History of Taj Mahal in Hindi | ताजमहल का इतिहास

History of Taj Mahal in Hindi | ताजमहल का इतिहास

History of Taj Mahal in Hindi : ताजमहल एक ऐसी इमारत, एक ऐसा मकबरा जिसने पुरे विश्व में अपनी खूबसूरती से हर किसी का मन मोह रखा हैं. आज के इस लेख में आप इसके इतिहास के पन्नो की गहराई में इस कदर खो जाएंगे की आपको इसके बनने से लेकर इसकी अब तक के पुरे सफ़र में खुद को साथ चलता पाएंगे. चलिए शुरुवात करते हैं इसके परिचय से.

History of Taj Mahal in Hindi

ताजमहल का परिचय :

History of Taj Mahal in Hindi : ताजमहल भारत का सबसे मशहूर स्मारक हैं यहाँ हम आपको उन भव्य किलो और शानदार महल के बारे में बताएंगे जिनके कारण ताज महल बन सका परन्तु उससे पहले हम आपको बता दे की ये एक अद्भुत निशानी हैं जो शाहजहाँ ने अपनी बीवी मुमताज़ महल के लिए बनवाई थी शाहजहाँ के इस स्मारक के बारे में कई कहानिया गडी गयी हैं जिन में काले ताज की कहानी अभी तक सबसे मशहूर हैं

History of Taj Mahal in Hindi : शाहजहाँ असल में यमुना नदी के ही दूसरी तरफ एक और काला ताज बनवाना चाहते थे. 5 सदियों बाद अद्भुत रिसर्च इस्तेमाल कर के इमारतों और बागीचो का एक नेटवर्क बनाया जाएगा जो पहले से भी ज्यादा शानदार होगा एक ऐसे दुनिया जो शाहजहाँ को भी नसीब नहीं हुई थी लेकिन जो आज भी लोगो को चकाचौंध कर सके ये ताजमहल की खोयी हुई दुनिया हैं

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ताजमहल के निर्माण से पहले :

History of Taj Mahal in Hindi
History of Taj Mahal in Hindi : भारत सन 1631 – मुगुल बादशाह शाहजहाँ अपनी बेगम मुमताज़ महल की मौत का मातम मना रहे थे उनका दिल सिर्फ अर्कीटेकचर की दुनिया में लगता था और उनका परफेक्शन के लिए जूनून आजीवन बरक़रार रहा.

History of Taj Mahal in Hindi : शांत यमुना नदी के एकांत तट पर उन्होंने शानदार मकबरे ताजमहल की नीव डाली. बीती तीन सदियों में उनकी प्रजा ने ऐसा साम्राज्य बनाया जो लगभग पुरे भारत में फैला हुआ हैं हालांकि वो खुद मुसलमान थे लेकिन उनकी प्रजा हिन्दू थी और उन्होंने अपनी तमाम दौलत अपने इस ख्वाब को पूरा करने में लगा दी जिन हिन्दू कारीगरों पर वो राज़ करते थे वो पत्थर तराशने के हुनर के लिए मशहूर थे वो कुछ अनोखा बना रहे थे उस योजना का पैमाना इतना विशाल था की जमीन पर पूरा शहर उभर आया उसमे निर्माण के 20 साल तक 20 हजार मजदुर रहते थे.
History of Taj Mahal in Hindi : आज ताज की कीमत 20,000 करोड़ डॉलर से ज्यादा ही होगी लेकिन ताजमहल का एक ही उपयोग था एक बेगम की कब्र इसकी सबसे ज्यादा विशेषता हैं इसका पत्थर, इसकी उंचाई इसकी चौड़ाई और गहराई के बराबर हैं. 20 मंजिला इमारत जितनी बड़ी तकरीबन 115 फुट की. ये अमर प्रेम की निशानी हैं लेकिन ये बेलगाम चाहत का सबूत भी हैं. एक शख्स का अहम. इस स्मारक का ऊँचा ओहदा ये बात छिपा लेता हैं की ताज के कई असली निर्माण और बागीचो को वक़्त ने निगल लिया हैं.

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हम आपको उस दुनिया की खोज के बारे में बताएंगे जिसने ताज महल को जन्म दिया :

History of Taj Mahal in Hindi
History of Taj Mahal in Hindi : ये समझना आसन हैं की लोग 20,000 लोग ताजमहल देखने क्यों आते हैं जब आप इसके दरवाज़े से गुजरते हैं तो इसका एहसास अलग हैं इसका साइज़ जबरदस्त हैं.

