Vyang Kavita in Hindi

Hasya Vyang Kavita in Hindi : ब्रह्मचारियो का क्या हुआ हैं? उनको तो मरना ही नहीं था? ये सब व्यर्थ की बाते हैं इनका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं. मरना तो सभी को हैं. ब्रह्मचारिय से रहो की अब ब्रह्मचारिय से रह मरना तो सभी को हैं और कभी कभी तो ऐसा होता की की व्यभिचारी ज्यादा जीते हैं. मुल्ला नसुरुद्दीन सौ साल का हो गया तो उसके घर पत्रकार आए तो उसका घर पत्रकार आए की तुम्हारे सौ साल के हो जाने का राज़ क्या हैं उसने कहा ना मैंने कभी शराब पी, ना कभी विवाह किया, ना किसी स्त्री के पीछे भगा – दौड़ा, शराब तो दूर कभी सिगरेट भी नहीं पिया. समय पर सोना, समय पर उठना, योगासन, घुमने जाना, श्रम करना, रुखा सुखा खाना और ऊँचे विचार करना इसलिए इतना जीया और जब वो पत्रकार प्रभावित हो रहे थे तभी बगल के कमरे से जोर की खडबड़ाहट हुई और कोई भागता हुआ मालुम हुआ तो उन्होंने कहा “क्या हुआ” पत्रकारो ने पूछा तो उन्होंने कहा कोई नहीं मेरे पिताजी हैं वो फिर पी कर आ गए और उन्होंने फिर नौकरानी को पकड़ने की कोशिश की तो पत्रकारों ने पूछा “वो अभी जिंदा हैं” उन्होंने कहा की “हाँ उनकी उम्र 120 साल हैं लेकिन वो आदते अपनी छोड़ते ही नहीं. समझा समझा के मैं थक गया. अभी भी पीना और अभी भी उपद्रव करना”
तो तुम्हे समझाया जाता हैं की ब्रह्मचारिय की ऐसे लाभ वैसे लाभ की तुम्हारी बुद्धि बढ़ेगी और तुम्हारी बुद्धि बड़ी प्रखर हो जाएगी लेकिन तुम्हारे ब्रह्मचारियो का क्या हिसाब हैं अगर ये सच होता तो दुनिया की सारी नोबल प्राइज भारत आती लेकिन भारतीयों को तो कम ही मिले हैं. सर्वाधिक नोबल प्राइज मिलती हैं यहूदियों को. और यहूदियों को ब्रह्मचारिय पर थोडा सा भी विश्वास नहीं हैं. यहूदी ब्रह्मचारिय को बिलकुल मानते ही नहीं. यहूदी रबाई भी विवाहित होता हैं ब्रह्मचारिय नहीं होता. वो ब्रह्मचारिय विरोधी हैं जीसस के खिलाफत में एक खिलाफत ये भी हैं उनकी की उन्होंने विवाह नहीं किया था क्यूंकि विवाह नैसर्गिक हैं उनके हिसाब से यहूदियों को सर्वाधिक नोबल प्राइज मिलते हैं लेकिन उनकी संख्या बहुत छोटी हैं. ये आठ करोड़ का मुल्क हैं कितनी नोबल प्राइज मिली अगर उंगलियों पर गिनने बैठे तो गिन कर कुछ लोग हैं और जिनको मिली उनमे एक भी ब्रह्मचारिय नहीं था ना तो रबिन्द्रनाथ, ना तो डॉक्टर रमन, ना जगदीश चन्द्र बासु एक भी ब्रह्मचारिय नहीं था. नोबल प्राइज तो मिलनी चाहिए पूरी के संक्राचारी इत्यादि को मगर इनको तो कुछ मिलते नहीं. नोबल प्राइज तो मिलनी चहिये हिमालय में बैठे हुवे ब्रह्मचारियो को मगर इनकी बुद्धि में तो कुछ दिखाई पड़ता ही नहीं मैं निरक्षण से कह रहा हूँ की ये सब बकवास हैं.

Also Check : Poems on Mother in Hindi 

Hasya Vyang Kavita in Hindi

Hasya Vyang Kavita in Hindi

अगर किसी चीज़ पर विश्वास करना ही चाहते हो तो खुद की भलाई व खुशियों पर करो. नए नए रस्ते खोज निकालो जिनसे आपके मन में प्रसन्नता का भाव आता हैं फिर चाहे वो कैसे हैं. जैसे की आप खुशियाँ खोजते खोजते यहं तक आ गए हैं ये भी एक रास्ता ही हैं. आप खुशियों की पहली सीढ़ी के लिए हम आपको बधाई देना चाहेंगे.

