December 5, 2021

Bhavishy batane ki kla भविष्य बताने की कला

Bhavishy batane ki kla भविष्य बताने की कला

Akbar Birbal Stories in Hindi

Bhavishy batane ki kla भविष्य बताने की कला  : अकबर के दरबार में सभी दरबारी बीरबल की अच्छी पदवी से जलते थे। वे सब बीरबल के विरुद्ध चालें चलते रहते थे। एक दिन उन्होंने एक चाल चली। दरबार लगा हुआ था और लगभग सभी दरबारी उपस्थित थे। उनमें से एक दरबारी खड़ा हुआ और बोला “महाराज, मैं आजकल देख रहा हूँ कि बीरबल अपने काम के प्रति पूरा ध्यान नहीं दे रहे हैं। आजकल उनका ध्यान भविष्य बताने व अन्य जादुई विद्याएँ सीखने में लगा है। जरा-सा भी समय मिलता है तो वह किसी-न-किसी ज्योतिषी के पास जाकर बैठ जाते हैं। तब उनको यह भी ध्यान नहीं रहता कि उन्हें क्या काम सौंपा गया है या वह किस काम के लिए जा रहे थे। एक तरह से देखा जाये तो राज-काज की समस्याओं को हल करने का अपना उत्तरदायित्व ही भूलते जा रहे हैं।” दूसरे दरबारी ने कहा “महाराज, बीरबल से उसके जादू के कारनामों की बातें सुन-सुन कर हम तंग हो गए हैं। वह यह दावा करता रहता है कि वह अपने जादू के मंत्रों से कुछ भी कर सकता है।” बीरबल की सच्चाई की जानने के लिए अकबर ने उसकी परीक्षा लेने की सोची। जब बीरबल दरबार में आया तो अकबर ने कहा “बीरबल, मैंने सुना है कि तुमने भविष्य बताने की कला और जादुई मंत्र सीखे हैं। क्या तुम अपनी इस कला से कुछ देर पहले खोई हुई मेरी औगूठी ढूँढ़ सकते हो?”

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Bhavishy batane ki kla
बीरबल समझ गया कि दरबारियों ने उसे अकबर की नजरों में गिराने के लिए चाल चली है। अत: बीरबल मान गया और बोला “हाँ, महाराज ! आप देखेंगे कि अँगूठी अपने आप ही आपकी अँगुली में आ जाएगी। फिर बीरबल ने एक कागज पर कुछ आड़ी-तिरछी रेखाएं खींचीं और अकबर को कागज पर हाथ रखने के लिए कहा। इसके बाद बीरबल ने चावल के कुछ दाने लिए और दरबारियों के ऊपर फेंक दिए। दरबारी घबराने लगे। उनमें से एक दरबारी ने सोचा “मुझे अपनी जेब में रखी औगूठी को कसकर पकड़ लेना चाहिए। बीरबल ने कहा था कि अँगूठी स्वयं ही महाराज की अँगुली में पहुँच जायेगी।” ऐसा सोचते हुए उस दरबारी ने अपनी जेब को कसकर पकड लिया। बीरबल ने दरबारी को ऐसा करते देख लिया। उसने जोर से कहा, “महाराज, मैंने आपकी अँगूठी ढूंढ़ ली है। वह इस दरबारी की जेब में है।” सभी दरबारी समझ गए कि वे स्वयं ही अपने जाल में फंस गए हैं। बादशाह अकबर ने स्वयं ही वह अँगूठी उस दरबारी को छिपाने के लिए दी थी, परंतु उसकी घबराहट ने बादशाह अकबर की योजना की सारी पील खोल दी। उन्होंने एक बार फिर बीरबल की प्रशंसा की और तोहफे के रूप में उसे वही अँगूठी दे दी, जिसे बीरबल ने खोजा था।

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