History of Taj Mahal in Hindi : आज के समय में ये दुनिया का सबसे अच्छे तरीके से संरक्षित और सबसे सुंदर मकबरा हैं. सही मायनो में देखा जाए तो इस बात में काफी दम हैं की ताज असल में सिर्फ एक मकबरा हैं. ताजमहल एक नए तरीके के आर्किटेकचर और इंजीनियरिंग का शिखर हैं जो शाहजहाँ के राज़ में विकसित हुआ था. आज का समय ये जानने को उत्सुक हैं की इसमें कौन से औज़ार और तकनीके इस्तेमाल हुई थी और इसमें भारत की पत्थर चिनाई की परंपरा का क्या हाथ था. जब इसे पोस्टकार्ड पर देखते हैं तो ये बहुत ही छोटा और नाजुक लगता हैं लेकिन सामने से देखने में इसका स्वरुप बहुत सुंदर हैं
History of Taj Mahal in Hindi : शाहजहाँ का ख्वाब एक से ज्यादा महल बनवाने का था. आज भी ये जगह 46 फूटबालो के मैदानों से बड़ी हैं लेकिन उस समय में ये और भी बड़ी रही होगी.
आपको लगता होगा ताजमहल हरे भरे बागीचो के बीच में हैं लेकिन असल में और बिल्डिंग्स ताजमहल से जुडी थी ये एक किला बंद लगता हैं जिस बाहरी दरवाज़े से अंदर आने का रास्ता हैं वो लगभग 30 फुट मोटी हैं और बहुत ही जबरदस्त हैं. आज ताजमहल की तस्वीरे एक ही जगह से ली जाती हैं और वो ही इसकी पहचान बन गयी हैं लेकिन ताजमहल के भीतर कई कलानुमा इमारते हैं जो अलग अलग सभ्यताओं का मेल दर्शाती हैं. ये मुगुल राजवंश का नमूना हैं. कई दशको से इसकी अचूक सिमेटरी और चमक ने लोगो को चकाचौंध कर दिया हैं और उनके पीछे एक दिलचस्प बात छुपी हैं.

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ताजमहल के दिलचस्प राज़ :

History of Taj Mahal in Hindi
History of Taj Mahal in Hindi : हजारो टूरिस्ट जो यहाँ आते हैं वो असल में ये नहीं जानते की वो जो देख रहे हैं वो महल का पिछला हिस्सा हैं दरअसल शाही दरवाज़ा उत्तर में हैं नदी के किनारे. मुगुल काल में नदी ही मुख्या रास्ता थी जो सारी शाही मुगुल इमारतों को जोडती थी और आज ज्यादातर टूरिस्ट ताज को वैसे नहीं देख पाते जैसा की मुगुल बादशाह ने चाहा था शाहजहाँ और उनके शाही मेहमान तट पर बने चबूतरे से आते थे जिसे बढती नदी ने बहुत पहले ही नष्ट कर दिया.

History of Taj Mahal in Hindi : वो दरअसल नाव पर सवार हो कर आते थे जैसे कोई हाईवे हो यही वजह हैं की इसके आगे की हिस्से में इसे सुंदर नक्काशी से सजाया गया हैं. ये जो जडाऊ काम हैं इसे शाहजहाँ ने चालाकी से छिपवाया था क्युकी ये सिर्फ शाही आँखों के लिए था. उनका ख्वाब पूरा करने के लिए सामने की जगह बेहद अहम था.

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ताजमहल को बनवाते वक़्त परेशानियां :

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History of Taj Mahal in Hindi : लेकिन नदी किनारे कुछ भी बनाना शाही इंजिनियरो के लिए काफी कठिन था. सरकती और रेतीली जमीन पर नीव खड़ी करना आसान नहीं था उन्हें खोदने के बाद वो तुरंत फिर से भर जाती थी. इंजिनियरो को यहाँ एक भव्य महल खड़ा करना था इसलिए उन्हें एक उपाय निकालना पड़ा. मजदूरो ने ठोस जमीन तक गहरे खड्डे और और कुंवे खोदे और उनमे कंकड़ भर दिए. ये नीव आज की जमीन से 15 – 20 फुट गहरी हैं लेकिन अगर उस समय के हिसाब से देखे तो नीव काफी गहरी बनाई गयी थी और इसकी खुदाई ऐसे की गई थी जैसे धरती में अक्सर कुवे बनाते वक़्त की जाती हैं पर उसमे पत्थर, गारा, लोहा भरा गया था एक तरह से ज्यादा तगड़ा, मजबूत और सहनशील बनाने के लिए. आज के समय में ताजमहल साबुत नहीं दीखता, संगमरमर फीका हो गया हैं, इधर – उधर खाली जगह खो पत्थर की याद दिलाती हैं ये साल भर प्रदुषण और लाखो टूरिस्ट के चहल – पहल के असर हैं.

History of Taj Mahal in Hindi : कभी – कभी तो एक दिन में 30,000 लोग यहाँ आते हैं इसलिए ताजमहल के संरक्षण का काम अपने आप में काफी भारी हैं. देखने से भला ही ऐसा लगता हैं लेकिन ताजमहल संगमरमर के ठोस पत्थर से नहीं बना हैं. उसे सादी ईंट से बनाया गया हैं और उस पर संगमरमर और सैंडस्टोन लगाया गया हैं. सैंडस्टोन के ब्लोक कटने के बाद उन्हें नकाशी और जडाऊ काम से
सजाया जाता हैं.

