Home हँसी मजाक Short Hasya Kavita in Hindi | हास्य कविताए जो आपको गुदगुदाए और खूब हँसाए

Short Hasya Kavita in Hindi | हास्य कविताए जो आपको गुदगुदाए और खूब हँसाए

by Hind Patrika

Short Hasya Kavita in Hindi | हास्य कविताए जो आपको गुदगुदाए और खूब हँसाए

Short Hasya Kavita in Hindi : आज हम आपके लिए सुंदर सी कविताओ का संग्रह लेकर आये हैं. यूँ तो आप ने अपने पूरे जीवन में तरह तरह की कवितायेँ पढ़ी होंगी परन्तु हमारी कोशिश ये हैं की सबसे अधिक हँसाने वाली कविताओं से आपका मनोरंजन किया जाए. पहले हम यहाँ पर आपको एक आम इंसान और ईश्वर के प्रति वार्तालाप दिखाएंगे जिसे पढ़ कर आपको अवश्य अपने भीतर अंतर महसूस होगा. एक बार एक भक्त ने भगवान् से कहा की भगवान् आप हमे इतना हंसाते हैं मगर स्वयं कभी क्यूँ नहीं हँसते.

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Short Hasya Kavita in Hindi
Short Hasya Kavita in Hindi : भगवान् : भई मैं एकांत में हँसता हूँ इधर तुम्हे देखता हूँ तो रोना आता हैं. आदमी की हालत इतनी बुरी हैं की हंसू तो कैसे हंसु. आदमी बड़ी दयनीय अवस्था में हैं बड़ी आंतरिक पीड़ा में हैं, कैसे जिंदा हैं ये भी आश्चर्य की बात हैं इसीलिए तुम्हे तो हंसा देता हूँ. लेकिन खुद नहीं हंस पाता हूँ. एकांत में हंस लेता हूँ जब तुम नहीं होते, जब तुम्हारी याद बिलकुल भूल जाती हैं, तुम्हारे चेहरे नहीं दिखाई पड़ते, तुम्हारी पीड़ा, तुम्हारा दुःख विस्मृत हो जाता हैं तब हंस लेता हूँ लेकिन तुम्हारे सामने हँसना असंभव हैं. जिनकी साँसों में कभी गंध ना फूलो की बसी, सुख कलियों पर जिन्होंने सदा फब्ती ही कसी, जिनकी पलकों के चमन में कभी कोई तितली ना फँसी, जिनके होंठो पर कभी आये ना भूले से हंसी ऐसे मन्हुसो को जी भर के हंसा लू तो हंसू. अभी हँसता हूँ जरा मन बने तो हंसू. बेखुदी में अगर पंख लगा कर ना उड़े, होश में जब कभी महकती हुई जुल्फों से ना जुड़े, देख कर काली घटाओ को हमेशा जो कोड़े, कभी महखाने की तरफ ना कदम ना जिनके मुड़े. उन गुनेह्गारो को जरा दो घुट पीला के हंसू तो हंसू, अभी जरा मन बने तो हंसू.

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Short Hasya Kavita in Hindi

Short Hasya Kavita in Hindi : जन्म लेते ही जो अभावो की चक्की में फंसे, जान बच पाए ना जो बचपन कहते हैं इसे, इनके हाथो ने जवानी में पत्थर ही घिसे, और पीरी ने जो नासूर के मानंद ही जिसे. उन यतीमो को कलेजे से लगा लूँ तो हंसू अभी हँसता हूँ. जरा मन में आने तो दो हंसू. जिनकी हर सुबह सुलगती हुई यादो में कटती और दोपहर सिसकते हुए वादों में कटी, शाम जिनकी झगड़ो फसादों में कटी, रात बस खुदखुशी करने के इरादों में कटी ऐसे कमबख्तो को मरने से बचाऊँ तो हंसू, अभी हँसता हु जरा मन बने तो हंसू. बिना हँसना मुश्किल हैं. मनुष्य को देखकर आंसुओ को रोक लेता हूँ यही काफी हैं, तुम मनुष्यों की दुर्दशा तो देखो. उसके भीतर बसे हुवे नरक को तो देखो और कठनाई बढ़ जाती हैं क्यूंकि उस नरक को बनाने वाला वही हैं. मुल्ला नसरुद्दीन शराब पीकर सड़क से चला जा रहा था पैर फिसल गया और गिर पड़ा कई फ्रैक्चर हो गए. एक आदमी उसे उठा कर पास के मकान तक ले जाने लगा लेकिन वो भी नशा किये हुवे था उसको उठाने के लिए उसको लेकर चलना तो मुश्किल तो था ही उस आदमी का खुद भी चलना मुश्किल था. वो भी गिरा. नसुरुद्दीन की और जो कुछ हड्डियां बची थी तो वो भी टूट गयी दो चार और पियाकड और चले आ रहे थे क्यूंकि ये घटना मधुशाला के बाहर ही हुई होगी उन्होंने कहा ऐसे नहीं भाई कुछ लकडियाँ चाहिए और उस पर कपडा बांधो, और वो उन लकडियो में कपडा बाँध कर मुल्ला को रख कर उसे आधी रात को लेकर शमशान में चले गए.

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Short Hasya Kavita in Hindi : वो कपडा फटा तो उसमे से गिर कर नसरुद्दीन की जो कुछ हड्डियां बची थी तो वो भी टूट गयी जब दुसरे दिन उसके मित्र उसे देखने गए तो उसकी हालत देखकर बहुत हैरान हो गए. सब पूरा शरीर बंधा पड़ा था. पलस्तर ही पलस्तर. खोपड से लेकर पैरो तक बस जरा आँखे दिखाई पड़ती थी, नाक दिखाई पड़ती थी, मुह दिखाई पड़ता था. उन्होंने पूछा नसुरुद्दीन को की बहुत तकलीफ होती होगी. नसुरुद्दीन ने कहा नहीं! ऐसे तो तकलीफ नहीं होती जब हँसता हूँ तब होती हैं तो उन्होंने पूछा भले मानुष हँसते किस लिए हो इसमें हंसने की क्या बात हैं उसने कहा हंसने की ये बात हैं की मैं पिए हुवे था इसीलिए गिरा मैं मुर्ख और फिर एक दूसरा मुर्ख आ गया वो भी पिए हुवे था इतना भी होश नहीं की पिए हुवे हो और मुझ को उठा कर चलने लगा तो वो गिरा और उसने और मेरी हड्डियां तोड़ दी और फिर चार और मुर्ख आ गए उन्होंने ने तो गज़ब कर दिया, वो कही से कपडा लेकर आये लकड़ी से चारो तरफ उसे बाधा और उसमे मुझे रख कर चल दिए वो कपडा फट गया और वो फट ही जाने वाला था. हँसता हूँ ये देख कर की जिनको अपना होश नहीं वो दुसरो को सहायता दे रहे हैं दुसरो की सेवा कर रहे हैं. अपने आप तो मेरी कुछ ही हड्डियां टूटी थी ये तो दुसरो की सेवा से मेरी और हड्डियां भी टूट गयी ये तो जो दुसरो ने जो मेरी सेवा की उसका फल भोग रहा हूँ. सेवा उन्होंने की, मेवा मैं खा रहा हूँ तो कभी कभी ऐसी स्थति आ जाती हैं जब हंसी आती हैं तो शरीर में थोड़ी हलचल होती हैं तो शरीर में बहुत दर्द होता हैं. आदमी बेहोश हैं पट्टियाँ ही पट्टियाँ बंधी पड़ी हैं सब तरफ बेहोशी हैं. होश का पता ही नहीं हैं, किरण का भी पता नहीं हैं. अन्धकार ही अन्धकार हैं अमावस की रात हैं और तुम मुझसे पूछते हो की मैं हँसता क्यूँ नहीं. जब तुम हंसो तो मैं तुम्हारी हंसी में साथ दूँ लेकिन नहीं दे पाता, तुमको भी क्यूँ हंसा पाता हूँ उसका कारण हैं जब देखता हूँ किसी ने जमाई ली, जब देखता हूँ की कोई झपकी खाने लगा तो सिवाए इसके कोई और उपाय नहीं हैं की कुछ कहूँ की तुम्हे हंसी आ जाए की थोड़ी नींद टूटे की तुम थोडा झपको, तुम थोडा होश में आ जाओ. तुम्हारी नींद तोड़ने के लिए बीच बीच में तुम्हे हंसाता रहता हूँ की तुम कभी सो जाओ. एक आदमी बोल रहा था की एक आदमी सोया ही नहीं घुर्राने भी लगा उस पादरी ने कहा भाई धीरे धीरे क्यूंकि और लोग जो सो रहे हैं कही उनकी नींद ना टूट जाए.