अगर हमारा लेख और कविताए पसंद आती हैं तो हमे comment section में जरुर सूचित कीजियेगा.
धन्यवाद! 🙂

Hasya Vyang Kavita in Hindi

Also Check : एक किसान की पुकार

(Hasya Kavita in Hindi) :

 

डर नहीं लगता उस रात मैं बहुत डर रहा था क्योंकि मैं एक कब्रिस्तान के पास से गुजर रहा था एक तो मौसम बदहाल था और दूसरा गर्मी से मेरा बुरा हाल था अचानक मेरी आंखें फटी की फटी रह गईं जब मेरी नजरें कब्र पर बैठे एक आदमी पर चढं गईं मैंने कहा इतनी रात को यहां से कोई भूलकर भी नहीं फटकता यार तू कब्र पर बैठा है तुझे डर नहीं लगता मेरी बात सुनते ही वो ऐंठ गया बोला इसमें डरने की क्या बात है कब्र में गरमी लग रही थी, इसलिए बाहर आके बैठ गया

Hasya Vyang Kavita in Hindi

Hindi Ki Hasya Kavita :

चार लैन सुणा रियो ऊं

हमने अपनी पत्नी से कहा-
‘तुलसीदास जी ने कहा है-
ढोल, गंवार, शूद्र, पशु, नारी
ये सब ताड़न के अधिकारी
-इसका अर्थ समझती हो
या समझाएं?’
पत्नी बोली-
‘इसका अर्थ तो बिल्कुल ही साफ है
इसमें एक जगह मैं हूं
चार जगह आप हैं।’

 

Hasya Vyang Kavita in Hindi : 
Students- Hostellers का रखती ख्याल है Maggi Bachelors के लिए तो कसम से बवाल है Maggi
Breakfast, Lunch या dinner खाओ जब भी जी चाहे Utilization की जीती जागती मिसाल है Maggi
Egg, Chiken, Paneer, veg कितने रूप हैं इसके मनभावन स्वाद की एक तरण-ताल है Maggi
महगाई का जवाब तो नहीं सरकार के भी पास खुद महगाई के लिए बन गयी सवाल है Maggi
कुछ और ना हो इसका स्टॉक में होना जरुरी है अपने लिए तो जैसे चावल-दाल है Maggi
मियां-बीवी जो दोनों लौटे थक के ऑफिस से फिर dinner में अक्सर होती इस्तेमाल है Maggi
कभी था डर बीवी रूठी तो सोना पड़ेगा भूखे ही अबला पुरुषों के लिए बन गयी ढाल है Maggi
टेडी-मेडी, सुखी-गीली फिर भी स्वाद में डूबी बयां करती है क्या ज़िन्दगी का हाल है Maggi
गुजारी हमने कैसे ज़िन्दगी, मत पूछ ‘आलसी’ कि मेरी ज़िन्दगी के भी कई साल हैं Maggi

 

Hasya Vyang Kavita in Hindi :

चार लैन और सुणा रियो ऊं…

‘पत्नी जी!
मेरो इरादो बिल्कुल ही नेक है
तू सैकड़ा में एक है।’
वा बोली-
‘बेवकूफ मन्ना बणाओ
बाकी निन्याणबैं कूण-सी हैं
या बताओ।’

Also Check : Benefits of Drinking Warm Water in Hindi

ठंड का असर (Hasya Vyang Kavita in Hindi)

बालक का पेट भरने हेतु
आप उसकी माँ को ही सताते हैं,
कृपया बताएँ—
भैंस का दूध
बालक को क्यों नहीं पिलाते हैं ?
वो बोले—
जिसका दूध बालक के पेट में जाता है,
उसकी ठंड का असर बालक में आता है।
आप ही बताएँ श्रीमन्
भैंस का दूध बालक को पिलाकर
क्या परेशान नहीं हो जाऊँगा,
माँ को तो ठंड से बचा लेता हूँ,
भैंस को कहाँ तक बचाऊँगा ?