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आज के समय में ताजमहल का संरक्षण :

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History of Taj Mahal in Hindi : आज के समय में जितने भी कारीगर वहाँ पर काम करते हैं उनमे से तो कई ऐसे हैं जिनकी कई पीढ़िया ताजमहल के निर्माण में काम कर चुकी हैं. कारीगर आज के समय में बारीक फूलो के डिजाईन बनाते हैं और उन्हें अच्छी फिनिशिंग भी देते हैं दरअसल उन पत्थरों को मेन गेट वाली दीवार पर लगया जाता हैं जो अंदर हैं क्युकी पुराना पत्थर समय और मौसम के साथ भुर – भूरा गया हैं तो संरक्षण का एक हिस्सा हैं पत्थर पर बने पैटर्न को दर्ज करना और उसकी हुबहू नक़ल बनाना ये देखने में महीन लगता हैं कला का एक अच्छा नमूना हैं लेकिन इन्हें मामूली औजारों से बनाया गया हैं जो बहुत ही प्राचीन तरीका हैं और आधुनिक सुधार के नाम पर साधारण छेनी हैं जिसकी नोक पर सख्त स्टील हैं बस. बारीकियो पर गज़ब का ध्यान दिया गया हैं. संगमरमर को जड़ने के लिए पारंपरिक तौर से काटा जाता हैं इसमें बहुत कारीगरी हैं इसमें धनुष की तरह दिखने वाली आरी हैं जो बहुत ही पतले तरीके से पत्थर को काट रही हैं बहुत ही बारीक काम को किया जाता हैं. संगमरमर को काटने की सरल तरकीब से काटा जाता हैं इसमें रेट, पानी और पतली डोरी इस्तेमाल होती हैं, कंप्यूटर का यहाँ कोई काम नहीं होता हर एक हिस्से को बड़ी मेहनत स हाथो से बनाया जाता हैं.

History of Taj Mahal in Hindi : यहाँ जो गारा इस्तेमाल होता हैं वो भी 300 साल पुरानी विधि से बनता हैं. लेबोरेटरी की जांच से पता चला की ताजमहल को बनाने के लिया गारा आते, शिरे, निम्बू और शेयर की धुल से बना था साथ ही साथ इसमें फलो का रस भी शामिल था. 350 वर्ष बीतने पर भी शाहजहाँ की विरासत मजबूत हैं. उस वक़्त और अब भी कारीगर उनकी शान को बरकरार रखने के लिए मेहनत कर रहे हैं. लेकिन इसे बनाने में और लोगो का भी हाथ हैं.

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ताजमहल बनवाने के लिए दूसरी इमारतो से प्रेरणा लेना :

History of Taj Mahal in Hindi
History of Taj Mahal in Hindi : शाहजहाँ और उनका ताज दुसरे राजाओं और इमारतों के वशज़ हैं. ताजमहल के काम शुरू होने के 50 साल पहले शाहजहाँ के दादाजी अकबर द ग्रेट ने लाल सैंडस्टोन से एक विशाल दुर्द बनाया था. ताजमहल अर्किटेकचर का दिलचस्प नमूना हैं और इसकी अमर प्रेमकहानी जिसने इसे जन्म दिया बहुत मशहूर हैं ये मुगुल बादशाह शाहजहाँ ने अपनी प्यारी बेगम मुमताज़ महल की याद में बनवाया था.

History of Taj Mahal in Hindi : ताजमहल सिर्फ एक इंसान के गम का नतीजा नहीं हैं ये दो विरोधी सभ्यताओं के संगम से पैदा हुआ हैं हिन्दू और मुसलमान और इन दो शैलियों का संगम शुरू हुआ शाहजहाँ के दादा अकबर द ग्रेट से. मुगुल सल्तनत में उन्होंने सबसे ज्यादा निर्माण किये थे. अकबर ने अपना साम्राज्य महलों और किलो से भर दिया अपनी प्रजा को चका- चौंध करने के लिए और अपने राज़ की शान बढाने के लिए.

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फतेहपुर सीकरी से ताजमहल बनवाने का प्रभाव :

