विद्वानों का परामर्श महत्वपूर्ण हैं | Vidhywaano Ka Paramarsh Mhtvpurn Hain

विद्वानों का परामर्श महत्वपूर्ण हैं | Vidhywaano Ka Paramarsh Mhtvpurn Hain

विद्वानों का परामर्श महत्वपूर्ण हैं | Vidhywaano Ka Paramarsh Mhtvpurn Hain : उत्तर दिशा में मधुपुर नाम का एक नगर था। उसमें मधुसेन नाम का एक राजा राज करता था। उस राजा के एक विकृत शरीर की कन्या पैदा हुई। कन्या के तीन स्तन थे। कन्या को अशुभ मानकर राजा ने अपने सेवकों से कहा- “इस कन्या को किसी बीहड़ वन में ले जाकर छोड़ आओ। ध्यान रहे कि इस बात की खबर किसी को न लगे।’

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विद्वानों का परामर्श महत्वपूर्ण हैं | Vidhywaano Ka Paramarsh Mhtvpurn Hain

यह सुनकर एक सेवक ने राजा को समझाने का प्रयास किया- “राजन ! ऐसा कार्य करने से पहले यदि आप विद्वान ब्राह्मणों से परामर्श ले लें तो उचित रहेगा। बिना किसी से परामर्श लिए कोई काम नहीं करना चाहिए। एक ब्राह्मण को भी एक राक्षस ने पकड़ लिया था, किंतु उससे ही पूछ लेने के कारण ब्राह्मण की मुक्ति हो गई थी।’
राजा ने पूछा – “वह कैसे?”
सेवक ने कहा – “सुनाता हूँ, सुनिए।”

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