Home हँसी मजाक Hindi Hasya Kavita | हास्य कविताओं का बेहतरीन संग्रह

Hindi Hasya Kavita | हास्य कविताओं का बेहतरीन संग्रह

by Hind Patrika

Hindi Hasya Kavita

Hindi Hasya Kavita : जिंदगी मौत ना बन जाए संभालो यारो!!! अरेरेरे मैं कहता हूँ अरे छोडो यारो बंद करो ये फालतू की बकवास और ध्यान लगाओ उन चीजों पर जो किसी भी तरह से आपको हंसाते, गुदगुदाते हैं. इतनी लम्बी लम्बी राते इतने बड़े बड़े दिन लेकिन फिर भी अगर सोचा जाए तो कुछ ही ज़िन्दगी के दिन. पूरी ज़िन्दगी में हम सभी की चार स्टेजस होती हैं यानी की चार पणाव होते हैं अगर आपने उन्हें पार कर लिया तो समझो की जिंदगी जी ली यही सोच रहे थे ना आप लोग की यही कहूँगा लेकिन नहीं मेरी सोच केवल ये कह कर खत्म नहीं होती भले ही ज़िन्दगी में चार पणाव होते हैं अगर वो चार पणाव जिए हैं तो ज़िन्दगी जी हैं तुमने अगर वो चार पनाव गुज़ारे हैं तुमने तो ज़िन्दगी को यानी खुद की ही ज़िन्दगी को धोखा दिया हैं तुमने.

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ये जो ज़िन्दगी हैं मेरे दोस्त ये बहुत ही मुद्दतो के बाद हासिल होती हैं क्या पता हमारे पुराने जन्म की मुद्दत या फिर हमारे माँ बाप का विश्वास की उन्हें ऐसी संताने मिलेंगी जो उनकी ज़िन्दगी बदल देंगी और हम क्या करते हैं इतनी प्यार के साथ हमे इस धरती पर वो ईश्वर भेजते हैं किसके लिए ताकि हम अपनी ज़िन्दगी गुज़ारे नहीं मेरे दोस्त नहीं. ज़िन्दगी खश रहने का नाम हैं. कुछ भी कर के अगर खुश रह रहे हो तो तुम तो ज़िन्दगी जी रहे तो तुम अगर आंधी तुफानो में भी खुशियों की मशालो को जिंदा रख रहे तुम तो ज़िन्दगी जी रहे हो तुम, अगर किसी की आँखों के आंसू का कारण और होठो की मुसकाहट साथ में ला रहे हो तुम तो मैं कहता हूँ की ज़िन्दगी जी रहे हो तुम और सही मायने में जी रहे हो. कुछ खुशनसीब मेरे दोस्त ये तो पा लेते हैं लेकिन इसे ही ज़िन्दगी का मकसद समझते हैं. मजा तो भैया तब आये जब किसी और के चहरे पर हंसी लेकर आ सको तुम. और इसी का एक उपाय, एक तरकीब हम तुम्हे बताते हैं और वो ये हैं की इन्ही कविताओं के संग्रह को किसी के साथ भी यानी की किसी क साथ भी बाँट सको तो बांटिएगा जरुर. अगर हमारी ये बात आपको अच्छी लगी हो या इस संग्रह में से कोई कविता पसंद आई हो तो अपने विचार comment section में हमसे बाँटियेगा.
धन्यवाद. हँसते रहिये!!! 🙂

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यह कैसा है घोटाला कि चाबी मे है ताला  (Hindi Hasya Kavita) : 
यह कैसा है घोटाला कि चाबी मे है ताला कमरे के अंदर घर है और गाय में है गोशाला।
दातों के अंदर मुंह है और सब्जी में है थाली रूई के अंदर तकिया और चाय के अंदर प्याली।
टोपी के ऊपर सर है। और कार के ऊपर रस्ता ऐनक पे लगी हैं आंखें कापी किताब में बस्ता।
सर के बल सभी खड़े हैं पैरों से सूंध रहे हैं घुटनों में भूख लगी है और टखने ऊंघ रहे हैं।

मकड़ी में भागे जाला कीचड़ में बहता नाला कुछ भी न समझ में आये यह कैसा है घोटाला।
इस घोटाले को टालें चाबी तालें में डालें कमरे को घर में लायें गोशाला में गाय को पालें।
मुंह में दांत लगाये सब्जी से भर लें थाली रूई तकिए में ठूंसें चाय से भर लें प्याली।
टोपी को सर पर पहनें रस्ते पर कार चलायें आंखों पे लगायें ऐनक बस्ते में किताबे लायें।
पैरों पे खड़े हो जायें और नाक से खुशबू सूंघें भर पेट उड़ाये खाना और आंख मूंद के ऊंघे।
जाले में मकड़ी भागे कीचड़ नाले में बहता अब सब समझ में आये कुछ घोटाला ना रहता

 