History of Taj Mahal in Hindi
History of Taj Mahal in Hindi : अगर आप ताजमहल से दक्षिण – पश्चिम की दिशा में 32 किलोमीटर दूर जाएंगे तो आपको वहाँ पर अकबर की शानदार रचना फतेहपुर सीकरी मिलेगी वहाँ उस दुर्ग की बनावट बिलकुल नयी और दूरदर्शी थी इसका काफी असर ताजमहल की बनावट पर भी पड़ा. फतेहपुर सीकरी का लाल सैंडस्टोन समय के साथ बिलकुल नहीं बदला सन 1569 और सन 1585 के बीच में बनाया गया फ़तेहपुर सीकरी सादे 4 सदियों से शांत पड़ा हैं दरअसल सबसे ख़ास बात यह हैं की आपको यहाँ पर जीवन के बहुत सारे सुराग नहीं मिलेंगे. ये बहुत ही साफ़ सुथरी साइड हैं यहाँ ना ज्यादा मलबा हैं आप देखेंगे और इन सबसे ये अंदाज़ा नहीं लगता की कोई यहाँ जरा से भी वक़्त के लिए ठहरा हो. सिर्फ 16 साल के बाद अपर्याप्त पानी की सुविधा यहाँ की आबादी का पोषण नहीं करती और इसे छोड़ दिया गया, अगर आप आस – पास की बिल्डिंग्स देखे तो ये बहुत विशाल और खाली मालुम होती हैं. फतेहपुर सीकरी धंदे और व्यापार का केंद्र था दुनिया भर से व्यापारी यहाँ अपना सामान बेचने आते थे. यहाँ सोने, मसालों और बढ़िया सिल्क का व्यापार होता था. दुर्ग के बाहर बड़ी दीवारों से सुरक्षित और साफ़ सुथरी दुकानों की एक कतार मुख्या मार्ग के किनारे लगती थी. सबसे महंगी चीज़े एक विशेष द्वार पर बिकती थी जहां एक बड़ा सैंडस्टोन का दरवाज़ा था. ये कल्पना करना काफी मुश्किल हैं की ये जगह अपने चरम पर कैसी दिखती होगी. राज्य के अलग अलग कोने से व्यापारी आते होंगे. फतेहपुर सीकरी की दुकानों से खूब दौलत गुज़रती थी ये एक फलता – फूलता व्यापार केंद्र था जिसकी पहुच यूरोप और ओटोमन साम्राज्य तक भी थी. अकबर ने अपने आर्किटेक की प्रेरणा उन डेरो से ली जिनके यहाँ भी बंजारे हा करते थे और अकबर की इस शानदार रचना का गहरा असर हुआ शाहजहाँ पर. उन्होंने ने भी अपने किलो और महलों पर लाल सैंडस्टोन इस्तेमाल किया. भारत में पत्थर तराशने की परंपरा दुनिया में सबसे कुशल मानी जाती हैं.

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10 सदी के भारत में पत्थर पर कारीगरी :

History of Taj Mahal in Hindi
History of Taj Mahal in Hindi : भारत में 10 वी सदी से पहले ही पत्थर के कारीगरों ने भव्य मंदिर बनवाए थे जिन्हें भगवान्, अप्सराओं और जानवरों की असल मूर्तियों से सजाया गया था.
जब अकबर ने फ़तेहपुर सीकरी की नीव डाली तब उन्हें लोकल भारतीय कारीगरों के काम का पूरा अंदाजा था. कारीगर अपनी कला आगे की पीढियों को सिखा जाते थे और आज वही कुशलता उसे संजोए रखने के काम आ रही हैं क्युकी ये तरीका नही बदला. यहाँ अकबर के कारीगरों ने जबरदस्त महल बनवाए जिन्हें सुंदर नक्काशी और जडाऊ काम से सजाया इनमे से एक बीरबल का महल बादशाह के जनानखाने की औरतो के लिए बना था जिसमे वहाँ 5000 औरते रहती थी जिसमे 200 उनकी बीविया उनमे से भी कई तो अपने जीते – जी उनसे मिली ही नहीं थी तो समझ लीजिये कई बहुत सुंदर लेकिन बहुत उब चुकी लडकिया सोने के पिंजरे में कैद रहती थी. अकबर का जन्नाखाना उनके साम्राज्य के मुताबिक़ बढ़ता रहा. हर नयी जीत के साथ पराजित रहीस अपनी सबसे सुंदर बेटियाँ उन्हें तोहफे में दे देते थे लेकिन इन सब से ज्यादा उन्हें अपने राज्य में दिलचस्पी थी. दीवाने ख़ास भारत की किसी भी इमारत से हट कर हैं. इसके बीच में थ्रोने पिल्ल्लर नाम का अद्भुत नकाशिदार स्तम्भ खड़ा हैं जिसके उप्पर एक गोलाकार चबूतरा खड़ा हैं उससे चार रास्ते बाहर निकलते हैं. वो अपने सिंहासन पर बैठ कर अपने प्रजा के प्रतिनिधियों से सलाह मशवरा करते थे. उन मशवरो के जरिये उन्होंने भारत की सभ्यता को जोड़ने की सोची. ये खम्बा उनकी इस सोच का प्रतिक हैं क्युकी इसमें हिन्दू और इस्लाम दोनों धर्मो से चीज़े ली गयी हैं. फ़तेहपुर सीकरी ने जो प्रेरणा दी वही उसका सबसे बड़ा योगदान था. उसने भारत को एक आर्किटेकचर और संस्कृति के मिलाप से एक ऐसा सपना दिखाया जिसमे दोनों मजहबो का मेल मिलाप हो गया. अकबर ने लोकल कारीगरों की कला काम में लगाई जब की ये उनके अपने काम से अलग थी. ये मेल जोल उनका सपना पूरा करने के लिए अहम था.

