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Fathers Day Essay in Hindi | पितृ दिवस पर निबंध

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Fathers Day Essay in Hindi

Fathers Day Essay in Hindi : इस समाज में हमने माँ के अपने बच्चे के लिए असीम प्रेम को तो एक शब्दों में पिरोया हैं जिसे हमे ममता के नाम से जानते हैं. हम सभी ने ऐसी बहुत सी कथाएँ, कहानियाँ और सुंदर सुंदर कवितायेँ भी सुनी होंगी और कई बार खुद से लिखी भी होंगी जिसने हमारी आँखों में माँ के प्रेम को जगाया हैं और हमे बतलाया हैं की माँ क्या हैं परन्तु कभी सोचा हैं पिता के प्रेम के बारे में. हम अक्सर कहते हैं की बेटा और बेटी में फर्क नहीं करना चाहिए लेकिन माँ के प्रेम के लिए ममता और पिता के प्रेम के लिए कुछ भी नहीं ये अपने आप में अन्याय हैं.

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Fathers Day Essay in Hindi

Fathers Day Essay in Hindi : पिता शब्द में ही हैं ऐसा प्रेम जो कई बार हमे दिखाता नहीं है की वो हमसे कितना प्यार करता हैं, उनकी मेहनत हम अपनी मौज मस्तियो में यूँ उड़ाते हैं जैसे हमे कोई फर्क ही नहीं पड़ता लेकिन वो बाप ही जानता हैं इस चीज़ का दर्द जब वो अपनी मेहनत को यु बेकार होते हुवे देखता हैं. हम इस शब्द का अर्थ तब समझते हैं जब हम किसी के माता – पिता बनते हैं. तब उनकी कही गयी हर बात याद आती हैं, उनकी डांट के पीछे का सबक समझ आता हैं.

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Fathers Day Essay in Hindi

Fathers Day Essay in Hindi

किसी ने कहा : “पके फल हो जाएं तो पेड़ो से रिश्ता तोड़ जाते हैं और अपाहिज बाप हो जाए तो बेटे उन्हें छोड़ जाते हैं”

पिता जब बाज़ार में पुत्र को ले जाता हैं और जेब में 50 रुपये होते हैं और बच्चा 200 रुपये के सामान को खरीदने की जिद्द करता हैं उस वक़्त एक पिता की विवशता और उस बच्चे की जिद्द इस के बीच के एहसास में खड़े हो कर ये पन्तियाँ पढियेगा की पिता क्या होता हैं.

Fathers Day Essay in Hindi

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Fathers Day Essay in Hindi
पिता…पिता जीवन है, सम्बल है, शक्ति है,
पिता…पिता सृष्टि मे निर्माण की अभिव्यक्ति है,
पिता अँगुली पकड़े बच्चे का सहारा है,
पिता कभी कुछ खट्टा, कभी खारा है,
पिता…पिता पालन है, पोषण है, परिवार का अनुशासन है,
पिता…पिता धौंस से चलना वाला प्रेम का प्रशासन है,
पिता…पिता रोटी है, कपड़ा है, मकान है,
पिता…पिता छोटे से परिंदे का बड़ा आसमान है,
पिता…पिता अप्रदर्शित-अनंत प्यार है,
पिता है तो बच्चों को इंतज़ार है,

Fathers Day Essay in Hindi 

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पिता से ही बच्चों के ढेर सारे सपने हैं,
पिता है तो बाज़ार के सब खिलौने अपने हैं,
पिता से परिवार में प्रतिपल राग है,
पिता से ही माँ की बिंदी और सुहाग है,
पिता परमात्मा की जगत के प्रति आसक्ती है,
पिता गृहस्थ आश्रम में उच्च स्थिती की भक्ती है,
पिता अपनी इच्छाओं का हनन और परिवार की पूर्ती है,
पिता…पिता रक्त निगले हुए संस्कारों की मूर्ती है,
पिता…पिता एक जीवन को जीवन का दान है,
पिता…पिता दुनिया दिखाने का एहसान है,

Fathers Day Essay in Hindi 

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Fathers Day Essay in Hindi
पिता…पिता सुरक्षा है, अगर सिर पर हाथ है,
पिता नहीं तो बचपन अनाथ है,
पिता नहीं तो बचपन अनाथ है,
तो पिता से बड़ा तुम अपना नाम करो,
पिता का अपमान नहीं उनपर अभिमान करो,
क्योंकि माँ-बाप की कमी को कोई बाँट नहीं सकता,
और ईश्वर भी इनके आशीषों को काट नहीं सकता,
विश्व में किसी भी देवता का स्थान दूजा है,
माँ-बाप की सेवा ही सबसे बड़ी पूजा है,
विश्व में किसी भी तीर्थ की यात्रा व्यर्थ हैं,
यदि बेटे के होते माँ-बाप असमर्थ हैं,
वो खुशनसीब हैं माँ-बाप जिनके साथ होते हैं,
क्योंकि माँ-बाप के आशिषों के हाथ हज़ारों हाथ होते हैं
क्योंकि माँ-बाप के आशीषों के हाथ हज़ारों हाथ होते हैं. . .

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  1. नाम खुशीराम प्रजा पत अरनिया केदार

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