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Poems on Mother in Hindi | प्रेम का सागर माँ

by Hind Patrika

Poems on Mother in Hindi

Poems on Mother in Hindi : खुद चाहे कितनी थकी हो, हमें देखकर अपनी थकान भूल जाती है माँ खुद दिन भर हैं काम करती क्या अपनी परवाह तुझे इतनी भी ना भाती हैं – माँ के अंदर अपनी ममता को लेकर अपने बच्चे को लेकर जितना स्नेह भरा होता हैं वो इस दुनिया के किसी भी स्नेह की तुलना में कुछ भी नहीं हैं. माँ अपने आप में स्नेह का प्रतीक हैं. अपने बच्चे के लिए माँ वो सब कर गुज़रती हैं जो इस संसार में कोई किसी के लिए नहीं कर सकता. माँ माँ ही होती हैं. उनकी जगह कोई और नहीं ले सकता. यहाँ माँ की कविताओं का सुंदर सा संग्रह दिया गया हैं. 🙂

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Poems on Mother in Hindi

 

हमारे हर मर्ज की दवा होती है माँ (Poems on Mother in Hindi)

हमारे हर मर्ज की दवा होती है माँ….
कभी डाँटती है हमें, तो कभी गले लगा लेती है माँ…..
हमारी आँखोँ के आंसू, अपनी आँखोँ मेँ समा लेती है माँ…..
अपने होठोँ की हँसी, हम पर लुटा देती है माँ……
हमारी खुशियोँ मेँ शामिल होकर, अपने गम भुला देती है माँ….
जब भी कभी ठोकर लगे, तो हमें तुरंत याद आती है माँ…..
दुनिया की तपिश में, हमें आँचल की शीतल छाया देती है माँ…..
खुद चाहे कितनी थकी हो, हमें देखकर अपनी थकान भूल जाती है माँ….
प्यार भरे हाथोँ से, हमेशा हमारी थकान मिटाती है माँ…..
बात जब भी हो लजीज खाने की, तो हमें याद आती है माँ……
रिश्तों को खूबसूरती से निभाना सिखाती है माँ…….
लब्जोँ मेँ जिसे बयाँ नहीँ किया जा सके ऐसी होती है माँ…….
भगवान भी जिसकी ममता के आगे झुक जाते हैँ

 

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ममता की सुधियाँ (Poems on Mother in Hindi)

जब कभी शाम के साये मंडराते हैं
मैं दिवाकिरण की आहट को रोक लेती हूँ
और सायास एक बार
उस तुलसी को पूजती हूँ
जिसे रोपा था मेरी माँ ने
नैनीताल जाने से पहले
जब हम इसी आँगन में लौटे थे
तब मैं उस माँ की याद में रो भी न सकी थी
वह माँ जिसके सुमधुर गान फिर कभी सुन न सकी थी
वह माँ जो उसी आँगन में बैठ कर मुझे अल्पना उकेरना सिखा न सकी थी
वह माँ जिसके बनाये व्यंजनों में मेरा भाग केवल नमकीन था
वह माँ जिसके वस्त्रों में सहेजा गया ममत्व
मेरी विरासत न बन
एक परंपरा बन गया था
वह माँ जिसके पुनर्वास के लिए
हमने सहेजे थे कंदील और
हम बैठे थे टिमटिमाते दीपों की छाया में
और बैठे ही रहे थे

 

Poems on Mother in Hindi

प्यारी माँ (Poems on Mother in Hindi)

माँ प्यारी माँ

कोशिश की थी
कविता लिखने की
बरसों पहले
छोटी-सी आयु में

सीख रहा था छंद कोई
पंक्ति बन रही थी
‘माँ, प्यारी माँ’
तेरे ऋण है मुझ पर हज़ार

बढ़ न सका आगे
उलझनों में रह गया
बढ़ रहा हूँ आज
माँ प्यारी माँ

तीरथ करती हो
करते रहना
पुण्य करती हो
करते रहना

छत है तेरे पुण्यों की
करेगी रक्षा हम बच्चों की
माँ प्यारी माँ

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कब्र के आगोश में जब थक के सो जाती है माँ (Poems on Mother in Hindi)

कब्र के आगोश में जब थक के सो जाती है माँ,
तब कहीं जाकर थोड़ा सुकून पाती है माँ,
फिक्र में बच्चों के कुछ ऐसे ही घुल जाती है माँ,
नौजवा होते हुए बूढ़ी नज़र आती है माँ,
कब ज़रूरत हो मेरे बच्चे को इतना सोच कर,
जागती रहती है आँखें और सो जाती है माँ,
रूह के रिश्तों की ये गहराईयाँ तो देखिये,
चोट लगती है हमे और चिल्लाती है माँ,
लौट कर वापस सफर से जब भी घर आती है माँ,
डाल कर बाहें गले में सर को सहलाती है माँ,
शुक्रिया हो नही सकता कभी उसका अदा,
मरते मरते भी दुआ जीने की दे जाती है माँ,
मरते दम बच्चा अगर आ पाये ना परदेस से,
अपनी दोनों पुतलियाँ चौखट पे रख जाती है माँ,
प्यार कहते है किसे और ममता क्या चीज है,
ये तो उन बच्चों से पूछो,के जिनकी मर जाती है माँ।