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लाल किले से ताजमहल बनवाने का प्रभाव :

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History of Taj Mahal in Hindi : अगर आप ताजमहल से पश्चिम की दिशा में जाएगे तो यहाँ से 52 किलोमीटर दूर आपको लाल किला दिखेगा जो यमुना नदी के मोड़ पर बनाया गया हैं इसे अकबर ने बनाया था. मुगुलो में सबसे महान राज्य बनाने वाला शख्स. सन 1526 से 1858 तक मुगुल शासको ने अपने राज्य की सीमा बढाई और पुरे राज्य में अपनी सल्तनत फैला दी. मुगुल सुरक्षा के लिए भी किले बनाने में निपुण थे. उनकी विरासत आज भी दिखाई देती हैं भारत में बिछे भूमि और किलो में. आगरा का लाल किला उनके सबसे ताकतवर निर्माणों में से एक हैं ये नाम उसके चारो तरफ खड़ी 110 फुट ऊँची लाल सैंडस्टोन से पड़ा. ये किला 200 साल मुग़ल सल्तनत का प्रशसन का केंद्र बना रहा. नज़र पर छा जाने वाला किला लोगो को याद दिलाता था की आखिर ताकत किसके पास हैं. ये चटानो की कड़ी जैसा हैं जिन पर चढ़ना नामुमकिन हैं. देखने में लगता हैं की ये ठोस पत्थर की बनी हैं लेकिन असल में ये ताजमहल जैसी हैं जहां पत्थरों के अंदर दीवार ईंट की बनी हैं इसका मतलब ये कम मजबूत नहीं हैं लेकिन सोचने की बात ये हैं की ठोस पत्थर पर आक्रमण करने की बात जरुर कोई पागल ही सोचेगा. अकबर का यही इरादा था की दीवारे अटूट बन जाए. बराबर अंतराल पर दीवारे थी. ऊँची मीनारों से सुरक्षा और बढती थी. 16 वी सदी की शुरुवात में शाहजहाँ जिन्होंने बाद में ताजमहल बनवाया इस किले के वारिस हो जाते हैं और इसे बदल डालते हैं. उनका राज़ मुगुल सल्तनत की बसंत जैसा था एक शांत अरसा जिसमे खुशहाली और स्थिरता थी. उनका हुकुम सबसे ऊँचा था, उनके राज्य में लड़ाई नहीं होती थी. ये जबरदस्त शानो – शौकत का अरसा था जब लोग अपने महान शासक को सबसे बड़ा निर्माण करते हुवे देख रहे थे. अपने दादाजी से मिली विरासत की इमारतो से शाहजहाँ संतुष्ट नहीं थे. उन्होंने आगरा के लाल किले में बड़े बड़े हिस्सों में सुधार किया. उन्होंने उसे सुरक्षित गड से कानून में संरक्षित महल में बदल दिया उन्होंने सफ़ेद संगमरमर में अपनी छाप छोड़ी. इससे अंदाज़ा लगाया जा सकता था की वो क्या करने वाले हैं. लाल सैंडस्टोन को हटा कर सफेद संगमरमर से सजावट की गयी. जहाँ अकबर के निर्माणों में अनेकता को अपनाया था वही शाहजहाँ के निर्माण ने एक नयी तकरीब को जन्म दिया. उनके निर्माण में हिन्दू और मुसलमान परंपरा अलग नहीं हैं बल्कि दोनों के मिलने से कुछ बिलकुल अनोखा पैदा हो गया. इसमें ये दो संस्कृतियों का संगम हैं. उसकी दीवारों में हिन्दू और इस्लामिक डिजाईन भरपूर हैं जैसे की रेखाओं से बनी चीज़ जिसके ऊपर हिन्दू आर्च हैं ख़ास बात ये भी हैं की ये इमारते कैसी दीखती हैं उस पर दिन की इमारतों का भी काफी असर पड़ता हैं. इसके डिजाईन में एक मजेदार उर्जा हैं और सैंडस्टोन के बनावट बहुत खूब हैं ये मांस जैसा मुलायम, गुलाबी लगता हैं और फिर ये गहरा लाल हो जाता हैं और सूर्यास्त के वक़्त ये फिर से गुलाबी हो जाता हैं तो ये बिल्डिंग लगातार बदलती ही रहती हैं. प्राकृतिक तत्वों के प्रयोग से इमारतो की दिखावट को सँवारने का ख्याल ताजमहल पर पुरे जोर शोर से इस्तेमाल हुआ हैं.

