प्रवाल पिष्ठी: परिचय

Praval Pishti: प्रवाल, सामान्यतः मूंगा के नाम से जाना जाता है. प्रवाल पिष्ठी का निर्माण इसी प्रवाल के द्वारा होता है. प्रवाल, समुद्र में पाई जाने वाली एक चट्टान होती है, जिसका निर्माण बहुत ही छोटे-छोटे जीवों के द्वारा किया जाता है. इस चट्टान का मुख्यतः कैल्शियम कार्बोनेट से बनी होती है. प्रवाल पिष्ठी अपने औषधीय गुणों के कारण हमेशा ही आयुर्वेदिक चिकित्सा में प्रमुख रूप से उपयोग की जाती रही है. प्रवाल पिष्ठी न केवल शरीर को शक्ति प्रदान करता है, बल्कि इसके साथ ही यह शरीर मे पनप रहे कई रोगों, और बीमारियों को दूर करने की क्षमता भी रखता है.

प्रवाल पिष्ठी का निर्माण कैसे किया जाता है?

Praval Pishti: प्रवाल पिष्ठी, कैल्शियम युक्त चट्टानों से बनती है. पर इन कैल्शियम की चट्टानों से बनाया गया पाउडर खाने योग्य नही होता है. इनमे तरह-तरह की विशुद्धियाँ समाई रहती है. इसलिए इन विशुद्धियों को दूर करने के लिए और इसे खाने योग्य बनाने के लिए के पहले इसे शुद्ध किया जाता है. इसके लिए इसमे गुलाबजल मिलाकर इसे संधारित करते है. इसके बाद इसी गुलाब जल मिले कैल्शिम के चूर्ण को बहुत ही महीन चूर्ण में खरल करते है. यदि गुलाब जलयुक्त कैल्शियम बक पॉउडर ही प्रवाल पिष्ठी के नाम से जाना जाता है.

प्रवाल पिष्ठी सेवन के फायदे.

  • प्रवाल पिष्ठी का मुख्य घटक कैल्शियम होता है. इसलिए यदि किसी के शरीर मे कैल्शियम की कमी है, तो वह इसका सेवन कर सकता है.
  • प्रवाल पिष्ठी के सेवन से पेशाब संबंधी परेशानियां दूर होती है.
  • प्रवाल पिष्ठी, आंखों में होने वाली कई बीमारियों को दूर करने के लिए किया जा सकता है.
  • प्रवाल पिष्ठी का सेवन लीवर के लिए भी बहुत फायदेमंद साबित होता है. लीवर से जुड़ी कई बीमारियों में इसका सेवन किया जा सकता है.
  • यदि किसी के पेट मे एसिड से जुड़ी हुई कोई समस्या रहती है, या किसी का पित्त बढ़ गया हो तो वह प्रवाल पिष्ठी के सेवन से इस समस्या का इलाज कर सकता है.
  • दिमाग से जुड़ी हुई कि समस्याओं को दूर करने में प्रवाल पिष्ठी का सेवन किया जा सकता है. इसके अलावा यदि कोई बजी कमजोर याददाश्त की समस्या से जूझ रहा है, तो वह प्रवाल पिष्ठी का सेवन मेधावती के साथ कर सकता है. इससे याददाश्त अच्छी रहती है.
  • प्रवाल पिष्ठी का सेवन गठिया जैसे रोग को ठीक करने के लिए किया ज सकता है.
  • जिन लोगो को हड्डियों से जुड़ी हुई कोई भी समस्या हो, जिनकी हड्डियां कमजोर हो वह प्रवाल पिष्ठी का सेवन इसे ठीक करने के लिए कर सकता है.
  • अक्सर ऐसा होता है, की किसी भी बीमारी की चपेट में ज्यादा दिनों तक रहने से शरीर में कमजोरी महसूस होने लगती है. लेकिन इस कमजोरी को प्रवाल पिष्ठी के सेवन से दूर किया जा सकता है.
  • पीरियड्स के दौरान होने वाले दर्द, खूनी बवासीर, अल्सर, तनाव, चिंता, दिल की धड़कन का अचानक बढ़ जाना, इन सब समस्याओं के इलाज के लिए प्रवाल पिष्ठी का सेवन किया जा सकता है.
  • यह शरीर में शीतलता लाता है. प्रवाल पिष्ठी की प्रवृत्ति शीतल होती है. इसलिए यदि किसी का बुखार के कारण बहुत तापमान बढ़ गया हो तो वह इसका सेवन कर सकता है. इसका प्रभाव सीधे मस्तिष्क पर पड़ता है, जो मस्तिष्क की ऊष्मा को शीतल करता है.