 

Hasya Vyang Kavita in Hindi :

उस पर कोई जीएसटी, कोई नोटबंदी नहीं है।।1।।

दुनिया पर बोझ है जिसके चेहरे पर मायूसी है।
उजाला है वो जिसके ओठों पर हंसी है।
हंसिए! हां हंसिए! हर पल खिल खिलाकर,
हंसिए! मन चाहा पाकर, हंसिए न भी पाकर।।2।।

हंसिए उन पर जो गिरते हैं,
गिरते जाते हैं, सम्हलते ही नहीं।
अपनी रफ्तार बेढंगी जो कभी बदलते ही नहीं।।
राजनीति में आज ऐसे कई सिरफिरों का जमघट है।
अब तक है नाक चढ़ाए, जबकि उनका ऊंट उलटी करवट है।।3।।

कोस रहे हैं सांप्रदायिकता को,
ईवीएम को उस धाकड़ के हर निर्णय को।
चुनौती दे रहे हैं जन-मन के विवेक को,
चुनाव आयोग की निष्पक्ष कार्य की लय को।।
जो निर्लज्ज हो सारे शुभ परिवर्तनों को नकार रहे हैं।
जाने कितनी तरह से अपनी खीझ उतार रहे हैं।।4।।

हंसो लालू पर जो जा फंसे हैं कोर्टों के दलदल में।
हंसो नीतीश पर जो डगमग हैं,
लालू पुत्रों की आकांक्षाओं की हलचल में।।
हंसो युवराज पर जो यूपी से बे आबरू होकर निकले,
हंसो केजरीवाल पर जो चित हुए अपनी ही पार्टी के दंगल में।।

Also Check : Hindi Motivational Quotes with Images 

Hasya Vyang Kavita in Hindi

 

नदी में डूबते आदमी ने  Hasya Vyang Kavita in Hindi :

पुल पर चलते आदमी को
आवाज लगाई- ‘बचाओ!’
पुल पर चलते आदमी ने
रस्सी नीचे गिराई
और कहा- ‘आओ!’
नीचे वाला आदमी
रस्सी पकड़ नहीं पा रहा था
और रह-रह कर चिल्ला रहा था-
‘मैं मरना नहीं चाहता
बड़ी महंगी ये जिंदगी है
कल ही तो ए बी सी कंपनी में
मेरी नौकरी लगी है।’
इतना सुनते ही
पुल वाले आदमी ने
रस्सी ऊपर खींच ली
और उसे मरता देख
अपनी आंखें मींच ली
दौड़ता-दौड़ता
ए बी सी कंपनी पहुंचा
और हांफते-हांफते बोला-
‘अभी-अभी आपका एक आदमी
डूब के मर गया है
इस तरह वो
आपकी कंपनी में
एक जगह खाली कर गया है
ये मेरी डिग्रियां संभालें
बेरोजगार हूं
उसकी जगह मुझे लगा लें।’
ऑफिसर ने हंसते हुए कहा-
‘भाई, तुमने आने में
तनिक देर कर दी
ये जगह तो हमने
अभी दस मिनिट पहले ही
भर दी
और इस जगह पर हमने
उस आदमी को लगाया है
जो उसे धक्का देकर
तुमसे दस मिनिट पहले
यहां आया है।’

Also Check : Swamy Vivekananda Quotes 

 

भिखारी (Hasya Vyang Kavita in Hindi) :

एक दयनीय भिखारी को
अपने सम्मुख
भिक्षापात्र पसारे देख मि. श्री ने कहा—
‘सुख-सुविधाओं से दामन भिगोता,
हे भिखारी, काश ! तू भी मंत्री होता।’
भिखारी बोला—
‘श्रीमन, महोदय,
अंतर मात्र इतना आता,
अब यह कटोरा आपके सम्मुख
पसार रहा हूँ,
तब विदेशी के सम्मुख फैलाता।’

 

 

 

Hasya Vyang Kavita in Hindi :

हाऊ आर यू

तूने मुझको किया मुलायम
मैं तेरा कल्याण करूँगा
राज कुसुम दोनों को कुरसी
काम के बदले काम करूँगा
एक बात पर भूल न जाना
बुरे वक़्त पर काम है आना
बी.जे.पी. में लौट न जाना
मोबाइल पर पूछते रहना
हलो याडी ‘हाऊ आर यू’

आओ साथी सही है मौक़ा
मिलकर खेलें थू-थू-थू
हा-हा ही-ही हू-हू-हू

करो बगावत, पाओ चेयर
गेम यहाँ पर बिल्कुल फेयर
इस हाथ लेना, उस हाथ देना
रिजल्ट ओरियेण्टड देन एंड देयर
कुरसी से क्यों दूर खड़ा है
बुला रही है कुरसी छू