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Short Hasya Kavita in Hindi : अगर मैं तुम्हे हंसाऊ ना तो तुम सब कभी क्या सोचोगे. धार्मिक सभा में लोग सोने का ही काम करते हैं इसलिए मैं अपनी धार्मिक सभा को जितनी अधार्मिक बनाने की कोशिश कर सकता हूँ करता हूँ नहीं तो लोग सो जाए. धर्म तो समझो नींद की एक दवा हैं. डॉक्टर ने जो भेज देते हैं धर्म सभाओ में लोगो को जिनको नींद नहीं आती, कभी ना आए. कोई दिकात नहीं धर्म सभाओ में चले जाओ नींद जरुर आ जाएगी. वही राम की कथा, वही सीता मैया, वही रावण, वही हनुमान जी कब तक सुनोगे सदियाँ हो गयी हैं सुनते सुनते सो, क्या करोगे. सो ही जाओ अब तो अधरम की बात हैं तो ठीक हैं सदाम से शास्त्री किसको रस ही नहीं जीवन ऐसे ही विरस्त हैं और ये धर्म की बाते और विरस्त कर देती हैं. मैं अपनी सभा को धार्मिक सभा नहीं बनने देना चाहता. ये तो महखाना हैं और इसे मैं महखाना ही रखना चाहता हूँ इसीलिए जब तुम बीच बीच में भूल जाते हो तुम्हे याद नहीं रहती तुम समझते हो की धर्म सभा चल रही हैं की धार्मिक प्रवचन चल रहा हैं तब मुझे कुछ न कुछ अधार्मिक करना पड़ता हैं तुम्हे याद दिलाने को की नहीं भैया ये धर्म सभा नहीं हैं तुम गलती से यहाँ आ गए हो अगर धर्म सभा में आए तो ये तो महफ़िल हैं ये मस्तो का जमघट हैं ये झुमने वालो का, पियाक्ड़ो की जमात हैं तो तुम्हे हंसा देता हूँ ताकि तुम सो ना जाओ मगर मैं नहीं हंस सकता उस दिन हंसूंगा जिस दिन देखूंगा की तुम सब जाग गए अब तुम्हे हंसाने की कोई जरुरत नहीं रही. जिस दिन मुझे तुम्हे नहीं हँसाना पड़ेगा उस दिन यहाँ बैठुगा और यहाँ हसूंगा. अभी तो तुम्हारे साथ मेहनत करनी हैं और जगाना हैं किसी को भी जगाना हैं उपद्रव का काम हैं क्यूंकि सोने वाला हर तरह की कोशिश करता हैं की मत मेरी नींद में बाधा डाल देगा, मत मुझे उठा अभी अभी तो नींद लगी, अभी अभी तो सुबह की ठंडी हवा चली हैं और आप जगाने आ गए. मैं तीन बजे रात उठा करता था विश्वविद्यालय में जब पढता था तो जब किसी को ट्रेन पकडनी हो कुछ करना हो वो मुझसे कह देता था, कोई प्रोफेसर, कोई डीन, कोई वाईस चानसलार, की भई उठा देना मुझे. पांच बजे लेकिन मैं तीन ही बजे उठा देता था. वो देखता घडी की अभी तीन ही बजे तो मैंने कहा थोड़ी देर और सो लूँ लेकिन मैं फिर साडे तीन बजे फिर उठा देता था तो वो कहते थे की “तुम सोने दोगे की नहीं पांच बजे मुझे जाना हैं लेकिन थोड़ी देर बाद मैं फिर उठा देता था ऐसे करते करते चार बज गए. वो और जोर देता की तुम पांच बजे ही मत उठाना फिर तो ये खबर फ़ैल गयी की मुझसे भूल कर भी कोई ना कहे. किसी को जाना होता हैं तो यहाँ तक हुआ की कोई सज्जन थे डॉक्टर रसाल हिंदी में वे अच्छे आदमी थे मुझसे एक दिन बोले की कल भैया मुझे पांच बजे मुझे गाडी पकडनी हैं तुम आकर जगाना मत, तुम्हे कही से पता चल जाए, कोई तुमसे कह दे की डॉक्टर रसाल को गाडी पकडनी हैं मैं तुमसे हाथ जोड़ लेता हूँ. जगाना मत, गाडी चुके, चुक जाए मगर तुम तीन बजे से जगाना शुरू कर देते हो.

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Short Hasya Kavita in Hindi

Short Hasya Kavita in Hindi 
मुझे तो ये समझ नहीं आता की लोग जगना ही नहीं चाहते चाहे गाड़ी छुट जाए, चाहे जीवन छुट जाए मगर मैं यहाँ पर रहूँगा आप लोगो को जगाते और हंसाते जो भी फंसा मेरे हाथ उसे जगा के रखूँगा. हिलाऊंगा, डुलानगा, खीचूँगा जो भी बन सकेगा करूँगा, मरूँगा – पिटूँगा जो भी बन सके करूँगा तुम्हारे प्रश्न के उत्तर थोड़ी देता हूँ तुम्हारी पिटाई करता हूँ. अब सोचो मेरे भाई बहेनो पर क्या गुजरी होगी. वो दोबारा तिबारा प्रश्न पूछते हैं, वो मन ही मन में कहते होंगे की हे प्रभु मेरे सब संचय समाप्त हो चुके हैं. अब मुझे कुछ नहीं पूछना हैं अब मैं घर जाता हूँ. सोने का प्रयोग करूँगा. तुम्हारे प्रश्न तो बहाने हैं की मैं तुम्हे झंझोर सकूँ. इसीलिए तो तुमसे कहता हूँ की पूछो, उत्तर देने का थोड़ी सवाल हैं कुटाई पिटाई करने का सवाल हैं. उत्तर थोड़ी ना तुम जानना चाहते हो उत्तर तो तुम पी गए हो सदियों में. उत्तर पीने में तो तुम ऐसे कुशल हो की शास्त्रों को पी जाओ और डकार भी ना लो. आज इतना ही कहकर मैं अपनी वाणी को विराम दूंगा. अगर आपको ये लेख व कविताए अच्छी लगी हो तो comment सेक्शन में जरुर बताइयेगा.