 

Poems on Mother in Hindi

माँ के नाम (Poems on Mother in Hindi)

बचपन में अच्छी लगे यौवन में नादान।
आती याद उम्र ढ़ले क्या थी माँ कल्यान।।१।।

करना माँ को खुश अगर कहते लोग तमाम।
रौशन अपने काम से करो पिता का नाम।।२।।

विद्या पाई आपने बने महा विद्वान।
माता पहली गुरु है सबकी ही कल्यान।।३।।

कैसे बचपन कट गया बिन चिंता कल्यान।
पर्दे पीछे माँ रही बन मेरा भगवान।।४।।

माता देती सपन है बच्चों को कल्यान।
उनको करता पूर्ण जो बनता वही महान।।५।।

बच्चे से पूछो जरा सबसे अच्छा कौन।
उंगली उठे उधर जिधर माँ बैठी हो मौन।।६।।

माँ कर देती माफ़ है कितने करो गुनाह।
अपने बच्चों के लिए उसका प्रेम अथाह।।७।।

 

माँ मैं फिर जीना चाहता हूँ (Poems on Mother in Hindi)

 

माँ मैं फिर जीना चाहता हूँ, तुम्हारा प्यारा बच्चा बनकर
माँ मैं फिर सोना चाहता हूँ, तुम्हारी लोरी सुनकर
माँ मैं फिर दुनिया की तपिश का सामना करना चाहता हूँ, तुम्हारे आँचल की छाया पाकर
माँ मैं फिर अपनी सारी चिंताएँ भूल जाना चाहता हूँ, तुम्हारी गोद में सिर रखकर
माँ मैं फिर अपनी भूख मिटाना चाहता हूँ, तुम्हारे हाथों की बनी सूखी रोटी खाकर
माँ मैं फिर चलना चाहता हूँ, तुम्हारी ऊँगली पकड़ कर
माँ मैं फिर जगना चाहता हूँ, तुम्हारे कदमों की आहट पाकर
माँ मैं फिर निर्भीक होना चाहता हूँ, तुम्हारा साथ पाकर
माँ मैं फिर सुखी होना चाहता हूँ, तुम्हारी दुआएँ पाकर
माँ मैं फिर अपनी गलतियाँ सुधारना चाहता हूँ, तुम्हारी चपत पाकर
माँ मैं फिर संवरना चाहता हूँ, तुम्हारा स्नेह पाकर
क्योंकि माँ मैंने तुम्हारे बिना खुद को अधूरा पाया है.
मैंने तुम्हारी कमी महसूस की है .

 

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माँ (Poems on Mother in Hindi)

चूल्हे की
जलती रोटी सी
तेज आँच में जलती माँ !
भीतर -भीतर
बलके फिर भी
बाहर नहीं उबलती माँ !

धागे -धागे
यादें बुनती ,
खुद को
नई रुई सा धुनती ,
दिन भर
तनी ताँत सी बजती
घर -आँगन में चलती माँ !

सिर पर
रखे हुए पूरा घर
अपनी –
भूख -प्यास से ऊपर ,
घर को
नया जन्म देने में
धीरे -धीरे गलती माँ !

फटी -पुरानी
मैली धोती ,
साँस -साँस में
खुशबू बोती ,
धूप -छाँह में
बनी एक सी
चेहरा नहीं बदलती माँ !

Poems on Mother in Hindi

अम्मा : एक कथा गीत (Poems on Mother in Hindi)

थोड़ी थोड़ी धूप निकलती थोड़ी बदली छाई है
बहुत दिनों पर आज अचानक अम्मा छत पर आई है!

शॉल सरक कर कांधों से उजले पाँवों तक आया है
यादों के आकाश का टुकड़ा फटी दरी पर छाया है
पहले उसको फ़ुर्सत कब थी छत के ऊपर आने की
उसकी पहली चिंता थी घर को जोड़ बनाने की
बहुत दिनों पर धूप का दर्पण देख रही परछाई है!
बहुत दिनों पर आज अचानक अम्मा छत पर आई है!

सिकुड़ी सिमटी उस लड़की को दुनिया की काली कथा मिली
पापा के हिस्से का कर्ज़ मिला सबके हिस्से की व्यथा मिली
बिखरे घर को जोड़ रही थी काल चक्र को मोड़ रही थी
लालटेन-सी जलती-बुझती गहन अंधेरे तोड़ रही थी
सन्नाटे में गूँज रही वह धीमी-सी शहनाई है!
बहुत दिनों पर आज अचानक अम्मा छत पर आई है!