जम्बो मंत्रिमंडल का होना
रोज़ विपक्षी रोते रोना
माल अगर तुमको खाना है
सबके हाथ में दे दो दौना
आकंठ करेप्ट सभी को कर दो
फिर आएगी किसकी बू

पंजे की है पकड़ भी ढीली
फिर भी मैडम नीली-पीली
हाथ बढ़ाओ खेल में साथी
वरना आ जाएगा हाथी
बड़ा मज़ा है राजनीति में
मैं भी अच्छा, अच्छी तू

Also Check : Inspirational Thoughts in Hindi 

Hasya Vyang Kavita in Hindi :

जीवन में ढलती खुशियों की शाम है बीवी जो पढ़ी नहीं सिर्फ सुनी जाये वो कलाम है बीवी
सर चढ़ गयी तो फिर कुछ भी अपने बस में नहीं ये जान के भी जो पी जाये वो जाम है बीवी
क्यों मारी पैर पे कुल्हाड़ी जेहन में उनके है अब जो सोचते थे चक्कर काटने का इनाम है बीवी
अरेंज मर्डर हुआ हो या इश्क में खुद ही चढ़ गए सूली जो सब को झेलनी, ऐसी उलझनों आम है बीवी
सजा तय है जो जुर्म किया हो न किया हो रोयी नहीं की फिर क्या सबूत क्या इलज़ाम है बीवी
माँ की कहानियों में ही होती थी सावित्री, दमयंती मगर अब शहरी चका-चौंध की गुलाम है बीवी
क्या करो, ओढो, पहनो ये बताने की जुर्रत किसको पर क्या ये खर्चे मेरे पसीने का दाम है बीवी
माँ-बाप पीछे पड़े हैं कैसे समझाऊ उन्हें बदलते दौर में किस बला का नाम है बीवी
कुंवारा हूँ सो कह लूं आज जो कुछ भी कहना है कल तो लिखना ही है खुदा का पैगाम है बीवी

 

Hasya Vyang Kavita in Hindi :

एक रहस्य थम जाती है कलम बंद हो जाते हैं अधर ठहर जाती हैं श्वासें भी पल भर को लिखते हुए नाम भी… उस अनाम कानजर भर कोई देख ले आकाश को या छू ले घास की नोक पर अटकी हुई ओस की बूंद झलक मिल जाती है जिसकी किसी फूल पर बैठी तितली के पंखों में या गोधूलि की बेला में घर लौटते पंछियों की कतारों से आते सामूहिक गान में कोई करे भी तो क्या करे इस अखंड आयोजन को देखकर ठगा सा रह जाता है मन का हिरण इधर-उधर कुलांचे मारना भूल निहारता है अदृश्य से आती स्वर्ण रश्मियों को जो रचने लगती हैं नित नये रूप किताबों में नहीं मिलता जवाब एक रहस्य बना ही रहता है…

 

Hasya Vyang Kavita in Hindi :

जीवन का किसी क्षण कोई भी भरोसा नहीं जोखिम ना आप यूं अकेले ही उठाइए सबसे सही है राह फैलाए खड़ी है बांह बीमा कम्पनी को इस जाल में फंसाइए पति पत्नी से बोला फायदे का सौदा है ये प्रिय आप भी जीवन बीमा करवाइए पत्नी बोली करवा रखा है आपने जनाब उससे कोई फायदा हुआ हो ता बताइए

 

Hasya Vyang Kavita in Hindi :
अभिसार गा रहा हूँ ले जाएगा कहाँ तू मुझसे मुझे चुरा के!
पत्थर के इस नगर में कर बद्ध प्रार्थनाएँ, इस द्वार सर झुकाएँ,उस द्वार तड़ फड़ाएँ,;फिर भी न टूटती हैं, फिर भी न टूटनी है, चिर मौन की कथाएँ, चिर मौन की प्रथाएँ,
क्यों टेरता है रह-रह मुझे बाँसुरी बना के!
उजड़े चतुष्पथों पर बिखरे हुए मुखौटे, जो खो गए स्वयं से औ’ आज तक न लौटे, उनमें ही मैं भी अपनी पहचान पा रहा हूँ, संन्यास के स्वरों में अभिसार गा रहा हूँ,
क्यों रख रहा है सपने मेरी आँख में सजा के!

Also Check : Quotes related to Life and Love

Hasya Vyang Kavita in Hindi :

पावन कर दो कवि! मेरा मन पावन कर दो!
हे! रस धार बहाने वाले,हे! आनन्द लुटाने वाले,
ज्योतिपुंज मैं भी हो जाऊँ ऐसा अपना तेज प्रखर दो!

