December 5, 2021

Sabse priya vastu | सबसे प्रिय वस्तु

Sabse priya vastu | Akbar Birbal Stories in Hindi

Sabse priya vastu | Akbar Birbal Stories in Hindi

Sabse priya vastu | Akbar Birbal Stories in Hindi : एक बार रानी से कुछ गलती हो गई। बादशाह अकबर ने उसे क्रोध में आदेश दिया “तुम्हारी लापरवाही के लिए मैं तुम्हें यही सजा देता हूँ कि चौबीस घंटे के अंदर तुम राजमहल छोड़ कर चली जाओ। अगर तुम चाहो तो अपने साथ अपनी सबसे प्रिय वस्तु ले जा सकती हो।” रानी बहुत घबरा गई। काफी सोचने-विचारने पर भी वह इस समस्या का कोई समाधान नहीं ढूँढ़ सकी। अंत में उसने बीरबल को बुलाने के लिए एक सेवक भेजा। रानी का बुलावा पाते ही बीरबल रानी के पास आ पहुँचा। रानी ने बीरबल को सारी बात बताकर इस विपत्ति से निपटने के लिए उपाय पूछा। बीरबल ने उसे एक योजना समझाई। अपने कक्ष में आ कर रानी ने अपनी सेविका से जल्दी ही अपना सामान बाँधने के निर्देश दिए। तैयारी पूर्ण होने पर रानी ने बादशाह को बुलवाया। बादशाह के आने पर वह बोली “महाराज, आपके आदेशानुसार मैं महल छोड़कर जा रही हूँ। अंतिम बार क्या आप हमारे साथ एक गिलास शरबत पी सकते हैं?” बादशाह रानी के निवेदन से सहमत हो गए। रानी ने बादशाह के शरबत में नींद की दवा मिला दी थी। शरबत पीते ही बादशाह गहरी नींद में सो गए।

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तब रानी ने सैनिकों से पालकी मैंगाकर बादशाह अकबर को उसमें लिटा दिया। अपने सामान और बादशाह अकबर के साथ राजमहल छोड़कर रानी अपने पिता के घर चली गई। वहाँ पहुँच कर बादशाह को पलंग पर लिटा दिया। बादशाह अब तक नींद में ही थे। जब रानी के पिता ने उससे इस सबका कारण पूछा तो उसने उन्हें कुछ देर प्रतीक्षा करने को कहा। कुछ घंटों के पश्चात् बादशाह की नींद खुली। उन्होंने अपने आस-पास देखा। उन्होंने रानी को खिड़की के पास खड़े पाया। “मै यहाँ क्या कर रहा हूँ? मैं तुम्हारे पिता के घर किस प्रकार पहुँचा?” बादशाह ने गुस्से में कहा। “महाराज, आपने मुझे अपनी सबसे प्रिय वस्तु के साथ महल से जाने को कहा था। आपसे अधिक प्रिय तो मेरे लिए कुछ भी नहीं है। इसलिए मैं आपको अपने साथ ले आई।” रानी के शब्दों को सुनकर बादशाह अकबर मुस्कुराए और बोले ‘प्रिय, यह योजना बना कर तुमने बहुत चतुराई का प्रमाण दिया है।” “नहीं नहीं, महाराज,” रानी ने सफाई देते हुए कहा, “बीरबल ने मुझे ऐसा करने के लिए कहा था।” “ओह, तो इस सबके पीछे बीरबल है। अच्छा चलो, राजमहल वापस चलते हैं।” बादशाह ने कहा। बादशाह और रानी वापस अपने महल चले आए और बीरबल को उसकी बुद्धिमतापूर्ण योजना के लिए पुरस्कृत किया गया।

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