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शाहजहाँ की जीवनशैली :

History of Taj Mahal in Hindi
History of Taj Mahal in Hindi : आगरा फोर्ट हमेशा से एक सेना की छावनी से ज्यादा रहा हैं और इन दीवारों के अन्दर शाहजहाँ मुगुल दरबार की शराब और शबाब वाली जीवनशैली में डूबते चले गए वो अपने जवाहरातो और कपड़ो की पसंद के लिए जाने जाते थे और दर्जी और जोहरियो कि एक टोली उनकी सेवा किया करती थी उनके जन्नाखाने में कई 100 वैश्य और दासियाँ रहती थी और दर्जनों बीवियां भी थी. इस शानोशौकत का शिखर था मुसामिन बुर्ज़ पैलेस जो उन्होंने अपनी पसंदीदा पत्नी मुमताज़ महल के लिए बनवाया था. उनके मरने पर उन्हें ताज महल में रखा गया लेकिन जीते जी वो इस पैलेस में ही रहती थी

मुसामिन बुर्ज़ पैलेस पर शाहजहाँ के प्रयोग :

History of Taj Mahal in Hindi
History of Taj Mahal in Hindi : शाहजहाँ ने यही पर उस शैली के साथ प्रयोग किये जो ताजमहल के पूरा होने पर अपने चरम पर पहुँच गयी थी. ये पैलेस भी एक अद्भुत निशानी हैं प्यार की जो शाहजहाँ ने अपनी बेगम मुमताज़ के लिए बनाई थी. देखा जाए तो उन्होंने गर्म हिन्दुस्तानी मैदानों में एक पत्थर का बागीचा खड़ा कर दिया था. खूबसूरती बढ़ाने के लिए शाहजहाँ राज्य और उसके बाहर से भी राय लेते थे उन्होंने यूरोप के कारीगरों को अपने दरबार के कारीगरों को अपने कीमती पत्थर जड़ने के नए नए तरीके सिखाने के लिए बुलवाया जैसे की इटालियन तरीका पेत्रदुरा, रंग बिरंगे कोरल, लपेल, दुरय्स और दुसरे पत्थरों से कई तरह के फूल बनते थे नतीजतन इतनी सफाई से महल की दीवारों पर बहता हुआ नज़र आता था की लगता था मानो की ये चित्रकारी हैं पत्थर का काम नहीं जबकि उसमे हर तरह के बेशकीमती पत्थर लगे होते थे.
मुगुल शायरी और कुरान में फूलो के विषय में कहा जाता हैं की ये जन्नत के पानी से उभरते हैं. सफ़ेद संगमरमर में जड़े फूलो के डिजाईन इस्लाम के मुरीदो से वादा किये गए इनाम का प्रतिक हैं. आज ये महल ताजमहल के सारे नज़रो में सबसे खूबसूरत नज़ारा पेश करता हैं और नसीब का फेर ऐसा हैं की शाहजहाँ ने अपना यहाँ अपने बेटे का बंदी बन के गुज़ारा और यही से अपनी महान रचना को निहारते हुवे दम तोड़ दिया. शाहजहाँ ने आगरा फोर्ट पर काम ताजमहल से 20 साल पहले किया था लेकिन ये बात एक दम सटीक हैं की यहाँ की चित्रकारी ही ताजमहल की कारीगरी के लिए प्रेरणास्रोत थी. लाल सैंडस्टोन को चमकते सफ़ेद  संगमरमर ने हटा दिया जिसमे बेहद जडाऊ काम था. यहाँ किये गए प्रयोग इतिहास की सबसे दंग कर देने वाली इमारत को बनाने में इस्तेमाल हुवे. अब तक आपको ताजमहल के विकास के बारे में अच्छे से समझ मिल चुकी होगी जिसमे खोये शहर और किले उजागर हुवे जिसने इसके निर्माण का रास्ता बनाया. बादशाह शाहजहाँ का ताजमहल मुगुल आर्किटेकचर का मास्टरपीस हैं और दुनिया की सबसे मशहूर इमारत. आज भी मुगुल सल्तनत से जुडी दौलत और ताकत
हमे इसमें नज़र आती हैं.

मुगुल शब्द :

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History of Taj Mahal in Hindi : हम मुगुल शब्द को हॉलीवुड मुगुल या रियल एस्टेट मुगुल कहने के लिए इस्तेमाल करते हैं लेकिन ये शब्द मुगुल शाहजहाँ के शासन से आया हैं. वो मुगुल वंश का हिस्सा थे उन्होंने ताकत और दौलत में एक नया मुकाम हासिल किया था जो आज भी लोग पाने की कोशिश करते हैं इसिलिय वो मुगुल कहलाते हैं लेकिन ये शब्द शाहजहाँ के समय से आया हैं.
अब हम आपको बताएंगे की बादशाह शाहजहाँ के समय में ये बेजोड़ इमारत कैसी लगती होगी, ये एक बड़ी चुनौती हैं क्युकी ताजमहल के कई असली स्ट्रक्चर बढ़ते हुवे शहर और नदी जैसे प्राकृतिक तत्वों ने नष्ट कर दिए. अब हमे इस ईमारत में छिपे कई सारे इस्लाम के चिन्हो को भी समझना होगा. सारे मुगुल बादशाहों की ही तरह शाहजहाँ भी मुसलमान थे इसीलिए सजावट की बारीकियो में धार्मिक अहमियत भरी हैं.