 

Hasya Vyang Kavita in Hindi :

कमबख्त गम जुदाई सब साथ कर गया अच्छे अच्छों को माफ कर गया मैंने सोचा दिल पर रख रहा है हाथ कमबख्त जेब साफ कर गया

 

Hasya Vyang Kavita in Hindi :

बिखरे पत्ते इस बसंत में सखी सुना है तुमने नीम कोंपलें फूटी थी
बढ़ते बचपन के पंखों पर कड़वे सच की छाँव तले खुद में पराया दर्द सा पाले कुछ जागी कुछ सोई थी
इस बसंत में सखी सुना है तुमने नीम कोंपलें फूटी थी
कोंपल छोटी बिटिया जैसी चूनर में यौवन दबाए झुकी झुकी आंखों से अपने सपने बनाती मिटाती थी
इस बसंत में सखी सुना है तुमने नीम कोंपलें फूटी थी
पत्ती ने फिर ओंस जनी हीरे मोती सी सहेजे उसको बिटिया झुलसती जेठ धूप में दर दर पानी भटकती रही
इस बसंत में सखी सुना है तुमने नीम कोंपलें फूटी थी
उभरे कंगूरों से सज कर दवा हवा में घुलती रही नीम नहीं बिटिया भी मेरी हर दिन पतझड़ सहती रही
इस बसंत में सखी सुना है तुमने नीम कोंपलें फूटी थी

 

Hasya Vyang Kavita in Hindi :

विशेष छूट हेयर ड्रेसर ने, विशेष छूट के शब्द, इस तरह बताए बाल काले करवाने पर, मुंह फ्री काला करवाएं दोहे पढ़कर सुनकर देखकर निकला यह निष्कर्ष योद्धा बन लड़ते रहो जीवन है संघर्ष   जग में सबके पास है अपना अपना स्वार्थ केवल तेरा कर्म है मानव तेरे हाथ   कर्मक्षेत्र में जो डटे लिया लक्ष्य को साध वही चखेंगे एक दिन मधुर जीत का स्वाद   रखती है प्रकृति सदा परिवर्तन से मेल शूरवीर नित ढूंढते सदा नया इक खेल   मौन हुआ वातावरण मांग रहा हूंकार वक्त पुकारे आज फिर हो जाओ तैयार   जागो आगे बढ़ चलो करो शक्ति संधान केवल दृढ़ संकल्प से संभव नवनिर्माण   कुछ तो ऐसा कर चलो जिस पर हो अभिमान इस दुनिया की भीड़ में बने अलग पहचान

 

 

Hasya Vyang Kavita in Hindi :

हे पन्थी पथ की चिन्ता क्या? हे पन्थी पथ की चिन्ता क्या ?
तेरी चाह है सागर मथ भूधर, उद्देश्य अमर पर पथ दुश्कर कपाल कालिक तू धारण कर

बढ़ता चल फिर प्रशस्ति पथ परजो ध्येय निरन्तर हो सम्मुख फिर अघन अनिल का कोइ हो रुख      कर तू साहस, मत डर निर्झर है शक्त समर्थ तू बढ़ता चलजो राह शिला अवरुद्ध करे तू रक्त बहा और राह बना पथ को शोणित से रन्जित कर हर कन्टक को तू पुष्प बनानश्वर काया की चिन्ता क्या?हे पन्थी पथ की चिन्ता क्या ?
है मृत्यु सत्य माना पातिपर जन्म कदाचित महासत्य तुझे निपट अकेले चलना है हे नर मत डर तू भेद लक्ष्यइस पथ पर राही चलने मेंसाथी की आशा क्यों निर्बल

भर दम्भ कि तू है अजर अमर तेरा ध्येय तुझे देगा सम्बलपथ भ्रमित न हो लम्बा पथ हैहर मोड खड़ा दावानल है चरितार्थ तू कर तुझमे बल है है दीर्घ वही जो हासिल है

बन्धक मत बन मोह पाशों काये मोह बलात रोकें प्रतिपल है

द्वन्द्व समर में मगर ना रुक

जो नेत्र तेरे हो जायें सजल बहते अश्रु की चिन्ता क्या हे पन्थी पथ की चिन्ता क्या ?