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गोलियों वाली स्लेट  Hindi Hasya Kavita : 
गोलियों वाली स्लेट और चुने की खड़ियामचल जाता था देख मन चूरन की पुडिया कभी खेलते थे लूडो कभी छुपा छुपायी कभी प्लास्टिक किचेन सेट, कभी गुड्डे गुडिया
बांस के ऊपर लपेट लाता, लटपटी मिठाई वाला जादू लगता जब वो बनाये उससे घडी, बिच्छू, माला खुद खायी भी और दीदी को खिलाते आईसक्रीम फिर बताते तुम्हारा ही पैसा था गद्दे के नीचे वाला
बिजली कटने पे भी हम जश्न मनाया करते थे छत पे जुट अन्ताक्षरी के गाने गाया करते थे किसी का घर बनने को जब गिरता था बालू रेत के घर बना उसे खूब सजाया करते थे
क्लास टीचर मेरी ही कांपी झाकती थी जाने क्यों हर रोज वो मुझी को डांटती थी स्कूल जाना तो कभी मुझको मंजूर नहीं था पर पापा के आगे मेरी रूह कापतीं थी
स्कूल न जाने के 100 बहाने फ्लॉप हो जाते थे जब मेरे सामने गुस्से में खड़े मेरे बाप हो जाते थे
पर स्कूल वालों से हमें कभी डरना नहीं आया क्या क्या न हुआ पर होम-वर्क कभी करना नहीं आया उनके लिए हम कितने जतन कर कर के मर गए पर किसी को हमारी लिखावट कभी पढना नहीं आया
आँखे रंगोली से खुलती फिर चाय की प्याली अक्सर आती थी सन्डे को जिलेबी गर्म वाली राम-लक्ष्मण के दर्शन को लग जाता वहां मेला टीवी हो जिसके घर में छोटी या बड़ी वाली
अलिफ़ लैला सिन्ध्बाद और तिलस्मी जंजिरा सन्डे होता था हमारी खुशियों का जखीरा विक्रम बेताल और वो दादा दादी की कहानियां प्यारा बहुत था हमे मोगली और बगीरा
एक रुपया मुठ्ठी में आया नहीं की सारी दुनिया की खुशियाँ मुठ्ठी में हो जाती क्या नहीं खरीद सकता हूँ मैं इससे बोलो आज सोच के ही कितनी हसी है आती
ऐसा नहीं की पढने में न हो इंटरेस्ट मेरा कई किताबों का घर में लगा रहता था डेरा पिंकी, बिल्लू, चंपक भी घर आते जाते चंदामामा और नंदन का यहीं था बसेरा
पर नागराज था हमको जान से प्यारा सुपर कमांडो ध्रुव भी था अच्छा दोस्त हमारा बांकेलाल की चाल हमेशा पड़ती थी उल्टी डोगा से कांपता था रात को अंडरवर्ल्ड सारा
दाल में काला सबको नज़र आने लगा था वक़्त किताबों में मैं कैसे बिताने लगा था बुक में छुपा कामिक्स पढता जब पकड़ा गया मैं दिन में तारे दिखे और अँधेरा छाने लगा था
बहुत तेज है चाचा चौधरी का दिमाग पढ़ा था फट जाये ज्वालामुखी साबू का गुस्सा इतना बड़ा था पर पापा के गुस्से की हकीक़त कुछ यूँ सामने आई टुकड़े टुकड़े हो नागराज ज़मीन पे बिखरा पड़ा था
स्कुल में हालत मेरी कुछ हो गयी थी ऐसी मार-मार कर बिगड़ी मशीन का पुर्जा बना देते थे माँ भेजती थी की बेटा पढ़ लिख के इंसान बन जायेगा और वो थे की हर रोज मुझे मुर्गा बना देते थे
जब पापा की जेब से आखरी बार १० की नोट उड़ाई लगा ‘आज तो गए हम’, यूँ बात सबके सामने आई पापा की ख़ामोशी और माँ के आंसू ने दर्द इतना दिया किरोया बहुत माँ से लग के, और कसमें भी खायी
आवारा कुत्ते के बच्चों को घर में ला के मैं छुपाता रोटी दूध खिला-खिला कर खूब प्यार उसपे लुटाता पर आधी रात को पापा तब मेरी खबर अच्छे से लेतेजब वो कुं-कुं-कुं-कुं चिल्ला कर, पूरी दुनिया को जगाता
जब से वो आई थी बस ख़याल उसी का रहता था साथ ही आता जाता था, साथ ही उसके रहता था जिसके आगे दुनियां की सारी चीज़ें बेकार थी सच कहता हूँ वो मेरी साईकिल मेरा पहला प्यार थी
क्रिकेट में इंडिया की हालत जब बिगड़ने लगती टीवी के बाजु भगवान की फोटो सजने लगती सचिन के आउट होते ही खड़ा हो जाता था संकट फिर अपनी गली क्रिकेट वापस चलने लगती
मैदान हो या छत, कोई जगह नहीं बच पाती क्रिकेट तो क्लास में किताब से भी खेली जाती पर जाने क्या प्यार था बाल को सड़क की नाली से हर दुसरे शाट पे वो कमबख्त नाली में ही जाती
एक नयी डगर पे ज़िन्दगी जाने लगी थी बात हमको भी समझ अब आने लगी थी बचपन तब ख़तम होता लगने लगा जब किसी से आँखे अक्सर टकराने लगी थी
जैसे भी हैं, वो हर लम्हे हैं मुझको बहुत प्यारे माँ पिताजी को शत शत बार नमन बस इतना ही था कहना ,यही कहानी है मेरी ये था मैं और “ऐसा था मेरा बचपन”