चलिए हम शुरुवात करते हैं मुख्या द्वार से. यहाँ आप पाएंगे की कुरान में लिखे गए अल्लाह का वादा वो कुछ बोने की बात हो या पानी के इस्तेमाल की चारो और लिखे गए हैं. ये द्वार उस दरवाज़े का प्रतिक हैं जिससे गुज़र कर मुहम्मद अनत में चले गए थे और ये शब्द ताजमहल के दोनों दृश्य दिखाते हैं की ये मकबरा भी हैं और जन्नत के बागो की नुमाईंदगी भी. जन्नत के बाग़ आमतौर पर चिन्हों से भरे होते थे चाहे वो कुछ बोने की बात हो या पानी के इस्तेमाल की जैसे की बोने की बात करे तो बहुत सारे फूल होते थे क्युकी इस्लामी सभ्यता में ये दिव्य दायरे के चिन्ह थे. मुगुल रगिस्तान के लोग थे जिन्हें चिलचिलाती धुप और सुखी जमीन की आदत थी. हवा से पनाह और पानी का बढ़िया प्रबंधन, एक बागीचे का नखलिस्तान ये उनका ज़मीन पर जन्नत का ख्याल था. अब हम तस्वीर बना सकते हैं की बाग़ कैसा दीखता होगा.
शाहजहाँ के समय में ये नक्लिस्तान यानी ओएसिस जैसा दीखता होगा. ऐसा लगता होगा मानो ताजमहल फलो के पेड़ो के ऊपर तैर रहा होगा.

अब सोचने वाली बात ये हैं की ये हरे भरे जन्नत के बाग़ भारत की तपती जमीं पर कैसे उग पाए :

History of Taj Mahal in Hindi
History of Taj Mahal in Hindi : उसके अगल बगल में नालो का निर्माण करवाया था जिससे की नदी से पानी आता था. यहाँ पर एक पुली सिस्टम था जहा पर छेद थे जो खम्बो और पहियों को संभालते थे जो ऊपर की तरफ को खीच लिया जाता था. ये प्रबंध पानी को नदी से बाल्टियो में खिचता था उन्हें 40 फुट ऊपर एक पानी की नहर तक बैल से चलने वाली एक चरखी के जरिये खीचा जाता था. वहां से पानी एक कुंद तक बह जाता था फीर एक और बड़ी टंकी में ऊपर चढ़ाया जाता था. इस सिचाई व्यवस्था की वजह से रोज़ हज़ारो गैलन पानी यहाँ आता था, बहुत सालो तक इसने एक सुंदर बागीचे का ओएसिस भारत की चिलचिलाती धुप में भी बनाए रखा.
ये बड़ी मुसीबत का काम था. दो ऊपर रखे प्रबंधो का सारा पानी इतनी उच्चाई तक उठाया जाना वैसे इतनी उचाई की जरुरत इसलिए थी क्युकी मुख्या बगीचों के सारी नालियों में पानी पहुचाना था तो इसका अर्थ ये हैं की पम्प का इस्तेमाल करने के बजाए हम ग्रेविटी से अपना काम निकलवा रहे हैं यानी की पानी पाइप से निचे बहकर फवारो से ऊपर बहता था. ताजमहल अपने साफ़ सुथरे लॉन और अपने सजीली सीमेट्री के साथ शांति का एक चित्र लगता हैं लेकिन इन दीवारों से कुछ दुरी पर ही एक अलग दुनिया हैं. पुरानी दुकानों और सस्ती सरायो से भरा हुआ ये इलाका कहलाता हैं ताजगंज. बहुत से टूरिस्ट ये नहीं जानते हैं की ये पतली गलियाँ ताजमहल के इलाके का जरुरी हिस्सा हुआ करती थी जिसे कारवा सराए कहते थे. कारवा सराए सफ़र करते हुवे व्यपारियो के ठहरने और उनके माल को रखने की सुरक्षित जगह थी ये जगह व्यापार का केंद्र थी. शाहजहाँ चाहते थे की लोग ताजमहल को देखे. वो चाहते थे की लोग उससे प्रभावित हो. इस महल को बनाते वक़्त शाहजहाँ मकबरे से कुछ ज्यादा बना रहे थे. ताज का परिसर शहर के परिसर के अन्दर एक शहर था. इन सडको की उथल पुथल में भी हमे कारवा सराए के सुराग मिल जाते हैं. गलियों और गलियारों से आप अगर गुजारेंगे तो आप को कुछ अस्थायी दुकाने मिलेंगी जिसमे कभी व्यापार की हलचल रहा करती थी. अब आप समझ गए होंगे की ताजमहल एक विशाल परिसर था कई समृद्ध निशानियाँ समेटे जिसका कारवा सराए के व्यापारी समर्थन करते थे.