Short Hasya Kavita in Hindi

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(Hasya Kavita in Hindi) :

स्वतंत्र भारत के बेटे और बेटियो ! माताओ और पिताओ आओ, कुछ चमत्कार दिखाओ। नहीं दिखा सकते ? तो हमारी हां में हां ही मिलाओ। हिंदुस्तान, पाकिस्तान अफगानिस्तान मिटा देंगे सबका नामो-निशान बना रहे हैं-नया राष्ट्र ‘मूर्खितान’आज के बुद्धिवादी राष्ट्रीय मगरमच्छों से पीड़ित है प्रजातंत्र, भयभीत है गणतंत्र इनसे सत्ता छीनने के लिए कामयाब होंगे मूर्खमंत्र-मूर्खयंत्र कायम करेंगे मूर्खतंत्र।
हमारे मूर्खिस्तान के राष्ट्रपति होंगे- तानाशाह ढपोलशंख उनके मंत्री (यानी चमचे) होंगे-खट्टासिंह, लट्ठासिंह, खाऊलाल, झपट्टा सिंहर क्षामंत्री-मेजर जनरल मच्छर सिंह राष्ट्रभाषा हिंदी ही रहेगी, लेकिन बोलेंगे अंगरेजी। अक्षरों की टांगें ऊपर होंगी, सिर होगा नीचे, तमाम भाषाएं दौड़ेंगी, हमारे पीछे-पीछे।सिख-संप्रदाय में प्रसिद्ध हैं पांच ‘ककार’-कड़ा, कृपाण, केश, कंघा, कच्छा। हमारे होंगे पांच ‘चकार’-चाकू, चप्पल, चाबुक, चिमटा और चिलम।
इनको देखते ही भाग जाएंगी सब व्याधियां मूर्खतंत्र-दिवस पर दिल खोलकर लुटाएंगे उपाधियां मूर्खरत्न, मूर्खभूषण, मूर्खश्री और मूर्खानंद।
प्रत्येक राष्ट्र का झंडा है एक, हमारे होंगे दो, कीजिए नोट-लंगोट एंड पेटीकोट जो सैनिक हथियार डालकर जीवित आ जाएगा उसे ‘परमूर्ख-चक्र’ प्रदान किया जाएगा। सर्वाधिक बच्चे पैदा करेगा जो जवान उसे उपाधि दी जाएगी ‘संतान-श्वान’और सुनिए श्रीमान-मूर्खिस्तान का राष्ट्रीय पशु होगा गधा, राष्ट्रीय पक्षी उल्लू या कौआ, राष्ट्रीय खेल कबड्डी और कनकौआ। राष्ट्रीय गान मूर्ख-चालीसा, राजधानी के लिए शिकारपुर, वंडरफुल ! राष्ट्रीय दिवस, होली की आग लगी पड़वा।
प्रशासन में बेईमान को प्रोत्साहन दिया जाएगा, ईमानदार सुर्त होते हैं, बेईमान चुस्त होते हैं। वेतन किसी को नहीं मिलेगा, रिश्वत लीजिए, सेवा कीजिए !
‘कीलर कांड’ ने रौशन किया थाइंगलैंड का नाम, करने को ऐसे ही शुभ काम-खूबसूरत अफसर और अफसराओं को छांटा जाएगा अश्लील साहित्य मुफ्त बांटा जाएगा।
पढ़-लिखकर लड़के सीखते हैं छल-छंद, डालते हैं डाका, इसलिए तमाम स्कूल-कालेज बंद कर दिए जाएंगे ‘काका’।उन बिल्डिगों में दी जाएगी ‘हिप्पीवाद’ की तालीम उत्पादन कर से मुक्त होंगे भंग-चरस-शराब-गंजा-अफीम जिस कवि की कविताएं कोई नहीं समझ सकेगा, उसे पांच लाख का ‘अज्ञानपीठ-पुरस्कार मिलेगा। न कोई किसी का दुश्मन होगा न मित्र, नोटों पर चमकेगा उल्लू का चित्र!
नष्ट कर देंगे-धड़ेबंदी गुटबंदी, ईर्ष्यावाद, निंदावाद। मूर्खिस्तान जिंदाबाद!

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Short Hasya Kavita in Hindi : 

फावड़े ने मिट्टी काटने से इंकार कर दिया और बदरपुर पर जा बैठा एक ओर
ऐसे में तसले की मिट्टी ढोना कैसे गवारा होता ? काम छोड़ आ गया फावड़े की बगल में। धुरमुट की क़ंदम ताल…..रुक गई, कुदाल के इशारे पर तत्काल,
झाल ज्यों ही कुढ़ती हुई रोती बड़बड़ाती हुई आ गिरी औंधे मुंहरोड़ी के ऊपर।
आख़िर ये कब तक? कब तक सहेंगे हम? गुस्से में ऐंठी हुई काम छोड़ बैठ गईं गुनिया और वसूली भी ईंटों से पीठ टेक,सिमट आया नापा सूतकन्नी के बराबर।
आख़िर ये कब तक?
-कब तक सहेंगे हम? गारे में गिरी हुई बाल्टी तो वहीं-की-वहीं खड़ी रह गई ठगी-सी।
सब्बलजो बालू में धंसी हुई खड़ी थी कई बार ज़ालिम ठेकेदार से लड़ी थी।
आख़िर ये कब तक?
कब तक सहेंगे हम?
-मामला ये अकेले झाल का नहीं है धुरमुट चाचा! कुदाल का भी है कन्नी का, वसूली का, गुनिया का, सब्बल का और नापासूत का भी है,क्यों धुरमुट चाचा? फवड़े ने ज़रा जोश में कहा।
और ठेक पड़ी हथेलियां कसने लगीं-कसने लगीं कसती गईं- कसती गईं।
एक साथ उठी आसमान में आसमान गूंज गया कांप उठा डरकर।
ठेकेदार भाग लिया टेलीफ़ोन करने।

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Short Hasya Kavita in Hindi : 

ओ मेरी महबूबा, महबूबा-महबूबा तू मन्नै ले डूबी, मैं तन्नै ले डूब्या।
मैं समझ गया तनै हिरणी, फिर पीछा कर लिया तेरा, हाय करड़ाई का फेरा। तू निकली मगर शेरणी, तनै खून पी लिया मेरा। ओ मेरी महबूबा महबूबा तू कर री ही-हू-हा, मैं कर बै-बू-बा।
कदे खेत में, कदे पणघट पै, तनै खूब दिखाये जलवे, गामां में हो गे बलवे। मेरे व्यर्थ में गोडे टूटे, जूतां के घिस गे तलवे। ओर मेरी महबूबा, महबूबा-महबूबा तू मेरे तै ऊबी, मैं तेरे तै ऊब्या।
कोय हो जो तनै पकड़ कै, ब्याह मेरे तै करवा दे, म्हारी जोड़ी तुरत मिला दे। मेरी गुस्सा भरी जवानी, तनै पूरा मजा चखा दे।ओ मेरी महबूबा, महबूबा-महबूबा फिर लुटै तेरी नगरी और लुटै मेरा सूबा। ओ मेरी महबूबा…..।

Short Hasya Kavita in Hindi : 