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Hindi Hasya Kavita :

1) सन सन कर के दौड़ रहा है जब से ये सेंसेक्स, हर गली मोहल्ले खुल गए नए शोपिंग कॉम्प्लेक्स, अब सब के बस का कहाँ रहा girlfriend पालना….
2) महाराष्ट्र में भारत माँ का फटा कलेजा चाचा से भी आगे बढ़ता दिखा भतीजा शहर क्या आप के बाप का ?
3) माँ और पत्नी झगड़ रही हैं, कौन है तेरा खास?२४ घंटे फुफकार रहा ऑफिस में बैठा बॉस, लाइफ की बैंड बज गयी ………
4) बुड्ढे माँ-बाप की जाने कब पूरी होगी आस, कड़ी मेहनत कर के अपना पप्पू हो गया पास, मगर क्या job लगेगी ?

 

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(Hindi Hasya Kavita) :
कॉलेज का ये घटना क्रम शुरु हुआ कुछ इस प्रकार से, दिल्ली आये B.Tech करने झा बाबू बिहार से|
थोडा मुश्किल से पहुंचे पर college पहली नज़र में भा गया, अब तो लेना ही था एड्मीसन आखिर दिल जो इस पर आ गया|
हक्के-बक्के खडे रह गए, क्या दे अब प्रति उत्तर, कुछ इस अदा से recepsionist ने बोला था “welcome sir”|
उस नव-युवती से अंग्रेजी वार्ता में दिखे बड़े बेहाल से,क्या करते बाल-ब्रह्मचारी थे पिछले पच्चीस साल से|
college के पहले दिन के अंजाम से अंजान थे , मूछों पर ताव था और दिल में बड़े अरमान थे|
रैगिंग में कब सीनियर्स ने जूनियर्स को माफ़ किया ,पहले बालों को हाफ, फिर मूछों को साफ किया |
सजा मिली की जा के उस लड़की से प्यार का इजहार करो, जब तक ‘हाँ’ न कह दे तब तक ये बरं-बार करो |
पाव तले जमीं खिसक गयी पसीने से नहा गए, सुरसा सी कन्या देख यमदूत भी याद आगये |
सीनियर्स के खूब हड़काने पर झा ने अपना वार किया ,डरते-डरते पास गए, बड़ी मुश्किल से इजहार किया |
प्रति-उत्तर जानने को जब गौर से उसका चेहरा देखा, मुस्कुराहट देख के सोचे “प्रबल है आज किस्मत की रेखा”|
खुली आँखों से पल भर में सैकडों ख्वाब देख डाले, “लगता है ठीक से समझे नहीं मुझे अभी सीनियर्स साले” |
तभी उनके ख्वाबो पर अचानक वज्रापात हुआ,४४० के झटके का, गालों को आभास हुआ |
“I am your senior, तुमने ये कहा कैसे”,झा बाबू बोले पमोलियन कुत्ता पु-पुवाये जैसे.|
मार ninghti(90) – मार ninghti, 180 को पार किया ,तब जा के बाला ने झा बाबू को माफ़ किया |
झा जी का पहला साल बस ऐसे ही गुजरा था ,किसी ने बनवाया मुर्गा तो कोई करवाया मुजरा था|
class में भी हर रोज होता नया कमाल था ,बस ऐसे ही झा जी का गुजरा पहला साल था|

 

Hindi Hasya Kavita :

पत्नी की फटकार है अद्भुत,अद्भुत है पत्नी की मार। पत्नी के ताने सुन सुन कर, खुलते ज्ञान चक्षु के द्वार।।
दस्यु सुना उत्तर पत्नी काभरम हो गया अंतर्ध्यान। हार गई पत्नी से दस्युता बाल्मिकी हुए कवि महान।।
पत्नी से जब मार पड़ी तब,रोया फूट फूट नादान। कालिदास अनपढ़ मतिमंदा, हो गए कवि विद्वान महान।।
पत्नी की फटकार सुनी जब, तुलसी भागे छोड़ मकान। राम चरित मानस रच डाला,जग में बन गए भक्त महान।।