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प्रवाल पिष्ठी का सेवन कैसे करे?

Praval Pishti: कहते है कि जरूरत से ज्यादा किसी भी चीज का सेवन जहर के समान फल देता है. प्रवाल पिष्ठी के सेवन में बजी यही बात लागू होती है. यह एक फायदेमंद औषधि है, लेकिन यदि इसके मात्रा का ध्यान नही रखा गया, तो यह नुकसान भी कर सकती है.

प्रवाल पिष्ठी का सेवन दिन में 2 या 3 बार किया जा सकता है. लेकिन इसकी मात्रा कभी भी 2 ग्राम से ज्यादा नही होना चाहिए. एक सामान्य व्यक्ति 500 मिग्रा से 1 ग्राम तक इसका सेवन कर सकता है. इसका सेवन हल्के गर्म दूध के साथ करना फायदेमंद होता है.

प्रवाल पिष्ठी का संग्रहण कैसे करे?

  • प्रवाल पिष्ठी को कभी भी सीधे सूर्य रोशनी में न रखे. इसे गर्मी से बचाएं. साथ ही इसे बहुत ठंडे वातावरण में रखना बजी उचित नही माना जाता है. इसलिए इसे कमरे के ताप वाली जगह पर रखे. इसके अलावा इसे ऐसी जगह पर रखे जहां से यह बच्चो और पालतू जानवरों के पहुँच से दूर हो. यदि कभी गलती से कोई बच्चा इसका सेवन कर लेता है, तो बिल्कुल भी विलंब न करे, और तुरंत चिकित्सालय ले जाएं.

इसके अलावा कभी भी दवाई को नाली या बहते हुए जल या खुले वातावरण में न फेके. यह पर्यावरण के साथ ही जानवरो के लिए भी नुकसान दायक साबित हो सकता है.

यदि प्रवाल पिष्ठी का अधिक सेवन कर लिया तो क्या करे.

Praval Pishti: प्रवाल पिष्ठी को खरीदते समय विक्रेता से इसके सेवन संबंधी परामर्श जरूर ले. जितनी मात्रा सेवन के लिए बोली जाएं, उतनी मात्रा का ही सेवन करे. यदि कभी उस मात्रा से ज्यादा का सेवन कर लिया तो, जल्द से जल्द नजदीकी अस्पताल में जा कर खुद को दिखाएं. इसका अधिक मात्रा में किया गया सेवन प्रतिकूल प्रभाव दिखा सकता है.

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प्रवाल पिष्ठी के सेवन के दौरान ध्यान रखने वाली प्रमुख सावधानियां:-

  • प्रवाल पिष्ठी, कैल्शियम का प्रमुख स्रोत होता है. इसलिए इसके सेवन से कभी कभी शरीर मे कैल्शियम की मात्रा बढ़ जाती है. जो कि एक बुरा संकेत होता है.
  • प्रवाल पिष्ठी, कुछ औषधियों के साथ प्रतिक्रिया करके शरीर मे विपरीत प्रभाव दिखाता है. इसलिए जब भी प्रवाल पिष्ठी का सेवन प्रारम्भ करें, उसके पहले चिकित्सक से यह परामर्श जरूर ले, की किस औषधि के साथ मिलकर यह शरीर में प्रतिकूल प्रभाव दिख सकती है.
  • जो स्त्री माँ बनने वाली है, या जो गर्भावस्था में है, वो भी इसका सेवन कर सकती है. लेकिन इसका सेवन चिकित्सक के परामर्श के बाद ही करे.
  • कभी भी निश्चित मात्रा से ज्यादा से सेवन न करें.
  • इसके सेवन के तुरंत बाद वाहन चलाने से बचना चाहिए.क्योंकि इसके सेवन से नींद आने लगती है, कभी कभी चक्कर, रक्तचाप और सिरदर्द जैसा अनुभव हो सकता है. इसलिए ऐसी परिस्थिति में वाहन चलाना नुकसानदेह हो सकता है.

इस बात में कोई संदेह नही है कि प्रवाल पिष्ठी एक बहुत ही कारगर औषधि है. लेकिन इसका भरपूर फायदा तभी उठाया जा सकता है, जब इसका सेवन सावधानी पूर्वक किया जाएं.

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Hind Patrika

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