काले ताज की कहानी :

History of Taj Mahal in Hindi
History of Taj Mahal in Hindi : दुनिया की सबसे मशहूर इमारत होने के कारण ताजमहल को लेकर कई सारी कहानियाँ हैं उन में से काले ताज की कहानी आज भी सबसे ज्यादा दिलचस्प हैं तो कहानी ये हैं की शाहजहाँ एक और ताज यमुना नदी के दुसरे किनारे बनाना चाहते थे जो ताजमहल के ठीक सामने होता. जो कहावत आज भी टूर गाइड सुनाते हैं वो ये हैं की मुगुल बादशाह शाहजहाँ काले संगमरमर का ताज के सामने ही नदी के उत्तरी छोर पर बनाना चाहते थे टूर गाइड कहते हैं की शाहजहाँ के बेटे ने उसका काला ताज का रूप बनाने से पहले ही अपने पिता का तख्ता पलट दिया. कई लोगो ने ये दावा भी किया हैं की उन्हें काले संगमरमर के टुकड़े मिले जो शायद काले ताज की अधूरी नीव हो सकते हैं लेकिन उन हजारो टूरिस्ट को जो ताज के खेमो से देखते हैं तो बंजर धरती से ज्यादा कुछ नज़र नहीं आता लेकिन कई सारे अर्किलिओजिसट ने 10 साल तक वहाँ पर खोजबीन की हैं तथा खुदाई की हैं और चुकी उन्हें कोई साबुत नहीं मिलता इसलिए वे काले ताज की कहानी को झूठा मानते हैं. अफवाहों की कोई बुनियाद नहीं होती कोई कला पत्थर न ढूंढे जाने के कारण उन्हें पता चला की काले ताज की कहानी मन्घदंड हैं.

मेहताब बाग़ का अधुरा निर्माण :

History of Taj Mahal in Hindi
History of Taj Mahal in Hindi : लेकिन हाँ जांच के दौरान अर्किलिओजिसट को ये जरुर पता चला की इस ताजमहल के इस पार शाहजहाँ कोई निर्माण जरुर करवाना चाहते थे एक और इमारत नहीं बल्कि महताब बाग़ यानी की मूनलाइट गार्डन बनाना चाहते थे. वहाँ पर एक भव्य 8 कोनो वाला फवारा हुआ करता था और बिच में एक विशाल कुंड जिसमे से करीब 25 फवारे निकल आते थे यहाँ दरबार भी लगता था और शाहजहाँ को इस कुंद के लगभग उत्तरी छोर में बने मंडप पर विराजमान रहते होंगे और खुशबूदार फुल तनमन सुगन्धित करते होंगे और ये पहले से ही निश्चित था की शाहजहाँ बाग़ के बेड़े पर से प्रवेश करेंगे. मेहताब बाग़ को इस तरह बनाया जाना था की वो नदी के उस पार ताजमहल के बागीचो की सीध में हो. इस बाग़ के बारे में एक अहम् बात हैं जो इसके अनुभव को ख़ास बना देती हैं और वो ये की ये ताजमहल की ठीक सीध में बना हैं और समांतर में भी ताज के अंदर से होते हुवे तालाब से होते हुवे उत्तर के दरवाज़े के फवारे तक जाता हैं. मेहताब बाग़ हमेशा से ही ताज परिसर की असली योजना का हिस्सा था. शाहजहाँ ने अपना सपना पूरा करने के लिए अपने राज्य की तमाम दौलत और साधना लगा दी उन्होंने प्राकृतिक तत्वों का इस्तेमाल किया जैसे नदी और दिन की बदलती रौशनी. चांदनी में जो कंप्यूटर की बनाई तस्वीर में काला ताज पानी में उभरी हुई रौशनी में नज़र आता हैं. क्या शाहजहाँ का असल में यही इरादा था की एक और महल नहीं बल्कि ताजमहल की गहरी छाया, चांदनी में बनी एक परछाई.
ताजमहल की अलौकिक सुन्दरता के कारण एक तानाशाह राजा दुनिया के सामने अपनी शानो शौकत दिखा रहा था. ये हाल ही में पता चला हैं की ताज परिसर में मकबरा, बगीचा, प्रवेश दरबार तो हैं ही पर ताजगंज और मेहताब बाग़ भी उस शानदार योजना में शामिल थे. और ये योजना ऊतर से दक्षिण तक करीब एक किलोमीटर तक फैली हैं. ये बहुत ही गज़ब का निर्माण हैं. ये साफ़ हैं की शाहजहाँ अपने मेहमानों पर हावी होना चाहते थे, इसका विशाल पैमाना, इसका रोबदार दरवाजा, मकबरे तक लम्बा रास्ता, इसके चार मिनार जो ऐसा खड़े हैं जैसे किसी कीमती नग की रखवाली कर रहे हो और इसकी सुंदर सजावट सभी इस बात को पुख्ता करते हैं की लेकिन इसकी शैली की एकता और इसकी डिजाईन की मेलजोल ही हमारे लिए शाहजहाँ की सबसे बड़ी सफलता हैं. ये सिर्फ एक शख्स के सपने का नतीजा नहीं हैं बल्कि विकसित सभ्यताओं का मेल भी हैं. ताजमहल में शाहजहाँ ने मुगुल अर्कितेकचर को भारत के और पहले के बहुमूल्य इतिहास के साथ मिला दिया. शाहजहाँ के राज्य का तो अंत में पतन हो गया लेकिन ताजमहल आज भी जिंदा हैं और इसे आज भी खूबसूरती की बेमिसाल यादगार माना जाता हैं

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