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एक भिखारी दुखियारा भूखा, प्यासा भीख मांगता फिरता मारा-मारा!
‘अबे काम क्यों नहीं करता? ”हट……हट!!’ कोई चिल्लाता, कोई मन भर की सीख दे जाता।पर…..पर….भिखारी भीख कहीं ना पाता!
भिखारी मंदिर के बाहर गया भक्तों को ‘राम-राम’ बुलाया किसी ने एक पैसा ना थमाया भगवन भी काम ना आया!
मस्जिद पहुँचाआने-जाने वालों को दुआ-सलाम बजाया किसी ने कौडी ना दी मुसीबत में अल्लाह भी पार ना लाया!
भिखारी बदहवास कोई ना बची आस जान लेवा हो गई भूख-प्यास। जाते-जाते ये भी आजमा लूँ गुरूद्वारे भी शीश नवा लूं!’ सरदार जी, भूखा-प्यासा हूं।।। ‘ओए मेरा कसूर अ?’ भिखारी को लगा किस्मत बडी दूर है।
आगे बढा़….तभी एक देसी ठेके से बाहर निकलता शराबी नजर आया भिखारी ने फिर अपना अलाप दोहराया।। ‘बाबू भूखे को खाना मिल जाए तेरी जोडी बनी रहे, तू ऊँचा रूतबा पाए।’
‘अरे भाई क्या चाहिए”बाबू दो रूपया —भूखे पेट का सवाल है!’ शराबी जेब में हाथ डाल बुदबुदाया।।।’अरे, तू तो बडा बेहाल है!”बाबू दो रूपये……”अरे दो क्या सौ ले।’ ‘बाबू बस खाने को……दो ही…..दो ही काफ़ी है।” अरे ले पकड सौ ले… पेट भर के खाले……बच जाए तो ठररे की चुस्की लगा ले।।।’
हाथ पे सौ का नोट धर शराबी आगे बढ ग़या।
भिखारी को मानो अल्लाह मिल गया।
‘तेरी जोडी बनी रहे, तू ऊँचा रूतबा पाए!’ भिखारी धीरे से घर की राह पकडता है। रस्ते में फिर मंदिर, मस्जिद और गुरूद्वारा पड़ता है।
भिखारी धीरे से बुदबुदाता है…….’वाह रे भगवन्…….तू भी खूब लीला रचाता है मांगने वालों से बचता फिरता, इधर-उधर छिप जाता है रहता कहीं हैं बताता कहीं है आज अगर ठेके न जाता खुदाया, मैं तो भूखों ही मर जाता! इधर-उधर भटकता रहता तेरा सही पता भी न पाता तेरा सही पता भी न पाता! तेरा सही पता भी न पाता!!

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मैं इमरान हाशमी बनना चाहता हूँ Hindi Hasya Kavita : 
पांचवी कक्षा की एक क्लास मे मास्टर ने बच्चों से पूछा बताओ क्या बनोगे, कैसे करोंगे अपने माँ-बाप का नाम ऊँचा किसी ने IAS. किसी ने PCS. किसी ने कहा अच्छा आदमी बनाना चाहता हूँ तभी पीछे की सीट से उठकर एक बच्चे ने कहा Sir! मैं इमरान हाशमी बनना चाहता हूँ
ऐसे जवाब की ख्वाब मे भी नही की थी कभी कल्पनापर Teacher को लगा शायद हो ये लडके का बचपना समझाया की बेटा गलती की है तुने Career को चुनने मेये तो बता क्या प्रॉब्लम है तुझे और कुछ बनने मे ???
लड़का बोला Sir! जॉब मे अभी कहाँ इतना पैसा है और Business करना मुझे लगता बेवकूफों जैसा है नेता फस जाते हैं Akshar स्टिंग ऑपरेशन के जंजाल मे खेल मे Zahar भर दिया मैच फिक्सिंग के बवाल ने पर फ़िल्म इंडस्ट्री मे प्रोफिट की लाइन हमेशा ऊपर चढ़ती है बढ़िया काम से Price-Value तो बुरे से Popularity बढ़ती है और इस बात को तो ख़ुद कई बड़े फ़िल्म समीक्षक माने है MMS Clips से भी ज्यादा बिकते इमरान के फिल्मो के गाने है
मै भी ऐसे गाने कर अपनी लाइफ बदलना चाहता हूँ इसीलिए तो Sir! मैं इमरान हाशमी बनाना चाहता हूँ
हुं!!!! आज कल के लडके जाने पढ़ते हैं किस किताब से Teacher का भी सर चक्र गया बच्चे के इस जवाब से Teacher ने फ़िर भी पूछा उसमे ऐसी क्या बात समाई है ये तो बता अभिषेक बच्चन बनने मे क्या बुराई है ???
सिर्फ़ दो फिल्मो से इतना नाम नही कमाया अभिषेक के बाप ने Murder किया लड़किया फ़िर भी कहती .Aashiq Banaya Aap Ne…मल्लिका,तनुश्री, उदिता निपटी पिछली फिल्मों की साइन मे सुनाने मे आया है की अब सेलिना हृषिता भी है लाइन मे
मै भी ऐसे टेस्टी CHOCOLATE का स्वाद चखाना चाहता हूँ इसीलिए तो Sir मैं इमरान हाशमी बनाना चाहता हूँ
अब मास्टर का गुस्सा पहुच गया सातवे आसमान पे बोले.. सिवाय लड़किया घुमाने के क्या किया इमरान ने ?? Sir! लड़कियों को पीछे घुमाना कोई आसान काम नही वरना बड़े Powerful लोगो का होता ये अंजाम नहीं
क्या नही जानते आप America के पूर्व राष्ट्रपति को ??कैसे प्राप्त हुए मोनिका के चक्कर मे .वीरगति को बदल गया कप्तान देश का सौरभ-नग्मा के टक्कर मे Cricket खेलना भूल गया वो .नए खेल के चक्कर मे मेरी इतनी बातों का मतलब बिलकुल सीधा-साफ है काबिलियेत मे भी इमरान हाशमी. बिल क्लिंटन का बाप है
मैं भी एक Demanded और काबिल आदमी बनाना चाहता हूँ इसीलिए तो Sir! मैं इमरान हाशमी बनाना चाहता हूँ