देखो लड़के बंदर आया। एक मदारी उसको लाया उसका है कुछ ढंग निराला। कानों में पहने है बाला फटे पुराने रंग बिरंगे। कपड़े हैं उसके बेढंगे मुंह डरावना आंखे छोटी। लंबी दुम थोड़ी सी मोटी भौंह कभी है वह मिटाता। आंखों को है कभी नचाता ऐसा कभी किलकिलाता है। मानो अभी काट खाता है दांतों को है कभी दिखाता। कूद फांद है कभी मचाता कभी घुड़कता है मुंह बाकर। सब लोगों को बहुत डराकर कभी छड़ी लेकर है चलता। कभी वह यों ही कभी मचलता है सलाम को हाथ उठाता। पेट लेट कर है दिखलाता ठुमक ठुमक कर कभी नाचता। कभी कभी है टके जांचता देखो बंदर सिखलाने से। कहने सुनने समझाने से बातें बहुत सीख जाता है। कई काम कर दिखलाता है बनों आदमी तुम पढ़ लिखकर। नहीं एक तुम भी हो बंदर

Short Hasya Kavita in Hindi : 

मुन्ना ने आले पर ऊंचे आले पर जब छोटे हाथ नहीं जा पाये खींच खींच कर अपनी छोटी चौकी ले आये।पंजों के बल उस पर चढ़कर एड़ी भी उचकाई। मुन्ना ने आले पर रक्खी शीशी तोड़ गिराई। हाथ पड़ा शीशी पर आधा खींचा उसे पकड़ कर वहीं गिरी वह आले पर से इधर उधर खड़बड़ कर। शीशी तोड़ी कांच बिखेरा सारी दवा बहाई। मुन्ना ने आले पर रक्खी शीशी तोड़ गिराई। पर कहते हैं शुभ होता है भरी दवा गिर जाना रोग स्वयं अच्छा होने का यह भी एक बहाना। मुन्ना की हर शैतानी में होती कुछ अच्छाई। मुन्ना ने आले पर रक्खी शीशी तोड़ गिराई।

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Short Hasya Kavita in Hindi : 

सभा सभा का खेल आज हम खेलेंगे जीजी आओ। मैं गांधी जी छोटे नेहरू तुम सरोजिनी बन जाओ।। मेरा तो सब काम लंगोटी गमछे से चल जायेगा। छोटे भी खद्दर का कुर्ता पेटी से ले आयेगा।। लेकिन जीजी तुम्हें चाहिये एक बहुत बढ़िया सारी। वह तुम मां से ही ले लेना आज सभा होगी भारी।। मोहन लल्ली पुलिस बनेंगे हम भाषण करने वाले। वे लाठिया चलाने वाले हम घायल मरने वाले।। छोटे बोला देखो भैया मैं तो मार न खाऊंगा। कहा बड़े ने छोटे जब तुम नेहरू जी बन जाओगे। गांधी जी की बात मानकर क्या तुम मार न खाओगे।। खेल खेल में छोटे भैया होगी झूठ मूठ की मार। चोट न आयेगी नेहरू जी अब तुम हो जाओ तैयार।। हुई सभा प्रारम्भ कहा गांधी चरखा चलवाओ। नेहरू जी भी बोले भाई खद्दर पहनो पहनाओ उठ कर फिर देवी सरोजिनी धीरे से बोलीं बहनों। हिन्दू मुस्लिम मेल बढ़ाओ सभी शुद्ध खद्दर पहनों।। छोड़ो सभी विदेशी चीजे़ लो देशी सूई तागा। इतने में लौटे काका जी नेहरू सीट छोड़ भागा।। काका आये काका आये चलो सिनेमा जायेंगे। घोरी दीक्षित को देखेंगे केक मिठाई खायेंगे।।जीजी चलो सभा फिर होगी अभी सिनेमा है जाना।। चलो चलें अब जरा देर को घोरी दीक्षित बन जायें।उछलें कूदें शोर मचावें मोटर गाड़ी दौड़ावे।।

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Short Hasya Kavita in Hindi :

आज से बीस साल पहले हमें एक ज्योतिषी ने बतलाया था चालीस पार करते ही तुम पर इश्क़ का भूत सवार होगा और एक ख़ूबसूरत कन्या से तुम्हारा प्यार होगा इक्तालीस में क़दम रखते ही ज्योतिषी का कथन रंग लाया और हमने अपना विचार जब एक दोस्त को बतलाया तो वो हंसा फिर हम पर व्यंग्य कसा’ इस उम्र में इश्क़ फ़रमाओगे सारा विचार धरा रह जाएगा हां जूते खाओगे। ‘हमने पूछा-‘इश्क़ का जूते से क्या सम्बन्ध है? ‘वो बोला-“हर मजनूं की किस्मत लैला की जूती में बन्द है। हमने कहा- आप तो यों कह रहे हैं मानो इस मामले में बड़ा दखल रखते हैं। वो बोला-दखल ही नहीं हम तो जूते खाने का भी बल रखते हैं लैला तो लैला हमने लैला के बाप तक के खाए हैं और निन्यान्वे तक तो यों मुस्कुराए हैं जैसे कोई बात नहीं फिर जूता टूट जाने पर मारने वाले से पूछा है पिताजी! क्या आपके पास लात नहीं? सच पूछो शैल भाई तो इस मामले में हमारे सर के बालों ने बड़ा काम किया है तुम्हारे सर पर तो हैं ही नहीं जूता पड़ते ही, बोलने लगेगा दूसरा ब्रम्हरंध्र खोलने लगेगा तीसरे में समाधी ले लोगे और चौथे में बड़े भैया, बराबर हो लोगे पहली बार पहला जूता हमारे सर पर पड़ते ही हमारी आंखो के सामने तारे नाचने लगे थे और दूसरे में तो हम रामायण बांचने लगे थे तुम्हारे मुंह से तो राम का नाम भी नहीं निकलेगाऔर “राम नाम सत्य” भी कोई दूसरा ही बोलेगा फिर मौका पड़ने पर तो तुम भाग सकते हो न कोई दीवार लांघ सकते हो छिपने पर भी नहीं छिपोगे भीड़ में भी घुस जाओगे तो अलग दिखोगे सच पूछो शैल चतुर्वेदी तो तुम्हारी बॉडी का कंस्ट्रक्शन इश्क़बाजी के ख़िलाफ़ है लैला यह समझेगी की मजनूं नहीं मजनूं का बाप है फिर ज़्यादा गड़बड़ करोगे तो बन्द हो जाओगे पिट-पिट कर नई कविता के छन्द हो जाओगे। “हमने पूछा-“ये नई कविता के छन्द क्या बला है?” वो बोला- “बेवक़ूफ़ बनाने की कला है नई कविता का सूरज ख़ून की कै करता है चन्द्रमा मवाद फेंकता है किरण को टी.बी. हो जाती है दिन दहाड़ता है रात रंभाती है तम तमतमाता है उल्लू गाता है कोयल किटकिटाती है मैना मुस्कुराती है और नई कविता के बारे में इतना ही जानता हूं ज़्यादा जानना चाहते हो तो किताब खरीद लाओ पढ़-पढ़ कर सिर पीटना रातों को पागलों की तरह चीखना वैसे आज कल की मुहब्बत भी तुम्हे इसके सिवाय क्या देगी क्यों की आज कल की नई छोकरी भी नई कविता से क्या कम है मरघट में बैठकर गाती है ‘ये प्यार का मौसम है’ जीते जी मरघट जाना चाहते होतो एस्ज्क़ फरमाओ वर्ना घर जाकर चुपचाप भाभी जी के पैर दबाओ जूते खाने से पैर दबाना अच्छा और मजनूं का बाप कहलाने से जोरू का ग़ुलाम कहलाना अच्छा।

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Short Hasya Kavita in Hindi :