दूर गाँव से आई थी वह दादा कहते बच्ची है
चाचा कहते भाभी मेरी फूलों से भी अच्छी है
दादी को वह हँसती-गाती अनगढ़-सी गुड़िया लगती थी
छोटा मैं था- मुझको तो वह आमों की बगिया लगती थी
जीवन की इस कड़ी धूप में अब भी वह अमराई है!
बहुत दिनों पर आज अचानक अम्मा छत पर आई है!

नींद नहीं थी लेकिन थोड़े छोटे-छोटे सपने थे
हरे किनारे वाली साड़ी गोटे-गोटे सपने थे
रात रात भर चिड़िया जगती पत्ता-पत्ता सेती थी
कभी-कभी आँचल का कोना आँखों पर धर लेती थी
धुंध और कोहरे में डूबी अम्मा एक तराई है!
बहुत दिनों पर आज अचानक अम्मा छत पर आई है!

हँसती थी तो घर में घी के दीए जलते थे
फूल साथ में दामन उसका थामे चलते थे
धीरे धीरे घने बाल वे जाते हुए लगे
दोनों आँखों के नीचे दो काले चाँद उगे
आज चलन से बाहर जैसे अम्मा आना पाई है!

पापा को दरवाज़े तक वह छोड़ लौटती थी
आँखों में कुछ काले बादल जोड़ लौटती थी
गहराती उन रातों में वह जलती रहती थी
पूरे घर में किरन सरीखी चलती रहती थी
जीवन में जो नहीं मिला उन सबकी माँ भरपाई है!
बहुत दिनों पर आज अचानक अम्मा छत पर आई है!

बड़े भागते तीखे दिन वह धीमी शांत बहा करती थी
शायद उसके भीतर दुनिया कोई और रहा करती थी
खूब जतन से सींचा उसने फ़सल फ़सल को खेत खेत को
उसकी आँखें पढ़ लेती थीं नदी नदी को रेत रेत को
अम्मा कोई नाव डूबती बार बार उतराई है!
बहुत दिनों पर आज अचानक अम्मा छत पर आई है!

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Poems on Mother in Hindi

कैसा था नन्हा बचपन वो (Poems on Mother in Hindi)

कैसा था नन्हा बचपन वो
माँ की गोद सुहाती थी ,
देख देख कर बच्चों को वो
फूली नहीं समाती थी।
ज़रा सी ठोकर लग जाती तो
माँ दौड़ी हुई आती थी ,
ज़ख्मों पर जब दवा लगाती
आंसू अपने छुपाती थी।
जब भी कोई ज़िद करते तो
प्यार से वो समझाती थी,
जब जब बच्चे रूठे उससे
माँ उन्हें मनाती थी।
खेल खेलते जब भी कोई
वो भी बच्चा बन जाती थी,
सवाल अगर कोई न आता
टीचर बन के पढ़ाती थी।
सबसे आगे रहें हमेशा
आस सदा ही लगाती थी ,
तारीफ़ अगर कोई भी करता
गर्व से वो इतराती थी।
होते अगर ज़रा उदास हम
दोस्त तुरन्त बन जाती थी ,
हँसते रोते बीता बचपन
माँ ही तो बस साथी थी।
माँ के मन को समझ न पाये
हम बच्चों की नादानी थी ,
जीती थी बच्चों की खातिर
माँ की यही कहानी थी।

Poems on Mother in Hindi

 

अम्मा चली गई (Poems on Mother in Hindi)

पूजा-घर का दीप बुझा है
अम्मा चली गई.

अंत समय के लिए सहेजा
गंगा-जल भी नहीं पिया
इच्छा तो कितनी थी लेकिन
कोई तीरथ नहीं किया
बेटों पर विश्वास बडा था
आखिर छली गई.

लोहे की संदूक खुली
भाभी ने लुगडे छाँट लिये
औ’ सुनार से वजन करा कर
सबने गहने बाँट लिये
फिर उजले संघर्षो पर भी
कालिख मली गई.

रिश्तेदारों की पंचायत
घर की फाँके, चटखारे
उसकी इच्छाओं, हिदायतों
सपनों पर फेरे आरे
देख न पाती बिखरे घर को
अम्मा! भली गई

 

 

Maa Ka Ehsaas (Poems on Mother in Hindi)

Jane kabse soya nahi hu main, sula do maa,
Aakar mere pas muje fir se loriya suna do maa,

Ansoo meri ankho mein jam se gaye hain,
Bhar ke dil mera mujhe ab rulaa do maa,

Bhuka hu main tere pyar bhare niwale ka,
Apne hatho se ek niwala khila do maa

Kese kese dard deke duniya rulane lagi h muje
Aanchal me leke muje inse nijah dila do maa

Koi nai h mera ye ehsaas dilane lagi h duniya
Thamkar hath apne hone ka ehsas dila do maa

 

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