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आलपिन के सिर होता पर बाल नहीं होता है, एक कुर्सी के टांगे हैं पर फुटबाल नहीं फेंक सकती है।कंघी के हैं दांत मगर वह चबा नहीं सकती खाना, गला सुराही का है पतला किन्तु न गा सकती गाना। जूते के है जीभ मगर वह स्वाद नहीं चख सकता है आंखे रखते हुए नारियल कभी न कुछ लख सकता है। है मनुष्य के पास सभी कुछ ले सकता है सबसे काम इसीलिए सबसे बढ़कर वह पाता है दुनिया में नाम।

 

Hindi Hasya Kavita :

कितनी बड़ी दिखती होंगी मक्खी को चीजें छोटी सागर सा प्याला भर जल पर्वत सी एक कौर रोटी। खिला फूल गुलदस्ते जैसा कांटा भारी भाला सातालों का सूराख उसे होगा बैरगिया नालासा। हरे भरे मैदानों की तरह होगा इक पीपल का पातपे ड़ों के समूह सा होगा बचा खुचा थाली का भात। ओस बूंद दरपन सी होगी सरसो होगी बेल समान सांस मनुज की आंधी सी करती होगी उसको हैरान

 

Hindi Hasya Kavita :
भगवान हमें तभी याद आते हैं…. जब कोई मन्नत मांगनी हो रोज पूजा तो हम….. Cricketers और Film Stars की हीं करते हैं चढ़ावे मन्दिरों में कम….. अफसरों और नेताओं को ज्यादा चढ़ाते हैं भैया दहेज देना तो पाप है….. लेकिन दहेज लेना हीं सबसे बड़ा पुण्य है आतंकवादियों के मानवाधिकारों की चिंता रहती है हमें…………लेकिन सैनिकों के भी मानवाधिकार होते हैं…… ये अक्सर भूल जाते हैं हम भैया शादी तो हम दूसरे धर्म वाले से कर सकते हैं………लेकिन वन्देमातरम बोलने से पहले…. धर्म की आड़ में छिप जाते हैं हम खुद को देशभक्त कहने में शर्माते हैं हम…. लेकिन खुद को Secular कहकर घमंड से फूल जाते हैं हम WhatsApp और Facebook पर बड़ी-बड़ी बातें करते हैं हम जब कुछ करने की आती है बारी……. तो भीड़ में गुम हो जाते हैं हम व्यक्ति पूजा बड़ी शान से करते हैं हम…… राष्ट्र पूजा को साम्प्रदायिक बताते हैं हम जन्तर-मन्तर पर दामिनी को न्याय दिलाने के लिए आन्दोलन करते हैं हम लेकिन बहन-बेटियों को कराटे की शिक्षा देने के बारे में कभी सोच नहीं पाते हैं हम योग को साम्प्रदायिक बताते हैं हम…… लेकिन भोग को Secular हीं पाते हैं हम Status और पैसों को हमेशा…… ईमान पर भारी पाते हैं हम तभी तो……..ऐसे वैसे नहीं Pure भ्रष्टाचारी हैं हम !

 

 

हर साल बड़े-बड़े वादों के साथ आते हैं ये  (Hindi Hasya Kavita) : 
हर साल बड़े-बड़े वादों के साथ आते हैं ये, हर साल यू ही निराश कर चले जाते हैं ये ! हर बार एक ही बात कह जाते हैं ये, हर वक्त यही सुनाते हैं ये, कि बदल कर रख देंगे इस समाज को हमारे लिए , हर वक्त यही दावे करते रहते हैं ये! इनकी बातों में आकर हम अपनी राह से भटक जाते हैं, इनको अपना बहुमत देकर, बाद में पछताते हैं! इनके चक्कर में रहकर तो हम झूठ और धोखे ही पाते हैं, जब कभी होता है हमें इनके झूठ का एहसास , तो हम निराश होकर अपने सच्चाई से बने घरौंदो मे लौट आते हैं! इनकी तो शान झूठी, पहचान झूठी, इनकी तो हर एक बात झूठी, बदल कर रख देंगे हम इन घूसखोरों को, इनकी तो सरकार झूठी!

 

Back Bencher (Hindi Hasya Kavita) : 
ये गाना कॉलेज टाइम में अपने Back Bencher साथियों के लिए लिखा था जिसे आज यहाँ प्रकाशित कर रहा हूँ. सबको तो नहीं कह सकता पर कुछ लोग को ये जरुर पसंद आएगी 🙂
देर से उठते हम यारों कभी जाते नहीं नहा के ज्यादा जल्दी कम pressure तो निपटेंगे फिर आके एक हाथ में कॉपी दुसरे में break-fast दबा के college गए जैसे-तैसे तो late थे घंटे आधे क्यूंकि we are the back bencherzwe are the back bencherz हमको नहीं है फिकर we are the back bencherz
college देर से जाना Teacher से नजर चुराना आगे सीटें कितनी खाली फिर भी सबसे पीछे जाना
भरी class में भी आराम से हैं सो जाते boring lecture में cell पे करते interesting बातें exams pass करने के method सबको हैं बतलाते बस एक रात में पढ़कर नंबर सबसे ज्यादा लाते
क्यूंकि we are the back bencherzwe are the back bencherz हमको नहीं है फिकर we are the back bencherz
खिड़की से बहार झांक यार जरा उसको miss call मार यार लड़कियों को जम के ताड़ यार दिख जाये कोई मॉल यार
canteen के महफ़िल को हम ही रंगीन बनाते कमेन्ट मारने से हम यारों कभी नहीं कतराते girls, pair या faculty हो सबकी वाट लगाते तभी बात करने में हमसे बड़े-बड़े घबराते
क्यूंकि we are the back bencherzwe are the back bencherz हमको नहीं है फिकर we are the back bencherz