सारे जहां से अच्छा है इंडिया हमारा
सारे जहां से अच्छा है इंडिया हमारा हम भेड़-बकरी इसके यह गड़ेरिया हमारा
सत्ता की खुमारी में, आज़ादी सो रही है हड़ताल क्यों है इसकी पड़ताल हो रही है लेकर के क़र्ज़ खाओ यह फ़र्ज़ है तुम्हारा सारे जहां से अच्छा है इंडिया हमारा
चोरों व घूसखोरों पर नोट बरसते हैं ईमान के मुसाफ़िर राशन को तरशते हैं वोटर से वोट लेकर वे कर गए किनारा सारे जहां से अच्छा है इंडिया हमारा
जब अंतरात्मा का मिलता है हुक्म काका तब राष्ट्रीय पूंजी पर वे डालते हैं डाका इनकम बहुत ही कम है होता नहीं गुज़ारा सारे जहां से अच्छा है इंडिया हमारा
हिंदी के भक्त हैं हम, जनता को यह जताते लेकिन सुपुत्र अपना कांवेंट में पढ़ाते बन जाएगा कलक्टर देगा हमें सहारा सारे जहां से अच्छा है इंडिया हमारा
फ़िल्मों पे फ़िदा लड़के, फैशन पे फ़िदा लड़की मजबूर मम्मी-पापा, पॉकिट में भारी कड़की बॉबी को देखा जबसे बाबू हुए अवारा सारे जहां से अच्छा है इंडिया हमारा
जेवर उड़ा के बेटा, मुम्बई को भागता है ज़ीरो है किंतु खुद को हीरो से नापता है स्टूडियो में घुसने पर गोरखा ने मारा सारे जहां से अच्छा है इंडिया हमारा

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Short Hasya Kavita in Hindi : 

नट खट हम हां नट खट हम। करने निकले खट पट हम आ गये लड़के पा गये हम। बंदर देख लुभा गये हम बंदर को बिचकायें हम। बंदल दौड़ा भागे हम बच गये लड़के बच गये हम। बर्र का बांस उठाकर आ गये हम ऊधम लगे मचाने हम आ लड़कों पर टूट पड़े झटपट हट कर छिप गये हम। बच गये लड़के बच गये हम बिच्छू एक पकड़ लाये।उसे छिपा कर ले आये सबक जांचने भिड़े गुरू। हमने नाटक किया शुरू खोला बिच्छु चुपके से। बैठे पीछे दुबके से बच गये गुरू जी खिसके हम। पिट गये लड़के बच गये हम बुढ़िया निकली पहुंचे हम। लगे चिढ़ाने जम जम जम बुढ़िया खीझे डरे न हम। ऊधम करना करें न कम बुढ़िया आई नाकों दम। लगी पीटने धम धम धम जान बचा कर भग गये हम। पिट गये लड़के बच गये हम

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Short Hasya Kavita in Hindi : 

नील गगन के प्यारे चंदे सपनों में तुम आओ मेरे साजन रूठ गए हैं आकर उन्हें मनाओ।
काली रातें प्यारी बातें श्वेत चाँदनी फैलाओ अपनी भूल समझ गई मैं उनकी भूल बताओ।
कष्ट दिये जो कोई उनको क्षमा दान दिलाओ मेरे साजन रूठ गए हैं आकर उन्हें मनाओ।
नील गगन के प्यारे चंदे सपनों में तुम आओ प्रेम का बिंब बनी हुई हूँ प्रीत का आँचल ओढ़वाओ।
राज प्रेम का उन्हें बताकर मंगलसुत्र गले बढ़वाओ मेरे साजन रूठ गए हैं आकर उन्हें मनाओ।
नील गगन के प्यारे चंदे सपनों में तुम आओ राह में उनके धूल बनी हूँ शीतल पवन चलाओ।
फ़ाल्गुन मास बीत गया अब मेघों से पत्र भेजवाओ वियोग की पीड़ा उन्हें बताकर संयोग से सावन की बूँद गिराओ।
मेरे साजन रूठ गए हैं आकर उन्हें मनाओ नील गगन के प्यारे चांद सपनों में तुम आओ।
प्रेम योग का संगम बेटा भोग-विलास से उन्हें हटाओ घर में बैठी प्यारी बेटी जोग से कन्यादान कराओ।
अंग-अंग थक गए हैं मेरे मेरा उत्साह बढ़ाओ नील गगन के प्यारे चांद सपनों में तुम आओ मेरे साजन रूठ गए है आकर उन्हें मनाओ।
सात जन्म का आत्म मिलन उसका सम्मान बढ़ाओ चाँद सितारें माँग सजाकर जीवन सफल बनाओ।
नील गगन के प्यारे चंदे सपनों में तुम आओ मेरे साजन रूठ गए हैं आकर उन्हें मनाओ।

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Short Hasya Kavita in Hindi :

ताती ताती तोता पिंजरे में सोता पंख जो हरे थे उड़न से भरे थे हो गये हैं पीले पड़ गये हैं ढीले ताती ताती तोता। ताती ताती तोता पिंजरो में रोता झांखते हैं प्यारे नन्हें नन्हें तारे कहते है तोता काहे को तू रोता अंधकार छोड़ दे पिंजरो को तोड़ दे उड़ते उड़ते सारी रात आके मिल जा अपने साथ छोटे भाई तोता प्यारा तू भी बन जा एक सितारा

Short Hasya Kavita in Hindi : 

तू कब इंसा बन पाएगा
किसी भी कमजोर को जब भी सताया जाएगा कोई ना कोई तो, यह कलम उठाएगा मानता हूँ कुछ घड़ी, तुम रोक लोगे आवाज मेरी पर सत्य हूं मैं, कब तल्ख मुझको दबाया जाएगा।
कभी धर्म-कभी जाति की, जो बीज तुम हो बो रहे कल उसी विष-वृक्ष के ज्वालाओं से, तुम खुद जलोगे क्या सारे हिन्दुस्तानी तुम आपस में ही लड़ मरोगे फिर से आकर कोई फिरंगी, सब पे शासन कर जाएगा।
यूँ दास बन कर रहने को मजबूर तुम हो जाओगे जो आज तुम खामोश होकर, अपनो की हँसी उड़ाओगे ग़र ढूंढ़ना ही है तो कुछ अच्छाईयाँ ढूढ़ों मेरे दोस्तों मेरा दावा है हर धर्म में ही, बहुत कुछ अच्छा भी मिलेगा।
हमको धर्म के नाम पर लड़ाने वाला जातिगत दंगा फैलाने वाला ऊगंली दातों तले दबाएगा अपनी सोच पे खुद शर्माएगा।
हम सब पहले इंसान हैं, जब यह पाठ पढ़ाया जाएगा हर मजहब के अच्छे ज्ञानी को, कहीं इक साथ बुलाया जाएगा आडम्बर नामक भ्रामक बातों को, जड़ से मिटाया जाएगा सत्य सभी धर्मों का हमको, प्रेम का पाठ पढ़ाएगा।
सम्मान करो अपने संस्कारों का, सन्मार्ग तुम्हे मिल जाएगा प्रेम में वह ताकत है, जो हर महाप्रलय से टकराएगा ज्ञानी व्यक्ति वही होगा, जो सबको यह समझाएगा मिलकर रहना भारतवासी, ऐसा देश ना फिर मिल पाएगा।
छोटा-बड़ा और जाति-पाति का सब अन्तर मिट जाएगा पढ़कर देखो शास्त्रों को, बस चक्षु खुला रह जाएगा मैं नहीं कहता, गीता कहती है, साक्षात्कार हुआ यदि ज्ञान का सब भवसागर मिट जाएगा, वह दिन जाने कब आएगा, जब तू इंसा बन जाएगा