 

 

Hasya Vyang Kavita in Hindi :
कविता खुशबू का झोंका कविता खुशबू का झोंका, कविता है रिमझिम सावन कविता है प्रेम की खुशबू, कविता है रण में गर्जनकविता श्वासों की गति है, कविता है दिल की धड़कन हॅंसना रोना मुस्काना, कवितामय सबका जीवन कविता प्रेयसी से मिलन है, कविता अधरों पर चुंबन कविता महकाती सबको, कविता से सुरभित यह मन कभी मेल कराती सबसे, कभी करवाती है अनबन कण कण में बसती कविता, कवितामय सबका जीवन कविता सूर के पद हैं, कविता तुलसी की माला कविता है झूमती गाती, कवि बच्चन की मधुशाला कहीं गिरधर की कुंडलियां, कहीं है दिनकर का तर्जन गालिब और मीर बिहारी, कवितामय सबका जीवन कविता है कभी हॅंसी तो, कभी दर्द है कभी चुभन है बन शंखनाद जन मन में, ला देती परिवर्तन है हैं रूप अनेकों इसके, अदभुत कविता का चिंतन मानव समाज का दर्शन, कवितामय सबका जीवन

 

Hasya Vyang Kavita in Hindi :

इक कविता कुछ पल के उथले चिंतन से कभी जनमती है इक कविता वर्षों कवि के अंतर्मन में कभी पनपती है

इक कविता दो नयनों में बन अश्रु-बिन्दकभी चमकती है इक कविता दो अधरों की मुस्कान बनी कभी ठुमकती है इक कविता सूने बिस्तर की सिलवटों में कभी सिसकती है इक कविता दो बाहों के आलिंगन में कभी सिमटती है इक कविता
पूजा के श्रद्धा सुमनों सी कभी महकती है इक कविता क्रोधाग्नि की ज्वाला बन कर कभी धधकती है इक कविता
वात्सल्य भरी, ममतामय सी कभी छलकती है इक कविता आवेश ईर्ष्या द्वेष भरी कभी उफ़नती है इक कविता
मेरे मत से उत्पन्न हो कर मेरे भावों से निखर सँवर तेरे निष्ठुर मन तक भी क्या कभी पहुँचती है इक कविता ?

 

Hasya Vyang Kavita in Hindi :

फिर मन में ये कैसी हलचल ? वर्षों से जो मौन खड़े थे निर्विकार निर्मोह बड़े थे उन पाषाणों से अब क्यूँकर अश्रुधार बह निकली अविरल फिर मन में ये कैसी हलचल ?
निश्चल जिनको जग ने माना गुण-स्वभाव से स्थिर नित जानाचक्रवात प्रचंड उठते हैं क्यूँ अंतर में प्रतिक्षण, प्रतिपल फिर मन में ये कैसी हलचल ?
युग बीते जिनसे मुख मोड़ा जिन स्मृतियों को पीछे छोड़ाअब क्यूँ बाट निहारें उनकी पलपल होकर लोचन विह्वल? फिर मन में ये कैसी हलचल ?

 

Hasya Vyang Kavita in Hindi :

उम्र का वो हंसी मंज़र
जो गुज़ारा है मैंने तेरे संग,
उस पल में पायी हर ख़ुशी
हर वक़्त पाया तेरा संग भी !

कभी हंसाया, कभी रुलाया
कभी तूने गले से लगाया,
कभी रोज़ मिले, कभी दूर रहे
यूं पलटा किस्मत ने खाया !

कभी धूप में चलकर साथ दिया
कभी बांहों का हार दिया,
कभी बारिश में संग चले
यूं तुम हम से हम तुम से मिले !

कभी प्यार से ज़्यादा प्यार दिया
मेरे प्यार को यूं अंजाम दिया,
इन् आँखों से जब अश्क गिरे
तब तूने मुझको थम लिया!

प्यार की ये हंसी अठखेलियां न जाने कब तक हैं संग हमारे,
बस ! इतनी दुआ है रब से, हमेशा साथ रहे तुम्हारा अब तो संग हमारे…!