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झगड़िये भाय (Hasya Kavita in Hindi) : 
झगड़िये भाय कुत्ते ज्यों मारे झपट जूठे के लिए भायत्यों हीं आप भी झगड़िये सत्ता के लिए भाय झगड़-झगड़ कर लीजिए सत्ता कभी चलाय जब बहुमत को खोइए फिर से कीजिए लड़ाई दल को सदा मिलाइए काम सिद्ध हो जाए राम राज्य के नाम पर धोखा दीजिए भाय धोखा सदा हीं दीजिए काम सिद्ध हो जाए गुटबाजी के जरिए फिर सत्ता को पलटाय सदा-सदा हीं झगड़िये सत्ता के लिए भाय

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धूम धड़क्काधूम (Hasya Kavita in Hindi) :

धूम धड़क्का धूम धड़क्का सचिन का चौका सचिन का छक्का रह गए सारे हक्का बक्का चौका छक्का धूम धड़क्का

 

जैसे अभी कल ही तो मिले थे Hindi Hasya Kavita

जैसे अभी कल ही तो मिले थे, समां था कितना प्यारा ,लगा के सीने से अपने ,किसी ने किया था अभिषेक हमारा,
थे साथ नवेंदु कई मगर,ना सर पे माँ का आँचल था,पर रवि प्रतीक उन दीपक से,मॅन का हर कोना उज्जवल था,
रुला के हसन हँसा के रुलाना,टूट जाए तो फिर उनका धीरज बंधना,अमित खुशियों से नाचे मयूर मेरे मॅन के,याद कर के उनका हमें कैंटीन ले जाना,
कैसे भूलूंगा वो Exams की टेंशन आदित्य मयंक के साथ पढना-पढाना, पीयूष बोली सदा दिल में अंकित रहेगी,गुज़र जाये भले कॉलेज का जमाना,
हरफनमौला अदाओं से जीता जिन्होंने हर दिल को, कैसे रुक्सत का पायेंगे ,इन शाक्सियत के बैसिल को,
मस्ती के पलों में जब भी कोई युगल सुर से सुर मिलाएंगे, हमें तो हमेशा कॉलेज केफणीन्द्र और मंजू ही याद आयेंगे
साथ बाटी हैं हमनें खुशियाँ अपनी सारी,वक़्त राकेश या निशांत लवनीत का हो,किसी का कहाँ कोई डर है रहता,जब आशीष स्वयम अजय चक्रेश का हो,
तमन्ना हमारी बस इतनी है तुमसे,ना तोड़ना कभी आपसी प्रेम के धागे, आज लगता है मुश्किल तुम्हे छोड़ पाना,पर मंजिल तुम्हारी है सूरज से आगे,

 

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वोलीबाल की गेंदे, वो क्रिकेट का बल्ला, कट जाए जो लाईट तो टोपी पे हल्ला, रात की तनहाइयों में वो आपस की बातें, साथ बैठ के बनाना वो धुवें का छल्ला,
12 बजे रात में बर्थडे की लातें, फिर लगा के सीने से देना सौगातें,
खोखे पे बैठ के वो चौपाल लगाना, Juniors को जबरदस्ती के Funde पिलाना, फिर अचानक ही कही से थी आवाज आती,“पलट दो!-पलट दो! वर्ना पराठा जल जायेगा मामा…”
गर्ल्स हॉस्टल पर हर रात का ग्रुप-Discussion दिवाली-होली पर करना वो चन्दा collection;वो जाडो की रातों में श्री राम की चाय,जुली किसकी है ?? – करना इसपे compromisation,
हर पल में अपनी कहानी छुपी है,मस्ती के दिन हो या DEC 31 की रातें,याद आएगा वो बिता हुआ हर वो लम्हा,याद करेंगे जब भी हम अपने कॉलेज की बातें

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फोर्थ इयर में आ के जिदगी हो गई जंजाल है, मेरे बिन गर्ल-फ्रेंड के यारों का, हो गया बुरा हाल है, आपने साथ वालियों को देख देख के ऐसे बोर हुए अब तो इनको हर faculty लगती केवल माल है.
कुछ की तो बिमारी अब हो गयी परमानेंट है,  शादी-शुदा से ही इनका जुड़ जाता सेंटीमेंट है ,तुम्हे लड़कियां नहीं मिलती क्या ? पूछने पे जवाब देते हैं,   “क्या करें यार अपना टेस्ट ही डीफेरेंट है” |

 