Short Hasya Kavita in Hindi : 

वह देखो वह आता चूहा आंखों को चमकाता चूहा मूंछों में मुस्काता चूहा लम्बी पूंछ हिलाता चूहा। मक्खन रोटी खाता चूहा बिल्ली से डर जाता चूहा।

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(Hasya Kavita in Hindi) :

तुम मिले तो सारी नेमत मिल गई हमको इस दुनिया में जन्नत मिल गई।
हमने आगे का सफर तय कर लिया तेरी नज़रों की इजाज़त मिल गई।
इश्क़ ने बख़्शी है वो लज्जत हमें इस गम-ए-दुनिया से फुरसत मिल गई।
कौन समझाए इन्हें फिर बोलि ए जब शरारत से शरारत मिल गई।
बस मुकम्मल तो वही इंसान है दर्द-ए-दिल की जिसको दौलत मिल गई।
उसकी खातिर क्या नहीं मैंने किया फिर भी नज़रों में शिकायत मिल गई।
वो कभी गुमराह होगा ही नहीं जिसको मालिक की हिदायत मिल गई।
क़ाबिल-ए-तारीफ है उसका नसीब बाप माँ की जिसको ख़िदमत मिल गई।

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Short Hasya Kavita in Hindi : 

हर वो पल खास है, तेरे ना होते हुए भी तेरे होने का अहसास है तन्हाई में रोने का रिवाज है दिखावा क्यों?
अब मेरे पास होने का भूल गया हूं अब यही मेरा मिजाज है थोड़ा रंगीन, बदल पाना है नामुमकिन, तेरे दिल में मेरा जो ठिकाना है मिटाना है तेरा मेरा जो अफसाना है दुनिया मेरी और दिल तेरा दीवाना।
एक आदत गलत जो लग गयी है रोज इबादत की लत जो लग गयी है प्रभु करो मुझे मुक्त इस कारागार से थक गया हूं दो दिलों के व्यापार से।
बेजोड़ कोशिश भूल जाने की मुश्किल है अभी भी मेरे सीने में तेरा दिल है बिना जाम के जैसे भरी महफ़िल है ।

(Hasya Kavita in Hindi) :

हरे पेड़ की डाली। जामुन काली काली। मीठा है, रसवाली। जामुन काली काली लाठी लेकर महंगू। करता है रखवाली। जामुन काली काली। हरे पेड़ की डाली।

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Short Hasya Kavita in Hindi : 

क्या शेष समर रह जाएगा, क्या नहीं उबर वह पाएगा।
यह सोच कृष्ण मायूस हुए, गम घटा के वे आगोश हुए।
मन ही मन कुछ वे सोच रहे अब लगा कि रण से लौट रहे पर अनाहूत होता न कुछ, है पता मुझे अर्जुन का दु:ख।
मैं बतलाता अब अर्जुन को,मैं पाता अब खोये धुन को, तू जिधर देख तब तुझे दिखा, हैं लोग वही जिनसे सीखा।
वे आज बने तेरा शत्रु, पर मान रहा क्यों ना अब तू, क्यों सोच तेरी उल्टी होती, रण में न कोई गलती होती।
बस होता उसमें एक धरम, हो शत्रु पक्ष तो करें भसम मैं चाह रहा बन समरजीत, ना कर इनसे अब कोई प्रीति।
तू प्रीति इनसे करते आया, बदले में अब तक क्या पाया, वह नहीं आज तेरा होगा, ना उसे मोह घेरा होगा।
फिर तू क्यों घिरता आज यहां, फिर सिर क्यों फिरता आज यहां, सिरफिरा न बन, बन सरफरोश,अब भी तो आए तुझे होश।
जब खाली होता शब्द कोष, तब समर का करता हूँ उद्घोष, लाचार नहीं अब पड़े रहो, गांडीव उठा कर खड़े रहो।
तुम नहीं आक्रमण शुरू करो, हैं शत्रु भी तो गुरू कहो, जब गुरू ही शत्रु बन जाता, तब क्योंकर आज नहीं ठनता, मैं चाहूं अर्जुन प्रण करता। कर शंंखनाद वह रण करता….

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Short Hasya Kavita in Hindi : 

जीना जिन्दगी तो मरना इबादत मर के जिए जो सच्ची सहादत आँखें हैं नम दिलों में है ग़म जहां में सब करते उनको नमन।
शत्रु जो आते आँखे दिखाते अपने कुकर्मो पर सदा पछताते देश के जवान सिर न झुकाते प्राण देकर नभ ध्वज लहराते।
जुदा जो हुए न जाने कहाँ सब ढूँढे निगाहें दिखाते नहीं अब शहीद जग में रहते अमर वह राजेश अर्पण करते श्रद्धा सुमन मन

Short Hasya Kavita in Hindi : 

हरे हरे लाल लाल फूल। चलो भाई जल्दी, चलो स्कूल। छूट गईं पेंसिल कापी गई भूल जल्दी लो भाई,चलो स्कूल।

Short Hasya Kavita in Hindi : 

छोटे छोटे पंख हैं मेरे कोमल हल्के प्यारे भी हैं देखे हैं जो मैंने सपने उसमें सूरज तारे भी हैं पर क्या बोझल इन्हें बनाकर मंजिल ऊंची चढ़ पाऊंगा शब्द सुनहरे पढ़े बिना ही राहें अपनी बढ़ पाऊंगा…

Short Hasya Kavita in Hindi : 

‘दफ़्तर का बाबू’
दफ़्तर का एक बाबू मरा सीधा नरक में जा कर गिरान तो उसे कोई दुख हुआ ना ही वो घबराया यों खुशी में झूम कर चिल्लाया–‘वाह वाह क्या व्यवस्था है‚ क्या सुविधा है‚क्या शान है! नरक के निर्माता तू कितना महान है! आंखों में क्रोध लिये यमराज प्रगट हुएबोले‚‘ नादान दुख और पीड़ा का यह कष्टकारी दलदल भी तुझे शानदार नज़र आ रहा है?’बाबू ने कहा‚‘माफ करें यमराज। आप शायद नहीं जानते कि बंदा सीधा हिंदुस्तान से आ रहा है।’

(Hasya Kavita in Hindi) :

हरी हरी भिंडी हरे हरे आम। हरी हरी धनिया खरे खरे दाम। कडुवा करेला अच्छा झमेला। लीची तरबूज।फीका पड़ा केला।

Short Hasya Kavita in Hindi : 

अंग्रेज़ी प्राणन से प्यारी
चले गए अंग्रेज़ छोड़ि याहि, हमने है मस्तक पे धारी ये रानी बनिके है बैठी, चाची, ताई और महतारी
उच्च नौकरी की ये कुंजी, अफसर यही बनावन हारी सबसे मीठी यही लगत है, भाषाएं बाकी सब खारी
दो प्रतिशत लपकन ने याकू, सबके ऊपर है बैठारी याहि हटाइबे की चर्चा सुनि, भक्तन के दिल होंइ दु:खारी
दफ्तर में याके दासन ने, फाइल याही सौं रंगडारींया के प्रेमी हर आफिस में, विनते ये नाहिं जाहि बिसारी

Short Hasya Kavita in Hindi : 

नाना नानी। कहो कहानी वही पुरानी कौन नगर था कौन डगर थी कैसा राजा कैसी रानी नाना नानी कहो कहानी।

Short Hasya Kavita in Hindi : 