 

Hasya Vyang Kavita in Hindi :

हर साल बड़े-बड़े वादों के साथ आते हैं ये,
हर साल यू ही निराश कर चले जाते हैं ये !
हर बार एक ही बात कह जाते हैं ये,
हर वक्त यही सुनाते हैं ये,
कि बदल कर रख देंगे इस समाज को हमारे लिए ,
हर वक्त यही दावे करते रहते हैं ये!
इनकी बातों में आकर हम अपनी राह से भटक जाते हैं,
इनको अपना बहुमत देकर, बाद में पछताते हैं!
इनके चक्कर में रहकर तो हम झूठ और धोखे ही पाते हैं,
जब कभी होता है हमें इनके झूठ का एहसास ,
तो हम निराश होकर अपने सच्चाई से बने घरौंदो मे लौट आते हैं!
इनकी तो शान झूठी , पहचान झूठी , इनकी तो हर एक बात झूठी,
बदल कर रख देंगे हम इन घूस खोरों को, इनकी तो सरकार झूठी!

 

 

इन चार लाइणा में ट्रेन का सीन है… Hasya Vyang Kavita in Hindi :

घराली बोली-
‘एजी!
ऊपर की बर्थ पे कैंया जाऊं
डर लागै है, गिर जाऊंगी।’
मैं बोल्यो- ‘री भागवान!
थै ऊपर नै तो जाओ,
थारे जाते ही
बर्थ नीचै आ जावेगी।’

 

(Hindi Ki Hasya Kavita)

अपने जख्मों को भी आइना बनाया हमने
आपको हंसता हुआ चेहरा दिखाने के लिए
इतना आसान नहीं खुद का तमाशा करना
कलेजा चाहिए औरों को हंसाने के लिए

 

(Hindi Ki Hasya Kavita)

 

हास्य ही सहारा है
जिंदगी हो गई है तंग दस्त
और तनावों ने उसे
कर दिया है अस्त व्यस्त,
मस्ती की फ़हरिस्त
निरस्त हो गई है
और हमारी हस्ती
अपनों के धोखे में
पस्त हो गई है।
अब कोई ऐसा सिद्ध हस्त
सलाहकार भी नहीं
जो हमारी त्रस्त जीवन शैली को
आश्वस्त कर सके
या हमारे सपनों का रखवाला
सरपरस्त बन सके।
ऐसे में मात्र एक ही सहारा है
हमारे जीवन की शुष्क धरा पर
केवल हास्य ही
उभरता हुआ चश्मा है, धारा है।
यही हमारे दुखों को देगा शिकस्त
और करेगा हमें विश्वस्त
कि आओ, हास्य-कविताएँ पढ़ो
और हो जाओ मदमस्त।

 

 

(Hindi Ki Hasya Kavita)

बात बनाना सीख गया

संबंधों को यार निभाना सीख गया
हाँ, मैं भी अब आँख चुराना सीख गया

वो है मदारी, मैं हूं जमूरा दुनिया का
पा के इशारा बात बनाना सीख गया

नंगे सच पर डाल के कंबल शब्दों का
अपनी हर करतूत छिपाना सीख गया

दिल दरपन था, सब कुछ सच कह देता था
उसकी भी मैं बात दबाना सीख गया

वो भी चतुर था, उसने सियासत सीख ही ली
धोखा देना, हाथ मिलाना सीख गया

उसको दे दो नेता पद की कुर्सी, वो
वादे करना और भुलाना सीख गया

सीख गया सुर-ताल मिलाना मैं भी ‘अजय’
वो भी मुझको नाच नचाना सीख गया

 

(Hindi Ki Hasya Kavita)

फील गुड

आपके जीवन में वो आई नहीं, पर फील गुड
आपने कोई खुशी देखी नहीं, पर फील गुड

डिग्रियाँ हैं पास में देने को पर रिश्वत नहीं
नौकरी ढूँढ़ें से भी मिलती नहीं, पर फील गुड

घर का राशन ख़त्म है तो क्या हुआ उपवास रख
जेब में फूटी भी इक कौड़ी नहीं, पर फील गुड

घूस लेकर भी पुलिस का छोड़ देना कम है क्या ?
तेरी नज़रों में पुलिस अच्छी नहीं, पर फील गुड

कल थे जो उस पार्टी में आज इसमें आ गए
कुछ समझ में बात ये आई नहीं, पर फील गुड

देश क़र्जों में धँसा है, भ्रष्टता है चरम पर
बात तुमने ये कभी सोची नहीं, पर फील गुड

आप जनता हैं समय की आपको परवाह क्या
ट्रेन टाइम से कभी आती नहीं, पर फील गुड

एक ने मंडल बनाए, एक ने बंडल किए
बात दोनों की हमें भाई नहीं, पर फील गुड

नाम इक दिन आएगा इतिहास में ‘अनमोल’ का
आज इसको जानता कोई नहीं, पर फील गुड

 