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बुरा मान जाएँगे सुन लेना, देख लेना, कर लेना बर्दाश्त बोलना नही कुछ भी वो बुरा मान जाएँगे। वो बड़े हैं, तुम छोटे हो यही बात बहुत है और कुछ पूछना नही वो बुरा मान जाएँगे। सरकार निकम्मी है फिर से वोट न देनाचुप रहो नेता जी हैं वो बुरा मान जाएँगे। बड़ा शोख है वो लड़का उसे जाने को कहो बाबू साहब का है बेटा वो बुरा मान जाएँगे।अरे देखो उनको कर रहे मन्दिरों का अपमान रोको मत, धर्म के हैं ठेकेदार बुरा मान जाएँगे। कहीं से भी सही नही है उनकी नसीहत चुपचाप मान लो नही तो बुरा मान जाएँगे।कितना ढीठ है, जिद्दी है मां ये मेहमान मत बोलो, घर के हैं दामाद बुरा मान जाएँगे।सूरत है लंगूर की औ ख्वाहिशें हूर की कहो नही कुछ रसुख वाले हैं, बुरा मान जाएँगे।

 

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जमाने के सितम ने कर दिया बहुत बुरा हाल है, इंजीनियरिंग कॉलेज में जूली का ये चौथा साल है,
यूँ तो क्लास में टीचर एंट्री देते नहीं इसे,पर २-३ क्लास करके जूली ने मचाया काफी बवाल है,
कहाँ साल भर प्रिप्रेशन करने के बाद लड़के एडमिशन लेने आते हैं,और फिर रहने के लिए हॉस्टल का एक ट्रीपल सीटर रूम पाते हैं,
पर जूली तो बचपन से ही हॉस्टल में अपनी मनमानी चलायी है,किसी ट्रिपल सीटर में दिन तो सिंगल सीटर में रातें बिताई है,
वार्डेन महीनों में कभी चेक करे ये बड़ी बात हैं,पर जूली कमरों में झांकती हर रात हैं,
दरवाजा बंद है तो अगले पे जाती है, गर खुला मिल जाये तो बिस्तर पे आराम फरमाती है,
इतना ही नहीं जूली ने और भी कई गुल खिलाये हैं, चंगु-मंगू नाम के दो बच्चे अपने गुलशन में उगाये हैं,
पर आजकल जूली घूमती तन्हा अकेली है, उसके बच्चो का पिता कौन है ये अबुझ पहेली है,
हमारे पड़ोस वाले गुप्ता जी नशे में मस्त रहते हैं, इनकी बक-बक से पूरे हॉस्टलवासी त्रस्त रहते हैं,
उस रात जूली उनके कमरे में सोई थी, अपने टाइगर के खयालो में जाने कहाँ खोई थी,
इतने में गुप्ता जी नशे में अन्दर आये, और जूली की बाहों में बिस्तर पर रात बिताये,
सुबह जब आँखे खुली तो गलती का एहसास था, तन्हाई के सिवा अब कुछ नहीं जूली के पास था,
तब से वो पतला कुत्ता टाइगर भी साथ नहीं रहता है, वो भी ज़माने की तरह जूली को बेवफा कहता है,
“अरे माफ़ कीजीयेगा…. जूली का परिचय देना तो भूल गया”
यूँ तो AKGEC के ब्वायेस हॉस्टल में इसे किसी परिचय की जरुरत नहीं,पर जूली नाम की ये आवारा कुतिया जरा भी खूबसूरत नहीं ,
पर जूली का हॉस्टल से प्यार देखते हे बनता है, साल में कई मौको पे इसका का बैर्थ-डे मानता है,
दर-असल जब भी जूली किसी का बर्थ-डे के खा जाती है , तो बर्थडे बॉय की बर्थडे बमप्स में लातें भी पाती है,
अरे एक बार तो मेरे आँखों के सामने हे पूरा हंगामा खडा था, गलती से जूली छत पे बंद क्या हुई सारा होस्टल ताले पे जुटा पड़ा था,
थोडी देर में ताला टुटा तो लोगो की जान में जान आई , ये बात और है की थोडी हे देर में जूली फिर कई लातें खाई ,
जूली नाक में दम कर देती है अच्छे-अच्छो की, कहानी पे यकीं कर लो कसम तुम्हे जुली के बच्चो की ,

 

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ज़रा चख के देखो ज़रा चख के देखो ये है बड़ी मज़ेदार ये है मज़े की नगर नगर में शहर शहर में देखों आगे पीछे चढता दाम सब चीज़ों का हम गिरते हैं नीचे… जरा चख के देखो नये नगर में बजता हैं इक नये किसम का बाजा अब तो राजा गधा बनेगा गधा बनेगा राजा नसीब अपना टूटा फूटा नसीब अपना खोटा ज़मींदार का कु…जरा चख के देखो

 

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second year में आके एक दिन झा जी निकले घूमने, ऊँची-ऊँची बिल्डिंग देख लगे चक्कर खा के झूमने|
ऐसी ही एक ऊँची बिल्डिंग को देख रहे थे गौर से, पास आकर एक आदमी ने माँगा किराया 4 रुपये पर फ्लोर के|
बताया ये दिल्ली है हर मंजिल देखने का किराया है, 12 रुपये दिए झा ने, कहा बस तीसरा flore ही नजर आया है|
दिल्ली घूम के रूम पे पहुंचे room partner  को कथा सुनाये, कहा देख रहा था तेरहवी आज रुपये चालीस बचाए|
room partner ने हाथ जोड़कर दिल से बोला “मान गए यार, आप जैसे बूधिमान को तो मिलना चाहिए पुरस्कार”|
ऐसी कहानी सुनकर कोई भी अपनी हसी नहीं रोक पाया, अगले दिन कॉलेज मैं यही किस्सा रहा छाया|