यह है गुड़िया यह है गुड्डा यह है बु्ढ़िया यह है बुड्ढा। सोच रही हूं इक दिन गुड़िया हो जाएगी ऐसी बुढ़िया। हो जाएगा इक दिन बुड्ढ़ा मेरा प्यारा सा गुड्डा। गुड़िया बुढ़िया गुड्डा बुड्ढा।

Short Hasya Kavita in Hindi :

चूं चूं चूं चूं चूहा बोले म्याऊं म्याऊं बिल्ली ती ती कीरा बोले झीं झीं झीं झीं झिल्ली किट किट किट बिस्तुइया बोले किर किर किर गिलहैरी तुन तुन तुन इकतारा बोलेपी पी पी पिपहैरी टन टन टन टन घंटी बोले ठन ठन ठन्न रूपैया बछड़ा देखे बां बां बोले तेरी प्यारी गइया ठनक ठनक कर तबला बोले डिम डिम डिम डिम डौंडी टेढ़ी मेढ़ी बातें बोले बाबाजी की लौंडी

Short Hasya Kavita in Hindi : 

तितली नन्हीं प्यारी तितली पीली नीली न्यारी तितली फूलों पर फूलों सी तितली तितली क्यारी क्यारी तितली अपने नन्हें पंख उठाए रंगों की इक लहर बनाए चुप चुप चुप उड़ती जाए खिली धूप में कितनी भाए।

Short Hasya Kavita in Hindi : 

एक दिन मामला यों बिगड़ा कि हमारी ही घरवाली से हो गया हमारा झगड़ा स्वभाव से मैं नर्म हूं इसका अर्थ ये नहीं के बेशर्म हूं पत्ते की तरह कांप जाता हूं बोलते-बोलते हांफ जाता हूं इसलिये कम बोलता हूं मजबूर हो जाऊं तभी बोलता हूं हमने कहा-“पत्नी होतो पत्नी की तरह रहो कोई एहसान नहीं करतीं जो बनाकर खिलाती हो क्या ऐसे ही घर चलाती हो शादी को हो गये दस साल अक्ल नहीं आई सफ़ेद हो गए बाल पड़ौस में देखो अभी बच्ची है मगर तुम से अच्छी है घर कांच सा चमकता है और अपना देख लो देखकर खून छलकता है कब से कह रहा हूं तकिया छोटा है बढ़ा दो दूसरा गिलाफ चढ़ा दो चढ़ाना तो दूर रहा निकाल-निकाल कर रूई आधा कर दिया और रूई की जगह कपड़ा भर दिया
कितनी बार कहा चीज़े संभालकर रखो उस दिन नहीं मिला तो नहीं मिला कितना खोजा और रूमाल कि जगह पैंट से निकल आया मोज़ा वो तो किसी ने शक नहीं किया क्योकि हमने खट से नाक पर रख लिया काम करते-करते टेबल पर पटक दिया-“साहब आपका मोज़ा।”हमने कह दिया हमारा नहीं किसी और का होगा अक़्ल काम कर गई मगर जोड़ी तो बिगड़ गई कुछ तो इज़्ज़त रखो पचास बार कहा मेरी अटैची में अपने कपड़े मत रखो उस दिन कवि सम्मेलन का मिला तार जल्दी-जल्दी में चल दिया अटैची उठाकर खोली कानपुर जाकर देखा तो सिर चकरा गया पजामे की जगह पेटी कोट आ गया तब क्या खाक कविता पढ़ते या तुम्हारा पेटीकोट पहनकर मंच पर मटकते
एक माह से लगातार कद्दू बना रही हो वो भी रसेदार ख़ूब जानती हो मुझे नहीं भाता खाना खाया नहीं जाता बोलो तो कहती हो-“बाज़ार में दूसरा साग ही नहीं आता।”कल पड़ौसी का राजू बाहर खड़ा मूली खा रहा था ऐर मेरे मुंह मे पानी आ रहा था कई बार कहा-ज़्यादा न बोलो संभालकर मुंह खोलो अंग्रेज़ी बोलती हो जब भी बाहर जाता हूं बड़ी अदा से कहती हो-“टा….टा”और मुझे लगता है जैसे मार दिया चांटा मैंने कहा मुन्ना को कब्ज़ है ऐनिमा लगवा दो तो डॉक्टर बोलीं- “डैनिमा लगा दो।” वो तो ग़नीमत है कि ड़ॉक्टर होशियार था नीम हकीम होता तो बेड़ा ही पार था वैसे ही घर में जगह नहीं एक पिल्ला उठा लाई पाव भर दूध बढा दिया कुत्ते का दिमाग चढ़ा दिया तरीफ़ करती हो पूंछ की उससे तुलना करती हो हमारी मूंछ की तंग आकर हमने कटवा दी मर्दो की रही सही निशानी भी मिटवा दी
वो दिन याद करो जब काढ़ती थीं घूंघट दो बीते का अब फुग्गी बनाती हो फीते का पहले ढ़ाई गज़ में एक बनता था अब दो ब्लाउज़ो के लिये लगता है एक मीटर आधी पीठ खुली रहती है मैं देख नहीं सकताऔर दुनिया तकती है
मायके जाती हो तो आने का नाम नहीं लेतीं लेने पहुंच जाओ तो मां-बाप से किराए के दाम नहीं लेतीं कपड़े बाल-बच्चों के लिये सिलवा कर ले जाती हो तो भाई-भतीजों को दे आती हो दो साड़ियां क्या ले आती हो सारे मोहल्ले को दिखाती हो साड़ी होती है पचास की मगर सौ की बताती हो उल्लू बनाती हो हम समझ जाते हैं तो हमें आंख दिखाती हो हम जो भी जी में आया बक रहे थे और बच्चे खिड़कियो से उलझ रहे थी हमने सोचा- वे भी बर्तन धो रही हैं मुन्ना से पूछा, तो बोला-“सो रही हैं।” हमने पूछा, कब से? तो वो बोला-“आप चिल्ला रहे हैं जब से।”

Short Hasya Kavita in Hindi : 

पौधा तो जामुन का ही था लेकिन आये आम। पर जब खाया तो यह पाया ये तो हैं बादाम। जब उनको बोया जमीन में पैदा हुए अनार। पकने पर हो गये संतरे मैंने खाये चार।

Short Hasya Kavita in Hindi : 

नील गगन के प्यारे चंदे सपनों में तुम आओ मेरे साजन रूठ गए हैं आकर उन्हें मनाओ।
काली रातें प्यारी बातें श्वेत चाँदनी फैलाओ अपनी भूल समझ गई मैं उनकी भूल बताओ।
कष्ट दिये जो कोई उनको क्षमा दान दिलाओ मेरे साजन रूठ गए हैं आकर उन्हें मनाओ।
नील गगन के प्यारे चंदे सपनों में तुम आओ प्रेम का बिंब बनी हुई हूँ प्रीत का आँचल ओढ़वाओ।
राज प्रेम का उन्हें बताकर मंगलसुत्र गले बढ़वाओ मेरे साजन रूठ गए हैं आकर उन्हें मनाओ।
नील गगन के प्यारे चंदे सपनों में तुम आओ राह में उनके धूल बनी हूँ शीतल पवन चलाओ।
फ़ाल्गुन मास बीत गया अब मेघों से पत्र भेजवा ओवियोग की पीड़ा उन्हें बताकर संयोग से सावन की बूँद गिराओ।
मेरे साजन रूठ गए हैं आकर उन्हें मनाओ नील गगन के प्यारे चांद सपनों में तुम आओ।
प्रेम योग का संगम बेटा भोग-विलास से उन्हें हटाओ घर में बैठी प्यारी बेटी जोग से कन्यादान कराओ।
अंग-अंग थक गए हैं मेरे मेरा उत्साह बढ़ाओ नील गगन के प्यारे चांद सपनों में तुम आओ मेरे साजन रूठ गए है आकर उन्हें मनाओ।
सात जन्म का आत्म मिलन उसका सम्मान बढ़ाओ चाँद सितारें माँग सजाकर जीवन सफल बनाओ।
नील गगन के प्यारे चंदे सपनों में तुम आओ मेरे साजन रूठ गए हैं आकर उन्हें मनाओ।