(Hindi Ki Hasya Kavita)

हँसिकाएँ
पुल-निगम

तारीफ़ के पुल
वह प्रारम्भ से ही बाँधते हैं,
अब हो गए हैं,
इस क्षेत्र में कुछ सीनियर,
इसीलिए हैं
‘ब्रिज-कारपोरेशन’ में इंजीनियर।

अनभिज्ञ

जनता के दुख-दर्द से
सर्वथा अनभिज्ञ हैं,
इसीलिए बड़े
राजनीतिज्ञ हैं।

एकता

हमने पूछा—
‘अनेकता में एकता,
आप नारा लगाते हैं,
कृपया बताएँ
इसके क्रियान्वयन-हेतु आपने
अब तक क्या किया ?
वो बोले—
‘अभी तो इसके प्रथम चरण से
गुज़र रहे हैं,
सर्वप्रथम अनेकता लाने का
प्रयास कर रहे हैं।’

पैदावार

हमसे पूछा गया—
‘किन्हीं दो फ़सलों के नाम बताएँ
स्वतंत्रता-प्राप्ति के बाद लगातार
बढ़ रही हो जिनकी पैदावार।’
हमने कहा—‘भ्रष्टाचार व आतंकवाद’।

झूठ

मंत्री जी से पूछा गया—
‘अपने जीवन का
कोई महत्वपूर्ण झूठ बताइए।’
वो बोले—
‘मेरे भाषणों की प्रतियाँ ले जाइए।’

नारा

मंत्री जी हमेशा
ऊपर उठो, ऊपर उठो
का नारा लगाते हैं,
हम क्रियान्वित करने को कहते हैं
तो वायुयान में चढ़ जाते हैं।

दर्पण

उन्होंने देश बचाओ का नारा दिया
और कहा सभ्रांत नागरिकों के बीच—
कि कोई भी देशद्रोही नाग,
सांप्रदायिक, आदमख़ोर बाघ, तस्कर भ्रष्टाचारी
आपको दिखे तो हमें दिखाएँ, देश बताएँ !
एक व्यक्ति ने
उनकी इच्छापूर्ति का अनोखा उपाय किया—
उन्हें दर्पण दिखा दिया।

विकास-मार्ग

राष्ट्रीय समस्याओं पर
परिचर्चा करने आए पत्रकारों से
मंत्री जी ने कहा—
‘आप ही देश के विकास-मार्ग को
साफ़-सुथरा करने का कोई उपाय बताइए
पत्रकारों ने कहा—
‘‘श्रीमन, मार्ग से आप हट जाइए।’

वास्तविक कारण
एक प्राकृतिक चिकित्सक ने
मंत्री जी के लगातार
मुटियाने का कारण बताया—
‘लोहा, सीमेंट, बालू, यानी
राष्ट्रीय विकास के समस्त साधन
मंत्री जी के पेट में जा रहे हैं,
इसीलिए राष्ट्र के स्थान पर
मंत्री जी मुटिया रहे हैं।’

अतीत

एक अत्याधुनिक युवती को उन्होंने दी सफ़ाई महोदय यह अपने अतीत को नहीं भूल पाई
प्रजातंत्र

वो बोले

प्रजातंत्र की परिषाभा दीजिए।
हमने कहा—
भीतर गाली-गलोच,
वीभत्स रस का खुला उपयोग,
ऊपर समाज-सेवी और
राष्ट्रभक्ति का चोचला,

एक-दूसरे की ओछी आलोचना।
विकास के नाम पर मात्र विवाद
या फिर दंगा-फ़साद
और जहाँ वोटों पर बलिहारी
रहती हो राजनीति बेचारी,
यही वह तंत्र है, सच्चा प्रजातंत्र है।

You may also like

3 comments

KAVI YOGENDRA TIWARI December 2, 2017 - 11:56 am

कलम गर बिक जाए, फिर उसमें धार नहीं होती है।
छेद हो गर फिर नौका में, तो नैया पार नहीं होती है।।
शिद्दत से डूबकर बस करते रहो, जो तुम्हें पसंद हो।
कहते हैं, जी तोड़ मेहनत कभी बेकार नहीं होती है।।

– योगेंद्र तिवारी

Reply
admin December 2, 2017 - 9:23 pm

क्या पंक्तियाँ कही योगेन्द्र तिवारी जी! वाह 🙂

Reply
Keshav mishra September 3, 2018 - 12:54 pm

Super se uper

Reply

Leave a Comment

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.