 

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एक कवि-सम्मेलन में’ नेता जी’ मुख्य अतिथि के रूप में आये हुए थे,परन्तु गुस्से के कारण अपना मुँह फुलाये हुए थे । उपस्थित अधिकांश कवि नेताओं के विरोध में कविता सुना रहे थे, इसलिए, नेता जी को बिल्कुल भी नहीं भा रहे थे । जब उनके भाषण का नम्बर आया तो उन्होंने यूँ फ़रमाया-
इस देश में बिहारी और भूषण की परम्परा का कविन जाने कहाँ खो गया है, अब तो सत्ता की आलोचना करना ही कवियों का काम हो गया है ।
मैंने कहा- श्रद्धेय, श्रीमान जी, हम आज भी करते हैं आपका पूरा-पूरा सम्मान जी, लेकिन राजनीति में अपराधियों की बढ़ती हुई संख्या एक ही कहानी कह रही है, ईमानदारों की संख्या तो आज कल मुश्किल से दो प्रतिशत ही रह रही है । जब आप इस प्रतिशत कोउ ल्टा करके दिखायेंगे, तो हम भी एक बार फिर से भूषण और बिहारी की परम्परा को निभाएंगे ।
आपके सम्मान में गीत गाएंगे, गीतों में आपका अभिनन्दन करेंगे

 

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1)
मायूसी भरे होते हैं हालात, आसुओं से बरसते हैं जज्बात, किसी और से बिछड़ के भी शायद न रोते, पर कैसे हसें जब प्याज काटे हैं ये हाथ  |
2)
जीवन के हर मोड़ पर बस तुने ही साथ निभाया है, तुने ही हर रोज़ पलकों पर एक नया ख्वाब सजाया है, पर अब कुछ दिन के लिए माफ़ करो हे निद्रा देवी,अब exam बिल्कुल सर पे आया है|

 

(Hasya Kavita in Hindi) :
घो घो घो घोड़ा लकड़ी का घोड़ा चाबुक न कोड़ा जब इसको मोड़ा भागा ये घोड़ा भागा ये घोड़ा लकड़ी का घोड़ा घो घो घो घोड़ा।

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बंदगी के सिवा ना हमें कुछ गंवारा हुआ आदमी ही सदा आदमी का सहारा हुआ
बिक रहे है सभी क्या इमां क्या मुहब्बत यहाँ किसे अपना कहे, रब तलक ना हमारा हुआ
अब हवा में नमी भी दिखाने लगी है असर क्या किसी आँख के भीगने का इशारा हुआ
आ गए बेखुदी में कहाँ हम नही जान तेरह गई प्यास आधी नदी नीर खारा हुआ
शाख सारी हरी हो गई ,फूल खिलने लगेयूँ लगा प्यार उनको किसी से दुबारा हुआ

 

निर्बाध बहता (Hasya Kavita in Hindi) :
अविरल झरना खुशी का भरसक फैले होंठ खिली बत्तीसी आँखों से झरती, गिरती, ढुलती उन चेहरों की वो हँसी कहाँ से आती है? कड़ी धूप, उमसती गर्मी सिर पर थैला, उमगते कदमों से गली, मोहल्ला, हाट बाजार लाल जलेबी, भजिए खाते सज-सँवरकर धूप को धूल चटाते अल्ह़ड़ उन चेहरों की वो हँसी कहाँ से आती है

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हौसले मिटते नहीं अरमाँ बिखर जाने के बाद मंजिलें मिलती है कब तूफां से डर जाने के बाद कौन समझेगा कभी उस तैरने वाले का ग़मडूब जाये जो समंदर पार कर जाने के बाद आग से जो खेलते हैं वे समझते है कहाँ बस्तियाँ फिर से नहीं बसतीं उजड़ जाने के बाद आशियाने को न जाने लग गई किसकी नज़र फिर नहीं आया परिंदा लौटकर जाने के बाद ज़ल ज़ले सब कुछ मिटा जाते हैं पल भर में मगर ज़ख्म मिटते है कहाँ सदियाँ गुज़र जाने के बाद आज तक कोई समझ पाया न यह राज़े-हयात आदमी आखिर कहाँ जाता है मर जाने के बाद प्यार से जितनी भी कट जाए वही है ज़िंदगी याद कब करती है दुनिया कूच कर जाने के बाद

 

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गोपाल के गालगोलम गोल लालम लालरंग सुनहरा आंखें सुंदर घुंघराले से उसके बाल छोटा सा वो नटखट भोला करता कितने कई कमाल कभी फोड़ वो मटकी देताकभी हाथ ले बंसी लेता चोरी माखन की भी करता रोज़ मचाता कई धमाल प्यारा फिर भी मीत सभी काडरता जो वो उसकी ढाल गोलम गोल लालम लाल गोपाल के गाल

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