December 5, 2021

Paach Prashn | पाँच प्रश्न

Paach Prashn | पाँच प्रश्न

Akbar Birbal Stories in Hindi

Paach Prashn | Akbar Birbal Stories in Hindi : एक दिन बादशाह अकबर ने अपने दरबारियों से पाँच प्रश्न पूछे। उनका पहला प्रश्न था “सबसे श्रेष्ठ फूल कौन-सा है?” किसी ने भी तुरन्त जवाब नहीं दिया। कुछ समय बाद एक दरबारी ने कहा ‘गुलाब’ तथा दूसरे ने ‘कमल’ दूसरा प्रश्न था “सबसे श्रेष्ठ दूध किसका होता है?” इस पर सभी दरबारी आपस में बहस करने लगे। कुछ दरबारियों का मत था कि बकरी का दूध सर्वश्रेष्ठ होता है। कुछ कहने लगे कि गाय का दूध अधिक श्रेष्ठ होता है। तीसरा प्रश्न था”मिठास में सर्वश्रेष्ठ क्या होता है?” इसके उत्तर में कुछ दरबारियों ने रसगुल्ला और कुछ ने दूसरी मिठाइयों के नाम लिए। चौथा प्रश्न था “सबसे अच्छा पता कौन-सा होता है?” इसके उत्तर में कुछ ने कहा, तुलसी का तो कुछ ने नीम और केले का पता कहा। पाँचवाँ प्रश्न जो बादशाह ने पूछा वह था “सभी बादशाहों में से सर्वश्रेष्ठ बादशाह कौन है?” इस पर सभी ने जवाब दिया, “बादशाह अकबर।” आखिरी प्रश्न के जवाब पर बादशाह अकबर बहुत प्रसन्न हुए। परंतु उसके बावजूद वह संतुष्ट नहीं हुए। तभी बीरबल दरबार में आ पहुँचे। अकबर ने वही पाँचों प्रश्न बीरबल से पूछे। बीरबल ने अपनी बुद्धि का प्रदर्शन करते हुए सभी प्रश्नों के अलग जवाब दिए। पहले प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा “महाराज, सर्वश्रेष्ठ फूल कपास के पौधे का होता है, जिसके रेशे से बने कपडों से हमारा नग्न शरीर ढका जाता है।” दूसरे प्रश्न के उत्तर में बीरबल ने कहा “महाराज, माँ का दूध सर्वश्रेष्ठ होता है, जो बच्चे के भरण-पोषण का एकमात्र साधन होता है। माँ के दूध से ही बच्चे का समुचित विकास होता है।”

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Paach Prashn

तीसरे प्रश्न के उत्तर में बीरबल ने कहा “महाराज, सबसे अधिक मिठास हमारी जिहवा में होती है। जो भी जिहवा को अच्छा लगता है, वही हमारे लिए मीठा होता है।” चौथे प्रश्न के उत्तर में बीरबल ने बताया “सर्वश्रेष्ठ पता पान का होता है। देवी-देवताओं के पूजा-पाठ में पान का पता ही प्रयोग में लाया जाता है। इसे शुभ लक्षणों वाला माना जाता है। इसीलिए यह मित्र, शत्रु, मेहमान, नाते-रिश्तेदार सभी के समक्ष प्रस्तुत किया जाता है।” बादशाह ने बीरबल से अतिम प्रश्न किया ” सभी बादशाहों में सर्वश्रेष्ठ बादशाह कौन है?”जवाब देते हुए बीरबल ने कहा “राजा इंद्र सर्वश्रेष्ठ राजा हैं। उन्हें ‘वर्षा का देवता’ कहा जाता है। यदि वर्षा न हो, तो फसलें नहीं होंगी। फसलों के न होने से कोई भी जीव जीवित नहीं रह सकता। फसलें हमारे वैभव, धन और सौभाग्य का प्रतीक होती हैं।” बीरबल के इन जवाबों को सुनकर बादशाह अकबर प्रसन्न व संतुष्ट हो गए। उनके साथ ही इन प्रश्नों के जवाब अन्य दरबारियों को भी बहुत पसंद आए।

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