Short Hasya Kavita in Hindi : 

सर्दी आई, सर्दी आई ठंड की पहने वर्दी आई। सबने लादे ढेर से कपड़े चाहे दुबले, चाहे तगड़े।
नाक सभी की लाल हो गई सुकड़ी सबकी चाल हो गई। टिठुर रहे हैं कांप रहे हैं दौड़ रहे हैं, हांप रहे हैं।
धूप में दौड़ें तो भी सर्दी छाओं में बैठें तो भी सर्दी। बिस्तर के अंदर भी सर्दी बिस्तर के बाहर भी सर्दी।
बाहर सर्दी घर में सर्दी पैर में सर्दी सर में सर्दी। इतनी सर्दी किसने कर दी। अण्डे की जम जाए ज़र्दी। सारे बदन में ठिठुरन भर दी। जाड़ा है मौसम बेदर्दी।
जाती सर्दीघर के बाहर खिसक रही है धीरे धीरे सर्दी आसमान भी खोल रहा है घिसी सलेटी वर्दी।
सुबह सूरज आकर धूप की चादर खोले जाड़ा पंजों के बल चलता अपनी राह को होले।
धूप की गर्मी में सिक जाएं घर के कोने खुद रेएड़ी तलवों और उंगलियों की हालत भी सुधरे।
पहले उतरे ऊनी मोज़े फिर मफ़लर भी जाए

Short Hasya Kavita in Hindi :

हर वो पल खास है, तेरे ना होते हुए भी तेरे होने का अहसास है तन्हाई में रोने का रिवाज है दिखावा क्यों?
अब मेरे पास होने का भूल गया हूं अब यही मेरा मिजाज है थोड़ा रंगीन,बदल पाना है नामुमकिन, तेरे दिल में मेरा जो ठिकाना है मिटाना है तेरा मेरा जो अफसाना है दुनिया मेरी और दिल तेरा दीवाना।
एक आदत गलत जो लग गयी है रोज इबादत की लत जो लग गयी है प्रभु करो मुझे मुक्त इस कारागार से थक गया हूं दो दिलों के व्यापार से।
बेजोड़ कोशिश भूल जाने की मुश्किल है अभी भी मेरे सीने में तेरा दिल है बिना जाम के जैसे भरी महफ़िल है ।

Short Hasya Kavita in Hindi : 

बसंत की हवा के साथ रंगती मन कोमलती चेहरे पर हाथये होली लिए रंगों की टोली लाल गुलाबी बैंगनी हरी पीली ये नवरंगी तितली है। आज तो जाएगी घर घरदर दर ये मौज मनाएंगी भूल पुराने झगड़े सारे सबको गले लगाएगी पीली फूली सरसौं रानी

Short Hasya Kavita in Hindi : 

भारतीय रेल
एक बार हमें करनी पड़ी रेल की यात्रा देख सवारियों की मात्रा पसीने लगे छूटने हम घर की तरफ़ लगे फूटने इतने में एक कुली आया और हमसे फ़रमाया साहब अंदर जाना है? हमने कहा हां भाई जाना है उसने कहा अंदर तो पंहुचा दूंगा पर रुपये पूरे पचास लूंगा हमने कहा समान नहीं केवल हम हैं तो उसने कहा क्या आप किसी सामान से कम हैं? जैसे तैसे डिब्बे के अंदर पहुचें यहां का दृश्य तो ओर भी घमासान था पूरा का पूरा डिब्बा अपने आप में एक हिंदुस्तान था कोई सीट पर बैठा था, कोई खड़ा था जिसे खड़े होने की भी जगह नही मिली वो सीट के नीचे पड़ा था इतने में एक बोरा उछालकर आया ओर गंजे के सर से टकराया गंजा चिल्लाया यह किसका बोरा है? बाजू वाला बोला इसमें तो बारह साल का छोरा है तभी कुछ आवाज़ हुई और इतने मैं एक बोला चली चली दूसरा बोला या अली हमने कहा काहे की अली काहे की बलिट्रेन तो बगल वाली चली

Short Hasya Kavita in Hindi : 

रेल चली भाई, रेल चली। छुक छुक करती रेल चली। पटरी पटरी रेल चली। सीटी देती रेल चली। नहीं पसिंजर धीमी सी.आज हमारी मेल चली। रेल चली भाई रेल चली।

Short Hasya Kavita in Hindi : 

प्यार का नाता ज़िन्दगी के मोड़ पर यह प्यार का नाता हमारा। राह की वीरानियों को मिल गया आखिर सहारा।
ज्योत्सना सी स्निग्ध सुन्दर, तुम गगन की तारिका सी। पुष्पिकाओं से सजी, मधुमास की अभि सारिका सी।
रूप की साकार छवि, माधुर्य्य की स्वच्छन्द धारा। प्यार का नाता हमारा, प्यार का नाता हमारा।
मैं तुम्ही को खोजता हूँ, चाँद की परछाइयों में। बाट तकता हूँ तुम्हारी, रात की तनहाइयों में।
आज मेरी कामनाओं ने तुम्हे कितना पुकारा। प्यार का नाता हमारा, प्यार का नाता हमारा।
दूर हो तुम किन्तु फिर भी दीपिका हो ज्योति मेरी। प्रेरणा हो शक्ति हो तुम, प्रीति की अनुभूति मेरी।
गुनगुना लो प्यार से, यह गीत मेरा है तुम्हारा। प्यार का नाता हमारा, प्यार का नाता हमारा।

Short Hasya Kavita in Hindi : 

काले काले बादल चले चाल तूफानी। चम चम चम की बिजली। झम झम बरसा पानी।

(Hasya Kavita in Hindi) :

रोशनी रात, हर रात बहुत देर गए, तेरी खिड़की से, रोशनी छनकर, मेरे कमरे के दरो-दीवारों पर, जैसे दस्तक सी दिया करती है।
मैं खोल देता हूँ चुपचाप किवाड़, रोशनी पे सवार तेरी परछाई, मेरे कमरे में उतर आती है, सो जाती है मेरे साथ मेरे बिस्तर पर।

Short Hasya Kavita in Hindi : 

उछल पुछल कर जाती गेंद। अच्छी दौड़ लगाती गेंद। हमको खूब भगाती गेंद। यहीं कहीं छिप जाती गेंद।सब को खूब थकाती गेंद

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4 comments

Akinkya August 13, 2018 - 7:40 pm

Mast

Reply
Hind Patrika August 17, 2018 - 10:10 am

धन्यवाद अकिंक्य जी! 🙂

Reply
Neeraj September 10, 2018 - 3:10 am

Plzzz teachers pr hryanvi poem esliye..

Reply
yaman ali April 13, 2019 - 3:40 pm

Believed life stops you.
As if it were you
Let’s learn and walk in life you

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